एक मस्जिद के लिए तरस रहे हैं मुसलमान

 बुधवार, 2 जनवरी, 2013 को 08:15 IST तक के समाचार
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एथेंस के मुसलमानों की एक अदद इबादतगाह की जरूरत

जुमे की नमाज़ के लिए एथेंस के मुसलमानों को भूमिगत और खचाखच भरे इबादतगाहों में इकठ्ठा होना पड़ता है.

एथेंस इस्लामी दुनिया से लगी यूरोपीय संघ की इकलौती ऐसी राजधानी है, जहाँ मुसलमानों की आबादी तकरीबन तीन लाख होने के बावज़ूद एक भी मस्जिद नहीं है. जुगाड़ सरीखे इंतज़ाम इस शहर में गैरकानूनी हैं.

सन 1832 में ऑटोमन साम्राज्य से आज़ादी मिलने के बाद से ही किसी भी सरकार ने शहर में मस्जिद बनाने की इजाज़त नहीं दी है.

एक ऐसे देश में जहाँ 90 फीसदी आबादी परंपरागत ईसाइयों की हो, वहाँ बहुत से लोग इसे गैर-यूनानी मानते हैं.

लेकिन, चूंकि यूनान मुसलमानों के लिये यूरोपीय संघ का दरवाज़ा रहा है इसलिए यहाँ मुसलमानों की आबादी बढ़ गई है.

आबादी बढ़ने के साथ ही मुसलमान एक आधिकारिक इबादतगाह की अपनी मांग जोर-शोर से रखने लगे हैं.

लोगों का नज़रिया

"यूनान ने दुनिया को लोकतंत्र, सभ्यता और धर्मों को आदर देने का विचार दिया लेकिन वे हमारे मुसलमानों की एक नियमित और कानूनी मस्ज़िद की जरूरत की इज्जत नहीं करते"

सैयद मोहम्मद ज़मील, पाकिस्तान-हेलेनिक सोसायटी

पाकिस्तान-हेलेनिक सोसायटी के सैयद मोहम्मद जमील कहते हैं, “यह मुसलमानों के लिये किसी त्रासदी की तरह है कि यहाँ एक भी मस्जिद नहीं है”.

वह कहते हैं, “यूनान ने दुनिया को लोकतंत्र, सभ्यता और धर्मों को आदर देने का विचार दिया लेकिन वे हमारे मुसलमानों की एक नियमित और कानूनी मस्जिद की जरूरत की इज्जत नहीं करते”.

जुमे की नमाज़ पढ़ने वाला एक मुसलमान कहता है, “पता नहीं क्यों पर मैं समाज से कटा हुआ महसूस करता हूँ. जब भी हमारा कोई जश्न या समारोह होता है, तो ऐसी कोई जगह नहीं होती जहाँ हम ठीक से इकठ्ठे हो सकें. समाज हमें स्वीकार नहीं कर रहा है.”

नव फासीवादी गोल्डन डॉन पार्टी के उत्थान के साथ ही सरकार पर एक सुरक्षित और संरक्षित मस्जिद मुहैया कराने के लिये दबाव बढ़ा है. साथ ही इसके सदस्यों पर भूमिगत इबादतगाहों को नष्ट करने और आप्रवासियों को पीटने का आरोप लगा है.

पार्टी के प्रतिनिधि ल्यास पानागियोटैरोस ने साल की शुरुआत में कहा था कि तुर्की से सटी यूनान की सीमा पर बारूदी सुरंग बिछा दी जानी चाहिए, अगर आप्रवासी उनके देश में घुसने की कोशिश के दौरान मारे जाते हैं तो यह उनकी समस्या है.

बैरक का चयन

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सरकार कोशिश में है कि मुसलमानों को एक मस्ज़िद मिल जाए

लेकिन शायद अब मस्जिद की मांग का समाधान किए जाने का वक्त आ गया है. राजधानी की पहली मस्जिद के तौर पर शहर के करीब सेना की एक ऐसी बैरक को चुना गया है जो अब इस्तेमाल में नहीं है. यहाँ 500 लोग नमाज़ के लिए बैठ सकेंगे.

अगर यह मस्जिद बन जाती है तो इसके पास ही एक चर्च भी होगा, जहाँ दोनों मजहबों के लोग आधिकारिक तौर पर एक साथ इबादत कर सकेंगे.

सरकार की कोशिश है कि इस योजना को अमल में लाया जाए लेकिन अतीत में इस तरह के वादे सियासी वजहों से पूरे नहीं किए जा सके.

ऐसे वक्त में जब देश की माली हालत ठीक नहीं हो और शिक्षा व स्वास्थ्य के लिये पैसा जुटाना कठिन लग रहा हो, सरकारी खज़ाने से 10 लाख यूरो की लागत से मस्जिद बनाने की बात मुश्किल है.

यूनान के चर्च ने मस्जिद बनाने के विचार का स्वागत किया है लेकिन कुछ हलकों से विरोध की आवाज़ें भी उठी हैं.

ग्रीक के बिशप ने कहा है, "यूनान पाँच सौ सालों तक तुर्की के निज़ाम के तहत मुसलमानों के कब्ज़े में रहा है. मस्जिद बनाने से हमें आज़ादी दिलाने वाले शहीदों का अपमान होगा".

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