पाकिस्तान ने कई अहम तालिबान नेता छोड़े

Image caption तालिबान अफ़गान सरकार से बातचीत करने के पक्ष में नहीं हैं

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया में प्रगति के लिए पाकिस्तान ने तालिबान दौर की सरकार में उच्च पदों पर रहने वाले आठ अफगान तालिबान नेताओं को रिहा कर दिया है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय से जारी हुए बयान में आठ तालिबान नेताओं की रिहाई की पुष्टि की गई है लेकिन इसमें पांच नामों का ही जिक्र किया गया है.

ये नाम हैं हेमलंद के पूर्व गवर्नर अब्दुल बारी, पूर्व कानून मंत्री मुल्ला नूरुद्दीन तराबी, पूर्व मंत्री अल्ला दाद तबीब, काबुल के पूर्व गवर्नर मुल्ला दाउद खान और पूर्व गवर्नर मीर अहमद गुल.

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अफगानिस्तान की शांति परिषद की मांग पर अब तक पाकिस्तान 26 तालिबान नेताओं को रिहा कर चुका है.

अफगानिस्तान की सरकार शांति वार्ता में प्रगति के लिए इन तालिबान नेताओं की रिहाई की पाकिस्तान से मांग करती रही है.

अफगानिस्तान ने इस कदम का स्वागत किया है. बीबीसी से बातचीत में अफगानिस्तान के विदेश उप मंत्री जवाद लुदिन ने कहा, “रिहा किए गए लोग शांति प्रक्रिया का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान भी इस प्रक्रिया में भूमिका निभा सकता है. उन्होंने कुछ लोगों को रिहा किया है. शांति परिषद के नेताओं ने अपने पिछले अफगानिस्तान दौरे में रिहाई का आग्रह किया था. और हमने इस कदम का स्वागत किया है. लेकिन हम चाहते हैं कि बातचीत में प्रगति हो और हम आगे और भी लोगों की रिहाई चाहेंगे.”

बरादर अभी भी जेल में

हालांकि अफगान तालिबान के एक अहम नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर अब भी पाकिस्तान में हिरासत में रखे गए हैं.

2014 के आखिर तक नेटो सेनाओं के अफगानिस्तान छोड़ने की उम्मीद है और काबुल में राष्ट्रपति हामिद करजई की सरकार उम्मीद करती है कि रिहा किए गए तालिबान नेता शांति वार्ता में योगदान देंगे.

अभी तक ये साफ नहीं है कि मुल्ला तराबी कितने समय से पाकिस्तान में हिरासत में थे लेकिन बताया जा रहा है कि इस वक्त उनकी सेहत अच्छी नहीं है.

पिछले नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत में अफगान प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी अधिकारियों से मुल्ला तराबी की रिहाई को लेकर बात की थी.

कानून मंत्री के रूप में मुल्ला नुरूद्दीन तराबी तालिबान सरकार के अहम नेताओं में से एक थे. अपने कार्यकाल में वो इस बात के लिए मशहूर थे कि वो काबुल में कानून मंत्रालय की इमारत के बाहर बैठ कर इस बात को देखते थे कि वहां से गुजरने वाले लोगों कपड़ों से संबंधित नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं.

इस इलाके पर नज़र रखने वाले रहीमउल्लाह यूसुफ़ज़ई का कहना है कि छोड़े गए लोग एक ज़माने में अहम हुआ करते थे लेकिन अब वह अहम नहीं रह गए हैं.इनके इतने दिनों तक जेल में रहने के कारण तालिबान के नेतृत्व में दूसरे लोग आ गए हैं.

इनकी रिहाई से कोई बहुत अधिक फ़र्क पड़ने वाला नहीं है क्योंकि इनमें से कोई भी अफ़गान सरकार से बातचीत करने के लिए तैयार नहीं है. अमरीका से जरूर इन्होंने पहले भी बात की है और अब भी शायद बात करने के लिए तैयार हो जाएं.

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