पेरिस: समलैंगिकों की शादी के विरोध में महारैली

रेली
Image caption इससे पहले ऐसी ही रैली नवंबर में भी हुई थी

फ्रांस में समलैंगिकों को शादी करने और बच्चा गोद लेने के अधिकार देने की योजना के विरोध में पेरिस की सड़कों पर लाखों प्रदर्शनकारी उतर आए.

फ्रांस की समाजवादी सरकार इस साल समलैंगिकों के अधिकारों को लेकर क़ानून में बदलाव करने की योजना बना रही है.

इन प्रदर्शनकारियों को कैथोलिक चर्च और दक्षिण पंथी विपक्षी पार्टियों का समर्थन हासिल है. इनकी दलील है कि क़ानून में बदलाव किए जाने से समाज का बुनियादी ढांचा प्रभावित हो जाएगा.

प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर और पोस्टर लिए ट्रेन और बसों से पेरिस पहुंचे. आयोजकों ने इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या आठ लाख बताई है.

इन पोस्टरों पर लिखा है,''हमें तुम्हारा क़ानून नहीं चाहिए, फ्रांस्वां ओलांड'' और ''नागरिक संहिता को मत छुओ.''

पुलिस ने इससे पहले फ्रांसीसी मीडिया को इन प्रदर्शनकारियों की संख्या 120,000 बताई थी और वहीं एक सरकारी मंत्री ने कहा है कि इन लोगों की संख्या आयोजकों के अनुमान से कम है.

पिछले साल नवंबर में भी ऐसी ही रैली हुई थी जिसमें एक लाख लोगों ने भाग लिया था.

राष्ट्रपति की परीक्षा

Image caption समलैंगिकों के अधिकारों के लिए भी कुछ लोगों ने प्रदर्शन किए

फ्रांस में समलैंगिक जोड़ों को साथ रहने को क़ानूनी मान्यता दी गई है और फ्रांस्वां ओलांड ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान इस अधिकार का विस्तार करने की बात भी कही थी.

मध्य दक्षिणपंथी यूएमपी पार्टी के अध्यक्ष जीन फ्रांस्वां कोप का कहना है कि ये रैली राष्ट्रपति के लिए एक परीक्षा है क्योंकि यहां लाखों ऐसे लोग हैं जो इसे लेकर किए जाने वाले सुधार को लेकर चिंतित हैं.

धुर दक्षिणपंथी नेशनल फ्रंट भी क़ानून में बदलाव किए जाने के खिलाफ है हालांकि इस फ्रंट के नेता मैरिन ले पेन ने इस मार्च से इस तर्क पर दूरी बनाए रखी कि राजनीतिज्ञ ये मुद्दा फ्रांस की वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए उठा रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार इस मुद्दे पर चर्च और दक्षिणपंथी पार्टियों से मिल रहे समर्थन के बावजूद आयोजक ये जताने की कोशिश कर रहे है कि उनका ये पूरा आंदोलन गैर राजनीतिक और गैर धार्मिक और समलैंगिकों के खिलाफ नहीं है.

इस सप्ताहांत ले नॉवेल ऑबसर्वेटर अखबार ने 1000 लोगों पर किए गए सर्वेक्षण को छापा था जिसमें 56 फीसदी लोग समलैंगिक विवाह के समर्थन में थे जबकि 50 फीसदी ने समलैंगिकों के बच्चा गोद लेने के अधिकार का विरोध किया था.

इस सर्वेक्षण में 52 फीसदी लोगों ने चर्च के क़ानून का विरोध करने के फैसले को अस्वीकृति दी थी.

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