भारत ने भी ड्रीमलाइनर को ज़मीन पर उतारा

जापान में आपात स्थिति में उतरा 787 ड्रीमलाइनर
Image caption जापान में आपात स्थिति में उतरा 787 ड्रीमलाइनर

जापान और अमरीका के बाद भारत ने भी बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमानों की उड़ान कुछ समय के लिए रोक दी है.

नागरिक उड्डयन मामलों के महानिदेशक अरुण मिश्रा ने बीबीसी को बताया, "कुछ समय के लिए ये फ़ैसला किया गया है. बोइंग इस बारे में जब सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ दूर कर देगा तो उड़ानें फिर से शुरू हो सकेंगी."

भारत ने ये फ़ैसला अमरीका में उड्डयन क्षेत्र पर निगरानी रखने वाले फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़एए) के उस फ़ैसले के बाद लिया जिसके तहत सभी अमरीकी विमान कंपनियों को ड्रीमलाइनर की उड़ानें कुछ समय के लिए बंद करने के लिए कहा गया है.

इससे पहले जापान की दो प्रमुख कंपनियाँ ड्रीमलाइनर की उड़ानें रोक चुकी हैं क्योंकि उन विमानों की बैटरी में गड़बड़ी आने के बाद विमान को आपात स्थिति में उतारना पड़ा था.

वैसे बोइंग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि 787 विमान पूरी तरह सुरक्षित है.

अमरीका में रोक

Image caption ड्रीमलाइनर विमानों के बारे में कहा गया कि उससे यात्रियों को उड्डयन क्षेत्र में नया अनुभव मिलेगा

अमरीका में उड़ानें रोकने का फ़ैसला जापान में ड्रीमलाइनर के एक विमान में बैटरी में गड़बड़ी आने के बाद किया गया है. अब एफ़एए ने कहा है कि उड़ानों से पहले कंपनियों को ये देखना होगा कि बैटरियाँ सुरक्षित हैं या नहीं.

अमरीका में वैसे फ़िलहाल सिर्फ़ यूनाइटेड एयरलाइंस ही 787 ड्रीमलाइनर विमानों का इस्तेमाल कर रही है.

जापान में ऑल निप्पॉन एयरवेज़ की उड़ान संख्या एनएच 692 को उड़ान के तुरंत बाद ही उतारना पड़ा था. इसके बाद एयरवेज़ ने 17 ड्रीमलाइनरों की उड़ानें रोक दी हैं.

जापान एयरलाइंस ने भी इसी तरह की कार्रवाई करते हुए अगले नोटिस तक 787 ड्रीमलाइनर की उड़ानें रद्द कर दी हैं.

जापान की घटना

एशिया में जापान के अलावा सिर्फ़ भारत के पास ड्रीमलाइनर विमान हैं. एयर इंडिया के पास छह ड्रीमलाइनर विमान हैं.

जापान की घटना के बाद भारतीय अधिकारियों ने कहा था कि वे बोइंग के साथ संपर्क में हैं मगर उन्होंने ड्रीमलाइनर विमानों की उड़ान तब तक नहीं रोकी जब तक अमरीका की ओर से ये फ़ैसला नहीं आया.

बुधवार को जापान में हुई घटना में जब विमान पश्चिमी जापान के यामागुची उबे से उड़ा और टोकियो के हानेदा हवाई अड्डे की ओर जा रहा था तो पायलट ने अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर चेतावनी का निशान देखा.

ऑल निप्पॉन एयरवेज़ के अनुसार उस संदेश में बताया गया था कि बिजली के उपकरणों वाले एक हिस्से में धुआँ उठ रहा है. धुआँ कहाँ से निकला इसका पता नहीं चल सका है. पायलट को ये संदेश मिला की बैटरी में गड़बड़ी है और इसके बाद विमान को उड़ान के आधे घंटे बाद ही ताकामात्सु हवाई अड्डे पर उतारा गया.

अमरीकी शेयर बाज़ार में इसके बाद बोइंग के शेयरों में तीन प्रतिशत की गिरावट देखी गई है.

मुश्किलें

पिछले कुछ हफ़्तों में ड्रीमलाइनर विमानों में ईंधन लीक करने, एक कॉकपिट की खिड़की के शीशे में दरार आ जाने, ब्रेक की समस्याएँ और बिजली के कुछ उपकरणों में आग लग जाने जैसी परेशानियाँ सामने आई हैं.

Image caption भारत में एयर इंडिया के पास पाँच ड्रीमलाइनर विमान हैं

इन परेशानियों को जहाँ यात्रियों के बीच और मीडिया में सुरक्षा से जुड़े बड़े मसले बताया जा रहा है तो वहीं उड्डयन क्षेत्र पर नज़र रखने वाले कई लोगों के अनुसार उन्हें इससे ज़्यादा आश्चर्य नहीं हुआ है.

मगर जैसे-जैसे इस तरह की परेशानियाँ बढ़ रही हैं इसे सिर्फ़ शुरुआती दिक्कतें बताने वालों के लिए भी मुश्किलें बढ़ रही हैं.

ये कहा जाना कि ये सभी परेशानियाँ आसानी से ठीक की जा सकने वाली गड़बड़ियाँ हैं, निश्चित तौर पर सवाल उठाता है कि अक्तूबर 2011 में उड़ान भरने से पहले इनके बारे में पता क्यों नहीं चला और उसे ठीक क्यों नहीं कर लिया गया?

ऑल निप्पॉन एयरवेज़ ही ड्रीमलाइनर के पहले ख़रीदार थे जिन्हें ये विमान मिलना था. उन्हें भी डिलिवरी में तीन साल की देरी हुई. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि बोइंग के इंजीनियरों ने उस दौरान सुरक्षा के सभी पहलुओं की जाँच क्यों नहीं की.

इधर इन विमानों का इस्तेमाल करने वाली जिन एयरलाइंस को इनकी उड़ानें रद्द करनी होंगी उनके लिए चिंता ये होगी कि सुरक्षा के चलते उड़ान रद्द होने के बाद उनकी लागत पर तो कोई कमी आएगी नहीं या फिर उन्हें इसकी जाँच में सहयोग की तैयारी करनी होगी और साथ ही इन सबकी मरम्मत में लगने वाला समय भी आख़िरकार एयरलाइंस को ही नुक़सान पहुँचाएगा.

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