अल्जीरिया में बंधक बनानेवाले अपहर्ता मारे गए

  • 20 जनवरी 2013
अल्जीरिया
Image caption अब तक सैकड़ों बंधक रिहा कराए जा चुके हैं

अल्जीरिया का बंधक संकट ख़त्म हो गया है. निर्णायक सैन्य कार्रवाई में 11 अपहर्ता मारे गए जबकि अपहर्ताओं ने सात बंधकों की हत्या भी कर दी. लेकिन कई विदेशी कर्मचारी अब भी लापता हैं.

अल्जीरियाई सेना का कहना है कि आखिरी कार्रवाई में उसके सैनिकों ने गैस संयंत्र में मौजूद 11 इस्लामी चरमपंथियों को मार दिया है. सेना का ये भी कहना था कि अपहर्ताओं ने बचे सात विदेशी बंधकों की सैनिक कार्यवाई के दौरान हत्या कर दी.

चार दिन तक चले इस घटना में में कुल मिलाकर 23 बंधक और 32 अपहर्ता मारे गए. मारे गए बंधकों में से कुछ की नागरिकता के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है.

लापता नागरिक

ब्रिटेन का कहना है कि उसके छह नागरिक या तो मारे जा चुके हैं या फिर उनकी बारे में कोई जानकारी नहीं है. वहीं फ्रांस और अमरीका ने अपने एक-एक नागरिक की मौत की पुष्टि की है जबकि जापान, नॉर्वे और कोलंबिया ने अपने कम-से-कम एक नागरिक की जान के बारे में आशंका जताई है.

ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा, "इस बर्बर हमले में एक ब्रितानी नागरिक पहले ही मारा जा चुका है और हमें पांच अन्य लोगों को लेकर आशंकित हैं जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं है."

वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति फ़्रांसुआ ओलांद ने अल्जीरियाई सुरक्षा बलों का बचाव करते हुए कहा कि उन चरमपंथियों के लिए वही "सबसे उपयुक्त" कार्यवाई थी. उन्होंने कहा कि बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं थी.

घटना

बुधवार को चरमपंथियों ने अल्जीरिया के एक गैस संयंत्र पर हमला किया और बहुत से लोगों को बंधक बना लिया था.

इनमें से 573 अल्जीरियाई और 132 विदेशियों में से 100 लोगों को पहले को ही रिहा करा लिया गया था. लेकिन चरमपंथियों के अनुसार सात बंधक उनकी कैद में रह गए थे.

लेकिन 30 विदेशियों को लेकर अनिश्चय की स्थिति बनी हुई थी जिनमें 10 ब्रितानी नागरिक भी शामिल हैं.

एपीएस के अनुसार इससे पहले भी इस घटना में 12 अल्जीरियाई और विदेशी कर्मचारी मारे जा चुके थे.

धमकी

बंधकों की रिहाई के लिए निर्णायक कार्रवाई शुरू होने से पहले अपहर्ताओं के नेता अब्दुल रहमान अल-निजेरी ने कहा था कि सरकार को दो विकल्पों में कोई एक चुनना होगा- अपहर्ताओं से बातचीत या बंधकों को मरने के लिए छोड़ देना.

उन्होंने कहा था कि अगर अल्जीरिया की सेना ने बल प्रयोग किया तो गैस संयंत्र के परिसर को उड़ा दिया जाएगा.

बंधकों को छुड़ाने के अभियान में जिस संयंत्र पर हमला किया गया उसे ब्रिटेन की कंपनी बीपी, नॉर्वे की कंपनी स्टैटऑइल और अल्जीरिया की सरकारी कंपनी मिल कर चलाती हैं.

अपहर्ताओं ने एक बयान में कहा था कि गैस संयंत्र पर ये हमला माली में इस्लामी गुटों के खिलाफ फ्रांसीसी सेना के हस्तक्षेप के जवाब में किया गया है.

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