इसराइल में नेतन्याहू का गठबंधन जीता

 बुधवार, 23 जनवरी, 2013 को 12:46 IST तक के समाचार
netanyahu

नेतनयाहू के गठबंधन की सीटें घटने की संभावना है

इसराइल में प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की अगुवाई वाले दक्षिणपंथी गठबंधन ने संसदीय चुनावों में जीत हासिल कर ली है लेकिन उसका बहुमत घट गया है.

चुनाव के बाद हुए सर्वेक्षणों के मुताबिक नेतन्याहू के लिकुड-बेतेन्यू गठबंधन को संसद में 31 सीटें मिलेंगी जबकि निवर्तमान संसद में उसके पास 42 सीटें थीं.

आश्चर्यजनक रुप से येश अतिद (यही भविष्य है) नाम की मध्यमार्गी पार्टी को 18-19 सीटें मिलने की संभावना है जबकि लेबर के 17 सीटें पर कब्जा करने का अनुमान है.

चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि नए मंत्रिमंडल के गठन में जमकर राजनीतिक खरीद फरोख्त हो सकती है. उनका कहना है कि नेतन्याहू का गठबंधन विपक्ष में भी बैठ सकता है.

चुनाव के सारे परिणाम बुधवार तक आने की संभावना है और आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा 30 जनवरी को की जाएगी.

व्यापक गठबंधन

मतदान खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने फेसबुक पन्ने पर लिखा, “चुनाव नतीजों से साफ है कि इसराइली लोग चाहते हैं कि मैं प्रधानमंत्री पद पर बना रहूं और जितना संभव हो एक व्यापक गठबंधन बनाऊं.”

"चुनाव नतीजों से साफ है कि इसराइली लोग चाहते हैं कि मैं प्रधानमंत्री पद पर बना रहूं और जितना संभव हो एक व्यापक गठबंधन बनाऊं."

बेन्यामिन नेतन्याहू, इसराइली प्रधानमंत्री

इसराइली संसद क्नेसेट की 120 सीटों के लिए कुल 32 पार्टियां चुनाव मैदान में थी. इसराइल में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत चुनाव होते हैं. किसी भी पार्टी को संसद में जगह पाने के लिए कम से कम 2 प्रतिशत वोट जरूर हासिल करने होते हैं.

क्या रहे मुद्दे

अगर वास्तविक चुनाव नतीजे चुनावी सर्वेक्षणों के अनुरूप ही रहे तो नेतन्याहू तीसरी बार प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता संभालेंगे. लेकिन उनका बहुमत घट जाएगा.

इसराइल में दक्षिणपंथी विचारधारा पर लिकुड और बेतेन्यू पार्टी के दबदबे को हबायित हायेहुदी ने चुनौती दी है जिसका नेतृत्व एक अमीर कारोबारी नेफ्ताली बेनेट कर रहे हैं. बेनेट नेतन्याहू के चीफ ऑफ स्टाफ भी रह चुके हैं.

इसराइल में चुनाव

इन चुनावों में दक्षिणपंथी बलों का उभार देखने को मिला है

वो अधिकृत पश्चिम तट के एक बड़े हिस्से को इसराइल में मिलाने की वकालत करते हैं और इसराइल व फलस्तीन के संकट के लिए दो राष्ट्रों के समाधान के विचार को भी खारिज करते हैं.

चुनाव के सभी परिमाण बुधवार दोपहर तक आने की उम्मीद है जबकि नई सरकार के गठन में हफ्तों का समय लग सकता है.

63 वर्षीय नेतन्याहू 2009 से प्रधानमंत्री पद पर हैं. इससे पहले वो 1996 से 1999 के बीच भी इसराइल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं.

हाल के वर्षों में नेतन्याहू ने पश्चिमी तट और पूर्वी येरुशलम में इसराइली बस्तियों के निर्माण का काम तेज किया है जिसके लिए उन्हें न सिर्फ फलस्तीनी नेताओं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना झेलनी पड़ी है.

हालांकि इस बार इसराइल में चुनावों में सामाजिक और आर्थिक मुद्दे खास तौर से छाए रहे और फलस्तीनियों के साथ स्थाई शांति की संभावनाओं पर उतना जोर नहीं दिखाई दिया.

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