क्या खाली हो गया है ज़िम्बॉब्वे का खजाना?

टेंडई बिटी
Image caption टेंडई बिटी का कहना है कि उनकी बात को सही ढंग से नहीं लिया गया

अफ्रीकी देश ज़िम्बॉब्वे के वित्त मंत्री टेंडई बिटि ने कहा है कि पिछले सप्ताह उनके देश के सार्वजनिक कोष में सिर्फ 217 डॉलर बचे थे. बिटि के मुताबिक ये स्थिति सरकारी कर्मचारियों को तनख्वाह देने के बाद हुई.

हालांकि उनका कहना है कि एक दिन बाद ही करीब तीन करोड़ डॉलर का राजस्व आ गया था.

बिटि ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने ये रहस्योद्घटान इस बात पर ज़ोर देने के लिए किया है कि सरकार चुनावों के लिए पैसा खर्च करने में सक्षम नहीं है, न कि इसलिए कि देश दिवालिया हो गया है.

ज़िम्बॉब्वे में इस साल चुनाव होने हैं. इनमें राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की ज़ानू-पीएफ पार्टी का मुकाबला टेंडई बिटि की मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज से है.

वित्त मंत्री बिटि ने इससे पहले शिकायत की थी कि देश में हीरा खदानों से जुड़ी कंपनियाँ सरकार को राजस्व अदा नहीं कर रही हैं.

साझा सरकार

ज़िम्बॉब्वे में साल 2009 में साझा सरकार बनी थी और तब से वहाँ सालों की महँगाई पर काबू पाया जा सका लेकिन देश की आर्थिक स्थिति जस की तस बनी हुई है.

बीबीसी के एक रेडियो कार्यक्रम में बिटि ने कहा कि उनके वक्तव्य को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है.

उन्होंने कहा, “आप पत्रकार लोग बहुत ही शरारती हो. मेरे कहने का मतलब था कि ज़िम्बॉब्वे की सरकार के पास चुनाव में खर्च करने या फिर जनमतसंग्रह के लिए पैसे नहीं हैं.”

बिटि ने कहा, “इस बात को थोड़ा नाटकीय बनाते हुए मैंने ये कह दिया कि गुरुवार को सरकारी अधिकारियों को वेतन देने के बाद खजाने में सिर्फ 217 डॉलर बचे थे. हालांकि अगले ही दिन तीन करोड़ डॉलर हमारे खाते में आ गए थे.”

दरअसल ज़िम्बॉब्वे को नए संविधान के मामले में जनमत संग्रह और चुनाव के लिए करीब बीस करोड़ डॉलर की जरूरत है.

सरकारी अखबार हेराल्ड का कहना है कि वित्त मंत्री बिटि और न्याय मंत्री पैट्रिक चिनामासा को इस पैसे का इंतज़ाम करने की ज़िम्मेदारी दी गई है.

जानकारों का कहना है कि ज़िम्बॉब्वे में साझा सरकार कुछ हद तक आर्थिक स्थिरता हासिल करने में सफल रही है. लेकिन बेरोज़गारी के ऊंचे स्तर का मतलब है कि देश में कर वसूली और राजस्व काफ़ी कम है.

बिटि ने बीबीसी को बताया, “हम एक चुनौतीपूर्ण स्थिति में हैं. हम छोटी अर्थव्यवस्था वाले देश हैं और हमें बहुत कुछ करना है, लेकिन ग्रीस के वित्त मंत्री तो हमसे भी बुरी स्थिति का सामना कर रहे हैं.”

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