कैमरन करेंगे त्रिपक्षीय शांति वार्ता की अगुवाई

Image caption हामिद करज़ई और आसिफ अली ज़रदारी के साथ डेविड कैमरन.

अफ़ग़ान शांति वार्ता पर विचार-विमर्श के लिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के नेताओं के साथ अहम बातचीत करेंगे.

त्रिपक्षीय शिखर वार्ता की ये तीसरी बैठक है और इसका लक्ष्य क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए दोंनो देशों के बीच सहयोग को बेहतर बनाना है.

अफ़ग़ान, पाकिस्तानी सेना और खुफ़िया विभागों के प्रमुख पहली बार बातचीत का हिस्सा होंगे.

नैटो सुरक्षाबल वर्ष 2014 में अफ़ग़ानिस्तान से वापस आ जाएंगे.

ये प्रक्रिया डेविड कैमरन ने पिछले साल शुरु की थी. इस बैठक में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भविष्य में साथ मिलकर काम करने पर विचार करेंगे.

शांति बहाली है मकसद

बीबीसी के विश्व मामलों के संवाददाता माइक वुल्डरिज के मुताबिक बातचीत में तेज़ी से पास आ रही अफ़ग़ानिस्तान से नैटो सेना की वापसी की समयसीमा भी एक अहम मुद्दा होगा क्योंकि पाकिस्तान के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा चिंता का विषय है.

रविवार शाम को डेविड कैमरन लंदन के उत्तर में स्थित अपने आधिकारिक निवास चैकर्स में हामिद करज़ई और आसिफ़ अली ज़रदारी के लिए भोज आयोजित कर रहे हैं.

इसके बाद सोमवार को वो, दोंनो राष्ट्राध्यक्षों और उनके प्रमुख अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे.

ब्रितानी प्रधानमंत्री के कार्यालय 10 डाउनिंग स्ट्रीट से एक वक्तव्य में कहा गया है, "ये त्रिपक्षीय वार्ता तालिबान को साफ़ संदेश भेजती है कि सबके लिए अफ़ग़ानिस्तान में शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने का यही सही समय है. जैसा कि प्रधानमंत्री ने पहले कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता केवल अफ़ग़ानियों के ही नहीं बल्कि अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसियों और ब्रिटेन के हित में भी है."

बीबीसी संवाददाता ने बताया कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पनपा अविश्वास भी एक अहम मुद्दा है.

अफग़ान सरकार ने साफ किया है कि हाल ही में पाकिस्तान ने कई तालिबानी कैदियों को रिहा किया है जिसे एक सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जा सकता है.

हालांकि, अफगानिस्तान ने अफगान तालिबान के नंबर दो प्रमुख मुल्ला बरादर को छोड़े जाने की अपेक्षा जताई है, ताकि तालिबान और काबुल के बीच बातचीत में वो अहम भूमिका निभा सके.

पहली बार त्रिकोणीय बातचीत में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सेना और खूफिया विभागों के प्रमुखों को भी शामिल किया गया है.

बीबीसी संवादाता ने बताया कि अधिकारी इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि इस कदम से बेहद नाजुक मुद्दों पर भी सामंजस्य बिठाना संभव हो पाएगा.

क़रजई ने बीबीसी से कहा है, “ना साम्यवादी सरकार और ना ही मुजाहिदिन देश में शांति और सुरक्षा कायम कर सकता है, अगर हमने बेहद सजग तरीके से खुद शांति वार्ता को सफल नहीं बनाया तो यहां स्थिरता और सुरक्षा लाना संभव नहीं हो पाएगा.”

त्रिकोणीय शांति वार्ता की दो बैठकें पिछले साल न्यूयॉर्क और काबुल में हुआ था.

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