पाकिस्तानी तालिबान बातचीत को तैयार पर शर्तों के साथ

Image caption तहरीके तालिबान पहले भी बातचीत की पेशकश कर चुका है.

पाकिस्तान के प्रतिबंधित चरमपंथी गुट तहरीके तालिबान ने सरकार के साथ बातचीत की पेशकश की है.

तहरीके पाकिस्तान पहले भी बातचीत की पेशकश कर चुका है दिसंबर 2011 में पाकिस्तानी तालिबान के तत्कालीन उप कमांडर मौलवी फकीर मोहम्मद ने स्वीकार किया था कि पाकिस्तान सरकार के साथ शांति वार्ता चल रही है.

लेकिन बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला. अब एक बार फिर संगठन की ओर से बातचीत की पेशकश आई है. लेकिन साथ में कुछ शर्तें भी हैं.

पहली शर्त ये है कि जिन तहरीके तालिबान के लोगों को पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार किया है उन्हें रिहा किया जाए.

बातचीत के लिए शर्ते

दूसरी शर्त ये है कि सरकार और सेना के साथ बातचीत की गारंटी तीन प्रमुख व्यक्ति लें जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़, इस्लामी पार्टी जेयूआई के मौलाना फज़लुर रहमान, जमात-ए- इस्लामी के मुन्नवर हसन शामिल हैं.

नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ ने तालिबान के इस प्रस्ताव के प्रति अपनी रज़ामंदी ज़ाहिर कर दी है.

जानकारों के मुताबिक इस्लामी पार्टी जेयूआई के मौलाना फज़लुर रहमान और जमात-ए- इस्लामी के मुन्नवर हसन भी इस तरह की बातचीत में सहयोग कर सकते हैं.

इस बातचीत के लिए आखिर ये ही नाम क्यों सुझाए गए हैं. इस सवाल के जवाब में पाकिस्तान के वरिष्ट पत्रकार रहीमुल्ला यूसफ़ज़ई कहते हैं, “अभी पाकिस्तान में चुनाव होने हैं और माना जा रहा है कि नवाज़ शरीफ़ की पार्टी इन चुनावों में महत्वपूर्ण हो सकती है इसी वजह से उनका नाम सुझाया गया है.”

रहिमुल्ला यूसफ़ज़ई कहते हैं कि इस बातचीत में सेना को शामिल करने का भी सुझाव भी दिया गया है क्योंकि तालिबान जानता है कि सेना को शामिल किए बिना बातचीत का कोई मतलब नहीं हैं.

सेना की रज़ामंदी

रहिमुल्ला यूसफ़ज़ई कहते हैं, “पहले भी तहरीके तालिबान और पाकिस्तानी सरकार में बातचीत हुई हैं लेकिन ये बातचीत सिर्फ इसलिए नहीं सफल हो पाई क्योंकि इनमें सेना शामिल नहीं थी. तहरीके तालिबान के खिलाफ़ मौजूदा अभियान भी सेना ही चला रही है और उनके लोगों को भी सेना ने ही गिरफ्तार किया है.”

हालाकि पाकिस्तानी सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

जानकारों का मानना है कि ये बातचीत चुनावों के बाद ही ज़मीनी स्तर पर शुरु हो सकती है. मौजूदा पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सरकार ने तहरीके तालिबान से बातचीत की कोई कोशिश नहीं की है.

तहरीके तालिबान वो चरमपंथी संगठन है जो पाकिस्तान में कई हमलों और आत्मघाती हमलों के लिए ज़िम्मेदार है.

ये अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से सटे पाकिस्तान के दक्षिणी वजीरिस्तान क़बायली इलाक़ों में सक्रिय चरमपंथी संगठन है.

संबंधित समाचार