ब्रह्मपुत्र पर बांध से नहीं होगा भारत को नुकसान:चीन

ब्रह्मपुत्र
Image caption भारत में ब्रह्मपुत्र में अकसर बाढ़ आती रहती है

चीन की सरकार का कहना है कि ब्रह्मपुत्र नदी पर उसके तीन बांध बनाने की योजना से निचले क्षेत्रों पर असर नहीं पड़ेगा.

चीन के विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग का कहना है कि चीन इस मुद्दे पर भारत से संपर्क में है और उसे सहयोग कर रहा है साथ ही उन्होंने ये आश्वासन भी दिया कि बांध के निर्माण से भारत पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा.

विदेश मंत्री का कहना है, ''चीन ने हमेशा सीमा पार नदियों के विकास के मुद्दे पर जिम्मेदाराना रवैया अपनाया है.''

उनका कहना था, ''इस निर्माण से न ही बाढ़ नियंत्रण की कोशिशों और न ही निचले क्षेत्रों में पर्यावरण पर असर पड़ेगा.''

हाल ही में चीन की कैबिनेट ने ब्रह्मपुत्र नदी पर दागो, चाइशा और शिहू में बांध बनाने के फैसले को स्वीकृति दी है. इस योजना के बारे में भारत को सूचित नहीं किया गया था.

एतराज़

इस कदम पर कड़ा एतराज़ जताते हुए भारत ने चीन से कहा है था कि उसे ये सुनिश्चित करना होगा कि नदी के ऊपरी भाग में निर्माण से भारत को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा.

पिछले हफ्ते ही चीनी अधिकारियों ने कहा था, ''कोई भी नई परियोजना को लागू करने से पहले उसे वैज्ञानिक अध्ययन से गुजरना होगा और नदी के ऊपरी और निचले हिस्सों में पड़ने वाले देशों के हितों का ध्यान रखना होगा.''

चीन ने साल 2011-2015 तक ऊर्जा के क्षेत्र में विकास के लिए एक नया ब्लू प्रिंट तैयार किया है जिसमें ये घोषणा की गई है कि ब्रह्मपुत्र नदी पर तीन स्थानों पनबिजली परियोजना लगाएगा.

इससे पहले जांगमु में एक ऐसी परियोजना का निर्माण हो रहा है.

पिछले साल मार्च 2012 में चीनी विदेश मंत्री यांग चाइशी की यात्रा के दौरान भारत ने कहा था, ''कई बार दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों और उच्च स्तर पर इस मुद्दे पर बातचीत हुई है. चीन ने कई बार ये कहा भी है कि वो सीमावर्ती नदियों में ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे उन देशों के हितों पर असर पड़े जहां से होकर नदियां बहती हैं.''

भारत के लिए सबसे बड़ी दिक्कत केवल यही नहीं है कि चीन नदी पर बांध बना रहा है और वो अपनी दीर्घकालीन योजना के तहत ब्रह्मपुत्र नदी के पानी का मार्ग बदल सकता है बल्कि भारत की परेशानी ये है कि वो इस मामले में किसी अंतरराष्ट्रीय क़ानून को भी मानने से इनकार करता है.

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