सऊदी अरब से ड्रोन हमले कर रहा है सीआइए!

  • 7 फरवरी 2013
ड्रोन
Image caption अमरीकी अधिकारियों ने इस खबर को सार्वजनिक न करने को कहा था

अमरीकी मीडिया का कहना है कि अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए पिछले दो सालों से सऊदी अरब में गोपनीय तरीके से एक हवाई पट्टी का संचालन कर रही है जहां से मानवरहित ड्रोन हमले किए जाते हैं.

इस हवाई पट्टी का निर्माण अरब प्रायद्वीप में अल-कायदा से जुड़े लोगों पर ड्रोन हमलों के लिए किया गया था.

इसी हवाई पट्टी से सितंबर 2011 में अनवर अल-अवलाकी पर हमला किया गया था जो कि अमरीका में जन्मे मुस्लिम धर्मगुरु थे और उन पर आरोप था कि वो अल-कायदा के विदेश विभाग के प्रमुख थे.

अमरीकी मीडिया को इस बारे में जानकारी थी लेकिन उसने खबर को दबाए रखा.

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कहा था कि इसके खुलासे से अल-कायदा के खिलाफ जारी कार्रवाई पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. साथ ही अधिकारियों का ये भी कहना था कि ऐसा करने से चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई में सऊदी अरब के सहयोग पर भी बुरा असर पड़ सकता था.

अमरीकी सेना ने साल 2003 में औपचारिक रूप से सऊदी अरब से अपने सैनिकों को वापस बुला लिया था. इस क्षेत्र में साल 1991 में खाड़ी युद्ध के बाद से करीब 5000 से दस हजार के करीब अमरीकी सैनिक तैनात थे.

साल 2003 के बाद वहां सिर्फ अमरीकी सैन्य प्रशिक्षण मिशन के कर्मचारी ही रह गए थे.

क्रूज मिसाइलों से हमले

हालांकि अमरीकी मीडिया में इसकी जरा भी चर्चा नहीं हुई लेकिन इस हवाई पट्टी के निर्माण के आदेश साल 2009 में दिए गए थे जब यमन में क्रूज मिसाइलों पर हमले हुए थे.

अमरीकी अधिकारियों ने अखबार को बताया कि सीआइए ने सबसे पहले इस गुप्त हवाई अड्डे का इस्तेमाल अवलाकी को मारने के लिए किया.

उसके बाद से सीआइए ने यमन में अल-कायदा के कई संदिग्ध बड़े नेताओं पर हमले के आदेश दिए.

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के खाड़ी मामलों के जानकार क्रिस्तियन कोट्स ने बीबीसी को बताया कि अल-कायदा के बढ़ते प्रभाव से सऊदी अरब के डर से हो सकता है कि अमरीकी प्रशासन को अपने यहां से ऐसा करने की अनुमति दी हो.

उनके मुताबिक, “सऊदी अरब अपनी आंतरिक सुरक्षा के लिए अल-कायदा को बहुत बड़ा खतरा मानता है. इन्हें डर है कि अल-कायदा कहीं उनके ऊर्जा ठिकानों और शाही परिवार पर न हमले कर दे. इसलिए ये उनकी एक रणनीति हो सकती है.”

कोट्स कहते हैं कि इस इलाके में हवाई पट्टी की मौजूदगी अमरीका और सऊदी अरब दोनों के लिए एक संवेदनशील मुद्दा है.

इस बीच सऊदी अरब के गृह मंत्री के एक करीबी के मुताबिक जब बीबीसी ने इस मामले में बात करने की कोशिश की तो राजकुमार मोहम्मद बिन नायफ ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया.

वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के आतंकवाद विरोधी अभियान के सलाहकार जॉन ब्रेनन ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो कि खुद सऊदी अरब में सीआइए के प्रमुख रह चुके हैं.

सऊदी अरब में मुसलमानों के कुछ सबसे पवित्र स्थान हैं, इसीलिए वहां अमरीकी फौजों की मौजूदगी को बहुत से मुसलमान समुदाय के साथ धोखा करार देते हैं

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