तालिबान की ज़मीं से आती अफ़गान संगीत की सदा

  • 10 फरवरी 2013
अफगानिस्तान संगीत
Image caption अफगानिस्तान बदलाव के दौर से गुजर रहा है.

उनमें से कुछ लोग अनाथ कहे जाते हैं. एक ने अपने दिन प्लास्टिक के बैग बेचकर गुज़ारे हैं लेकिन अचानक सब कुछ बदल गया है. अफगान नौजवानों का एक समूह संगीत के अपने फन से अमरीका में लोगों का मन मोह रहा है.

अफगानिस्तान में बदलाव की बयार को बयान करने के लिए 48 किशोर छात्रों का एक दल अमरीका के प्रतिष्ठित संगीत कार्यक्रमों में अपने पारंपरिक संगीत और पश्चिमी शैली का अनोखा संगम पेश कर रहा है.

जब मिलाद यूसुफी बहुत छोटे थे तब अफगानिस्तान के ज्यादातर हिस्सों पर तालिबान की हुकूमत थी.

इस्लाम की बेहद संकीर्ण व्याख्या करते हुए तालिबान शासन ने मुल्क में संगीत पर बंदिश लगा दी थी.

मिलाद की कहानी

महज पांच साल पहले पियानो को हाथ लगाने वाले मिलाद हाल ही में जर्मनी में आयोजित हुए एक अंतरराष्ट्रीय संगीत प्रतिस्पर्धा में तीसरे स्थान पर रहे.

अपनी लंबी जुल्फों को करीने से संवारकर रखने वाले मिलाद कहते हैं,“संगीत ही वह इकलौती चीज है जो अमन ला सकती है”.

मिलाद अपने हीरो मशहूर पियानो वादक क्लाउडियो अराउ और व्लादिमिर होरोइट्ज का जिक्र करते हैं.

धाराप्रवाह अंग्रेजी में मिलाद ने कहा,“अगर मीडिया युद्ध का प्रसारण करता है और जैसा कि अफगानिस्तान की छवि है. अगर हम संगीत रचते हैं तो लोगों का नजरिया बदलेगा”.

मिलाद की तालीम अफगानिस्तन नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ म्यूजिक में हुई है. इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी.

मिलाद की तरह ही यहां 144 बच्चे तालीम हासिल कर रहे हैं और वे यहां एक इम्तेहान से गुजरकर पहुंचे हैं.

इंस्टीच्यूट में केवल संगीत ही नहीं बल्कि अंग्रेजी जुबान के अलावा कुराण से लेकर कंप्यूटर जैसे दूसरे विषय भी पढ़ाए जाते हैं.

‘विवालडी के चार मौसम’

Image caption संगीत को लेकर अफगानिस्तान की नई पीढ़ी उत्साहित है.

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक ये बच्चे वाशिंगटन के कैनेडी सेंटर में गुरुवार को अपना फन पेश करेंगे और 12 फरवरी को उनका ठिकाना न्यूयॉर्क के कारनेगी हॉल में होगा.

उनकी संगीतमय पेशकश में ‘विवालडी के चार मौसम’ का एक संस्करण भी होगा.

इंस्टीच्यूट की बुनियाद रखने वाले अहमद सरमस्त कहते हैं,”आप पारंपरिक विवाल्डी सुनने की उम्मीद कर रहे होंगे लेकिन यहां हम आपको ‘चार मौसमों’ को अफगानी धुनों पर अपनी शैली में सुनाएंगे”.

अहमद ने कहा,”हम इस तरह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बताना चाहते हैं कि हम आपका ही एक हिस्सा हैं, हम आपका हिस्सा होना चाहते हैं. हम एक ही जुबान बोल सकते हैं और वह संगीत की जुबान”.

कद्रदान जॉन केरी

इन अफगान फनकारों को सुनने वालों में अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी भी थे. खास बात यह है कि केरी के ही कार्यकाल में ही वर्ष 2014 में अफगानिस्तान से अमरीकी फौज की वापसी प्रस्तावित है.

केरी ने कहा,”संगीत अमन, उम्मीदों और सपनों की दुनिया भर की भाषा है”.

केरी ने अफगानिस्तान को लेकर उम्मीद जताई और कहा कि आप शांति और स्थायित्व पा सकते हैं.

ऑस्ट्रेलिया में संगीत में डॉक्टरेट करने वाले अहमद सरमस्त कहते हैं कि इन अफगान नौजवानों का अंदाज उन्हें आने वाले कल को लेकर भरोसा दिलाता है भले ही वे अपने संस्थान के लिए अमरीका और दूसरे देशों की मदद पर निर्भर हैं.

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