पाकिस्तान में 'कफ़ सिरप' बना धीमा ज़हर

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Image caption लाहौर में पिछले दिसंबर को हुए हादसे में ज्य़ादातर लोगों ने टाईनो दवा ली थी

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम इलाके गुजरांवाला निवासी सिद्दीक के लिए 26 दिसंबर 2012 का दिन कुछ ख़ास था. उस दिन जब सिद्दीक बाज़ार में पटाख़े बेचकर घर लौटे तो काफ़ी खु़श थे क्योंकि उनकी कमाई काफी अच्छी हुई थी.

इस खु़शी को मनाने के लिए उन्होंने अपने दोस्त के साथ दवा दुकान से एक कफ़ सिरप खरीद कर पिया और घर आने के बाद खाना खाकर सो गया.

फिर कभी नहीं उठने के लिए. सिद्दीक के दोस्त की भी उसी रात मौत हो गई थी.

सिद्दीक के पिता अब्दुल हमीद सदमे में थे. उनके अनुसार, ''अगर उसे कोई तकलीफ़ थी तो वो हमें बताता लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. सुबह जब अस्पताल के लोग आए तब उन्होंने हमें बताया कि उसकी मौत हो चुकी है.''

उस दिन गुजरांवाला के अस्पताल में कफ़ सिरप पीने वाले 64 लोगों को काफी नाज़ुक हालत में अस्पताल लाया गया था, जिनमें से 36 लोगों की मौत हो गई थी.

ये सभी लोग काफी ग़रीब परिवार से थे और लंबे समय से शौकिया तौर पर कफ़ सिरप पीने के आदी थे.

इन्हीं लोगों में से एक वक़ास था जो एक रिक्शाचालक था.

वक़ास के मुताबिक, ''मैं पिछले पाँच सालों से हर रोज़ तक़रीन तीन शीशी कफ़ सिरप पी रहा हूँ. पहले जब मैं पिया करता था तब मैं खुद में स्फूर्ति महसूस किया करता था. लेकिन उस दिन इसे पीने के बाद मैंने काफ़ी कमज़ोरी महसूस की और बेहोश हो गया.''

ये पहला मौक़ा नहीं था जब कफ़ सिरप पीने के कारण ऐसा हादसा हुआ था. कुछ हफ्ते पहले ही लाहौर के शहादरा इलाके में, 'टाईनो' नाम की दवा पीने के बाद 19 लोगों की मौत हो गई थी.

बाहर से आता ज़हर

लाहौर की घटना के सामने आने के साथ ही फार्मास्यूटिकल कंपनियों ने तुरत-फुरत में प्रतिक्रिया देनी शुरु कर दी.

इन कंपनियों में काम करने वाले लोग सरकारी विभाग के अधिकारियों के हाथों परेशान किए जाने की शिकायत करते रहे.

इनके अनुसार 'टाईनो' बनाने वाली कंपनी के आंतरिक जांच में भी ये पाया गया है कि इस 'सिरप' में कुछ भी ग़लत नहीं है.

लेकिन गुजरांवाला हादसे में 33 लोगों की मौत के बाद, प्रांतीय सरकार ने कदम उठाना शुरु किया. कई दवा की फैक्ट्रियों और दवा की दुकानों को सील कर दिया गया.

इस दौरान कुछ दवा दुकानदारों को गिरफ्तार भी किया गया और दवा की बोतलें ज़ब्त की गईं.

अब पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इन मौतों की वजह इस कफ़ सिरप को बनाने के लिए भारत से आयात किया गया एक ज़हरीली सामग्री है.

पंजाब स्थित स्वास्थ्य मंत्रालय के महानिदेशक ड़ॉ निसार चीमा के अनुसार, सरकार ने जांच की है और ये बेहद संवेदनशील मामला है.

लेकिन पाकिस्तान के फार्मास्यूटिकल कंपनी संगठन के अध्यक्ष सलीम इक़बाल के अनुसार, सरकार जिस तरह से इस मामले को देख रही है उससे फार्मास्यूटिकल कंपनियां खुश नहीं हैं.

सलीम के अनुसार उन्होंने सरकार से कई बार इस जांच रिपोर्ट को उनके साथ साझा करने की बात कही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है.

वे आगे पूछते हैं कि आख़िर इस घटना के इतने हफ्तों के बाद भी सरकार अपनी जांच रिपोर्ट जमा क्यों नहीं कर पाई है.

अगर ये प्रक्रिया इतनी ही लंबी है तो सरकार इतनी जल्दी इस नतीजे पर कैसे पहुंच गई कि गुजरांवाला हादसे के पीछे की वजह खराब सामग्री है.

सस्ती ज़िंदगी

पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान में ऐसे लोगों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है जो किसी ना किसी तरह के नशे के आदी हो चुके हैं.

Image caption सिद्दीक पेशे से रिक्शाचालक थे और पिछले पाँच सालों से कफ़ सीरप पीने के आदी थे

ये लोग आमतौर पर कफ़ सिरप, पेन-किलर्स, एंटी-एलर्जीक और नशे की दवाईयाँ का सेवन करने लगते हैं.

लाहौर में ऐसे ही लोगों की मदद के लिए एनजीओ चलाने वाले सय्यद ज़ुल्फिकार हुसैन कहते हैं कि ऐसे नशेड़ियों की संख्या लाखों में होती है, क्योंकि इन दवाईयों पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं होती. कोई भी थोड़े पैसों में इन्हें खरीद सकता है, जबकि दूसरी दवाईयां महँगी होती हैं.

गुजरांवाला अस्पताल के मुख्यालय में मुख्य चिकित्साधिकारी के अनुसार, ''आमतौर पर डॉक्टर ऐसे कफ़ सिरप मरीज़ों को नहीं देते, ना ही मरीज़ खुद इनका इस्तेमाल करते हैं. मरीज़ों को ज्य़ादातर ब्रांडेड दवाई पीने की सलाह दी जाती है.''

वजह चाहे इन दवाइयों का आसानी से मिल जाना हो, उनकी खुलेआम बिक्री या उनकी सामग्री में किसी तरह की कमी होना हो, आरोप ये है कि संबंधित विभाग इस बारे में गंभीर नहीं हैं.

पंजाब प्रांत के स्वास्थय निदेशक ड़ॉ चीमा पूरा दायित्व हाल में गठित ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी पर डाल रहे हैं.

वे कहते हैं, ''उनकी पहली ज़िम्मेदारी दवा बनाने के लिए इस्तेमाल की जानेवाली कच्चे-माल की जांच और दवाईयों के उत्पादन पर नज़र रखना है. लेकिन हम इस बात पर भी ध्यान देंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हो. हम सभी स्थानीय गैरब्रांडेड कंपनियों के खिलाफ़ कार्रवाई करेंगे जो लोगों की ज़िंदगी से खेल रहे हैं.''

मनोवैज्ञानिक ड़ॉ रियाज़ भट्टी के मुताबिक, ''इस घटना ने एक बार फिर से ये साबित कर दिया है कि पाकिस्तान में कोई स्वास्थय प्रणाली नहीं है. जो लोग हालात से मजबूर हैं और बुरी तरह टूट चुके हैं वो इन्हीं दवाईयों का सहारा लेने लगते हैं.''

गुजरांवाला में सिद्दीक के पिता अब्दुल हामिद कहते हैं कि, उन्हें अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहिए. उनके छोटे से पोते को अब कभी पिता का प्यार नहीं मिलेगा.

आख़िर उसकी देख़भाल कौन करेगा?

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