लायला, 24 साल, मोरक्‍को

आज से पांच साल पहले लायला (काल्‍पनिक नाम) के एक रिश्‍तेदार ने शराब के नशे में उसके साथ बलात्‍कार किया.

उनकी आपबीती सुनिए उनकी ही ज़ुबानी:

"मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरा एक रिश्‍तेदार ही मेरे साथ इस तरह की ओछी हरकत करेगा. इस सच का सामना करना बहुत कठिन था मेरे लिए. मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ था. मुझे विश्‍वास नहीं होता था कि ऐसा मेरे साथ हुआ है.

मैंने खुद को कमरे में बंद कर लिया. घर से बाहर निकलना बंद कर दिया. लोगों से मिलना-जुलना और अपने रिश्‍तेदारों से बातें करनी बंद कर दी. जो हो चुका था, उसके बाद मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि अब क्‍या करूं.

मैंने बलात्‍कार पीड़ि‍तों की सहायता करने वाली संस्‍था से मदद मांगी. यह मेरे लिए सही साबित हुआ क्‍योंकि मुझे मेरा आत्‍म सम्‍मान वापस मिल गया और महसूस हुआ कि मैं बहिष्‍कृत नहीं हूं.

मुझे यह समझने में भी मदद मिली कि जो हुआ, उसमें मेरी कोई गलती नहीं थी. उस हादसे के बारे में किसी को बताना बेहद सुकून भरा था.

मेरी मां ने मेरी खूब मदद की. इस पूरे संघर्ष के दौरान मेरे साथ खड़ी रही. लोग मेरे बारे में बुरा सोचने लगे हैं और पड़ोसी मुझसे बचते हैं. उनका मानना है कि मैंने स्‍वयं खुद को मुसीबत में डाला, इसलिए जो कुछ मेरे साथ हुआ, उसकी जिम्‍मेदार भी मैं ही हूं. वे मुझे पीड़ि‍ता के रूप में देखते ही नहीं.

मेरी मां मेरे साथ थी. उन्‍होंने मुझे फिर से पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रोत्‍साहित किया. जीवन के प्रति मेरे नज़रिये में बदलाव लाकर एक नई शुरुआत के लिए उत्‍साहित किया.

मगर जो भी मेरे साथ हुआ, उसे भूल जाना बहुत मुश्किल है. मैं अक्सर बहुत कमजोर महसूस करने लगती हूं. मुझे किस तरह के नरकों से होकर गुजरना पड़ा, जब भी याद आता है, रो पड़ती हूं.

मेरा मानना है कि ऐसे जघन्‍य अपराध के लिए पांच साल की सजा बहुत छोटी है. एक बलात्‍कारी को मौत से कम की सजा नहीं होनी चाहिए.

उसने मुझे जो यातना दी और जिस तरह से मेरा जीवन बर्बाद किया, उन सबका असर आजीवन मेरे दिलो-दिमाग पर रहने वाला है.

कामना करती हूं कि किसी और लड़की को मेरे जैसे अनुभव से न गुजरना पड़े. कोई भी औरत इस तरह के दर्द और पीड़ा की हकदार नहीं होती. सरकार को ज़रूर जिम्‍मेदारी लेनी चाहिए और बलात्‍कार पीड़ि‍तों को सहायता प्रदान करनी चाहिए, विशेषकर इस तरह के अपराधों में जहां अपराध का पीड़ि‍त के ऊपर दूरगामी प्रभाव पड़ता है."