'अफगानिस्तान में कम हुई मरनेवालों की संख्या'

अफगानिस्तान
Image caption रिपोर्ट का कहना है कि नागरिकों को चरमपंथियों द्वारा अधिक धमकियों का सामना करना पड़ रहा है

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का कहना है कि अफगानिस्तान में नागरिकों की मौतों में छह सालों में पहली बार कमी आई है.

संयुक्त राष्ट्र के असिंस्टेंस मिशन इन अफगानिस्तान (उनामा) के अनुसार साल 2012 में 2,754 नागरिकों की मौत हुई जो कि पहले के मुकाबले 12 प्रतिशत कम है, जबकि 4,805 लोग घायल हुए जो कि पहले से कुछ अधिक है.

इसका कारण ज़मीनी लड़ाई और आत्मघाती हमलों एवं हवाई हमलों में कमी होना बताया जा रहा है.

लेकिन इस रिपोर्ट ने अफगानिस्तान के विशेष तौर पर उत्तरी भाग में सैन्य संगठनों के दोबारा से उभर कर आने पर चिंता भी जताई है.

रिपोर्ट के मुताबिक नागरिकों को चरमपंथियों द्वारा अधिक धमकियों का सामना करना पड़ रहा है जो उनके शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यायिक और घूमने-फिरने के अधिकारों में भी बाधा डाल रहे हैं.

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि जैन कुबिस ने कहा कि नागरिकों की मौत की संख्या में कमी एक अच्छी खबर है लेकिन 'इस संघर्ष की इनसानी कीमत अस्वीकार्य है.'

उन्होंने कहा कि सरकार विरोधी तत्वों के विस्फोटक पदार्थो का अंधाधुंध और गैर-कानूनी इस्तेमाल नागरिकों की मौत का सबसे बड़ा कारण है.

महिलाएं प्रभावित

उन्होंने कहा, ''सरकार के समर्थक माने जाने वाले नागरिकों को जान-बूझकर निशाना बनाने वाली घटनाओं में तेज़ी से बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी कानून का एक अन्य उल्लंघन दिखता है.''

कुल मिलाकर साल 2012 में 81 प्रतिशत मौतें चरमपंथियों के हमलों की वजह से हुई जबकि आठ प्रतिशत मौतें सरकारी सेना की कार्रवाई की वजह से हुईं.

रिपोर्ट ने यह भी पाया कि महिलाएं और लड़कियाँ सशस्त्र संघर्ष के कारण काफी प्रभावित हुई हैं. इन संघर्षों में 301 महिलाओं की मौत हुई जबकि 563 घायल हुईं हैं जो कि पहले के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है.

उनामा के मानवाधिकारों की निदेशक जॉर्जेट गैगनॉन ने कहा, ''यह बहुत ही दुखद सच्चाई है कि अधिकतर महिलाएं और लडकियाँ अपने रोज़मर्रा के काम करते हुए मारी जाती हैं या घायल होती हैं.''

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