जिसने किया हज़ारों बलात्कार पीड़ितों का इलाज

डॉक्टर डेनिस मुकवेगे पिछले कई साल से डीआर कॉंगो (डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कॉंगो) में काम करते हैं.

अपने साथियों के साथ मिलकर वो अबतक 30,000 से ज्यादा बलात्कार पीड़ितों का इलाज कर चुके हैं.

एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के तौर पर यौन हिंसा की शिकार हुई महिलाओं के हर संभव इलाज में उन्हें महारत हासिल हो चुकी है लेकिन इन महिलाओं पर जो बीती है उसे बयां करने में आज भी उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

पेश है उनकी अपनी ज़बानी, बीबीसी के आउटलुक कार्यक्रम में शामिल उनकी कहानी.

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''कॉंगो में जब हिंसा के दौर की शुरुआत हुई तब लेमेरा इलाके में मौजूद मेरे अस्पताल में घुसकर 35 मरीज़ों को बिस्तर पर ही मार दिया गया.

इसके बाद मैं भागकर बुकावू आ गया और कुछ तंबू गाड़कर एक अस्पताल की शुरुआत की. मैंने एक महिला वार्ड बनाया और हिंसा की शिकार महिलाओं का इलाज शुरु किया, लेकिन 1998 में इस अस्पताल को भी नष्ट कर दिया गया.

Image caption डॉक्टर मुकवेगे को संयुक्त राष्ट्र की ओर से कई सम्मान दिए जा चुके हैं.

इसके बाद जब दोबारा हमने अस्पताल शुरू किया तो हमारे पास एक बलात्कार पीड़ित महिला को लाया गया. बलात्कार के बाद उनके जनानांगों पर गोलियां दागी गई थीं.

मुझे लगा कि यह बर्बरता की चरम सीमा है. लेकिन सच कहूं तो इसके तीन महीने बाद एक के बाद मैंने जो देखा वो मैं कभी भूल नहीं सकता.

हमारे पास 45 साल की एक महिला आई जिसने बताया कि कई लोगों ने मिलकर उसके साथ उसी तरह का काम किया और कई दिनों तक बिना इलाज उसे कैद में रखा. एक अन्य महिला जलने के घावों के साथ हमारे पास आई. उसने बताया कि बलात्कार के बाद उसके जनानांगों पर तेज़ाब डाल दिया गया.

मैंने खुद से कई बार ये पूछा कि इस देश में आखिर ये क्या हो रहा है. ये घटनाएं केवल युद्ध अपराध नहीं बल्कि एक षड्यंत्र का हिस्सा हैं. कई मामले ऐसे थे जिसमें कुछ महिलाओं को चुनकर उन्हें कई बार निशाना बनाया गया.

कई मामलों में पूरे के पूरे गांव की महिलाओं को रातों रात बलात्कार का निशाना बनाया गया. सरेआम हुई इन घटनाओं का मकसद था गांव के बच्चों, बड़े-बूढ़ों को इस हिंसा को देखने के लिए मजबूर करना.

ये महिलाएं जब हमारे पास इलाज के लिए आती हैं तो चिकित्सीय मदद के अलावा हम उन्हें खाना-पीना और सामाजिक मदद भी देते हैं. हालात इतने बुरे हैं कि हमारे पास जो महिलाएं आती हैं कई बार उनके तन पर कपड़े तक नहीं होते.

साल 2011 में इन मामलों में कुछ कमी आई. हमें लगा कि हालात शायद सुधरेंगे, लेकिन पिछले साल युद्ध से हालात दोबारा पैदा होने पर बलात्कार की घटनाएं फिर आम हो गई हैं.

कम नहीं हुई मुश्किलें

सच ये है कि हिंसा के इस दौर की सबसे बड़ी शिकार महिलाएं हुई हैं और उनकी मदद करने वालों के लिए भी मुश्किलें कम नहीं हैं.

Image caption कॉंगो लौटने पर महिलाओं के साथ जश्न में शामिल होते डॉक्टर मुकवेगे.

एक बार जब मैं अपने देश से बाहर कहीं जा रहा था तो एके-47 लिए पांच लोग मेरे पास आए. उन्होंने मेरे सुरक्षाकर्मी पर एक के बाद एक कई गोलियां चलाईं और मुझे निशाना बनाया.

इस हमले के बाद मैं स्वीडन चला गया और कुछ दिन ब्रसेल्स में भी रहा. लेकिन पिछले महीने मैं एक बार फिर कॉंगो लौट आया हूं.

दूसरे देशों में रहने के दौरान कॉंगो की कई महिलाओं ने मुझसे संपर्क किया और मुझसे लौटने की अपील की. उन्होंने कहा कि वो खुद मेरी सुरक्षा करेंगी.

मुझे लगता है कि जब कॉंगो की महिलाएं इस बर्बरता के खिलाफ़ लड़ सकती हैं, तो मुझे हर हाल में उनकी मदद के लिए हर हाल में अपने देश में रहना होगा.

इन महिलाओं की हिम्मत ही मुझे डटे रहने की प्रेरणा देती है. मैंने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है और कई लोग मेरे साथ जुड़ गए हैं. हम सबका मकसद एक है, हर उस महिला की मदद जिसके खिलाफ़ बलात्कार को हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया है.''

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