जो 9/11 से बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देनेवाले थे

Image caption इरफान नसीर, इरफान खालिद और आशिक अली नाम के इन तीनों लोगों को 2011 में गिरफ्तार किया गया था.

बर्मिंघम की एक अदालत ने उन तीन लोगों को चरमपंथी गतिविधियों में लिप्त होने का दोषी पाया है जो सात जुलाई और 11 सितंबर से भी बड़ी घटना को अंजाम देने वाले थे.

जूरी के सदस्यों को बताया गया था कि इन लोगों ने एक पिट्ठू बैग में आठ बम रखे हुए थे जिनमें टाइमर लगे हुए थे.

पुलिस ने इन लोगों को समर्पित और जोशीला चरमपंथी करार दिया था.

इरफान नसीर, इरफान खालिद और आशिक अली नाम के इन तीनों लोगों को साल 2011 में गिरफ्तार किया गया था.

खुफिया सूत्रों का मानना है कि साल 2006 के बाद से ये सबसे बड़ी आतंकी साजिश थी जिसमें हवाई जहाज में सॉफ्ट ड्रिंक में बम मिलाकर ले जाने की योजना थी.

खालिद ने तो बड़े गर्व के साथ कहा था कि ये हमला दूसरा 11 सितंबर होता और इसके जरिए सभी बदले ले लेते.

दिसंबर 2010 से लेकर सितंबर 2011 के बीच इन तीनों को 12 चरमपंथी हमलों की साजिश का दोषी पाया गया. सितंबर 2011 में इन्हें गिरफ्तार किया गया था.

अल-कायदा से प्रशिक्षण

जजों को बताया गया कि नसीर और खालिद को पाकिस्तान में अल-कायदा से प्रशिक्षण मिला था और ब्रिटेन लौटते वक्त ये लोग कई वीडियो अपने साथ लाए थे.

इन लोगों ने कई और लोगों को अपने संगठन में नियुक्त किया और ये दिखावा किया कि ये सभी लोग धर्मार्थ कार्य कर रहे हैं. बर्मिंघम में इन लोगों ने हजारों पौंड का चंदा भी इकट्ठा किया था.

नसीर ने चार अन्य लोगों को प्रशिक्षण के लिए बर्मिंघम से पाकिस्तान भेजने में अहम भूमिका निभाई. उन सबको पहले ही चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया गया है.

जज का कहना था कि इन सबको अप्रैल अथवा मई में सजा सुनाई जाएगी और सभी को आजीवन कारावास हो सकता है.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक ये फैसला चरमपंथ से लड़ने वाले अधिकारियों के लिए एक बड़ी सफलता है.

इन सबको रिकॉर्डेड बातचीत के आधार पर गिरफ्तार किया गया था जिनमें नसीर को बम बनाने में महारत हासिल होने की बात की गई थी.

जजों को बताया गया कि ये लोग अमरीका में जन्मे इस्लामी धर्मगुरु अनवर अल-अवलाकी से प्रभावित थे जिनकी सितंबर 2011 को यमन में हत्या कर दी गई थी.

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