कभी फ़ौजी कभी रिपोर्टर अब अमरीकी रक्षा मंत्री

  • 28 फरवरी 2013
Image caption चक हेगल अपनी कई टिप्पणियों के लिए विवादों में रहे हैं

अमरीका के नवनियुक्त रक्षा मंत्री चक हेगल साफ़गोई पसंद इंसान हैं जो आम ज़िंदगी जीने में यकीन नहीं करते. मूल रूप से वह रिपब्लिकन हैं जिन्होंने इराक युद्ध के मुद्दे पर कई बार अपनी ही पार्टी का विरोध किया है.

राष्ट्रपति बुश की टीम को आड़े हाथों लेने की उनकी प्रवृत्ति की वजह से ही उन्हें ओबामा प्रशासन में डिफ़ेंस पॉलिसी बोर्ड के प्रमुख की जगह मिली.

राष्ट्रपति बुश की रक्षा नीतियों के विरोध के कारण ही उन्हें विद्रोही रिपब्लिकन कहा जाने लगा, हांलाकि सीनेट की अपनी सदस्यता के दौरान उन्होंने घरेलू मुद्दों पर हमेशा अपनी पार्टी का साथ दिया.

सिनेट में हेगल के करियर की शुरुआत गवर्नर बेन नेल्सन को हराने के साथ शुरू हुई. यह एक ऐसी जीत थी जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी.

सिनेट के सदस्य

बाद में 2002 में वह डेमोक्रेटिक पार्टी के चार्ली मटुलका को हरा कर एक बार सीनेट के सदस्य बन गए.

साल 2004 में ही इस बात की चर्चा चल निकली थी कि हेगल राष्ट्पति पद के प्रबल दावेदार हो सकते हैं. उन्होंने इस दिशा में कोशिश भी की लेकिन सितंबर 2007 में उन्होंने ऐलान कर दिया कि वह इस पद को पाने के इच्छुक नहीं हैं.

उन्होंने यह भी घोषणा की कि वह 2009 में अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद सीनेट का चुनाव नहीं लड़ेंगे. शायद इसके पीछे वजह यह थी कि रिपब्लिकन पार्टी से कई मुद्दों पर उनका विरोध शुरू हो चुका था.

66 वर्षीय हेगल वियतनाम युद्ध में अमरीका की तरफ से लड़ चुके हैं जहाँ उन्हें दो पर्पल हार्ट पदक मिले थे. शायद युद्ध की विभीशिका के उनके अनुभवों ने उनके मन में पैठ बैठा दी कि युद्ध को सभी विकल्पों के चुक जाने के बाद आखिरी विकल्प के तौर पर ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

हेगल का जन्म नेबरास्का के एक गरीब परिवार में हुआ था और उन्होंने परिवार का खर्च चलाने के लिए नौ वर्ष की उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था.

वियतनाम की लड़ाई से लौटने के बाद उन्होंने कई नौकरियाँ की. वह रेडियो रिपोर्टर भी बने और उन्होंने कांग्रेस में नेबरास्का के प्रतिनिधि की टीम में भी काम किया.

फ़िलिबस्टर

ऱाष्ट्रपति ओबामा ने इस महीने के शुरू में जब उन्हें अपना रक्षा मंत्री नामांकित किया तभी से उनकी नियुक्ति विवादों के घेरे में आ गई. सिनेट ने ‘फ़िलिबस्टर ’ प्रक्रिया के बाद ही उनकी नियुक्ति को मंज़ूरी दी. उनको 41 के मुकाबले 58 वोट मिले.

पेटागन के किसी प्रतिनिधि को इससे पहले इतने कड़े विरोध का सामना नहीं करना पड़ा. उनके विरोधियों को इस बात पर चिंता थी कि हेगल अमरीका या इसराइल के मेतृत्व में ईरान पर होने वाले किसी भी हमले के प्रखर विरोधी रहे हैं.

2011 में एक भाषण के दौरान उन्होंने कहा था कि अफ़गानिस्तान में पाकिस्तान के लिए समस्याएं पैदा करने के लिए भारत ने धन दिया है.

अफ़गानिस्तान के मुद्दे पर होने पर होने वाली शांति वार्ता में ईरान को शामिल करने की उनकी वकालत भी कई लोगों को नागवार गुजरी है. कई हल्कों में उनकी अमरीका के पहले समलैंगिक राजदूत जेम्स हॉरमेल के खिलाफ 1998 में की गई टिप्पणी की भी आलोचना की गई है.

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