ह्यूगो चावेज़: तानाशाह या 'लोगों का मसीहा'?

  • 6 मार्च 2013
ह्यूगो चावेज़
Image caption ह्यूगो चावेज़ की छवि एक मुंहफट वक्ता की थी

पिछले साल अक्तूबर में छह और वर्ष के लिए राष्ट्रपति का पद अपने नाम करने वाले ह्यूगो चावेज़ लातिन अमरीका के सबसे मुंहफट और विवादास्पद नेताओं में से एक थे.

सेना में पैराट्रूपर रहे चावेज़ साल 1992 में सैन्य तख्तापलट की विफल कोशिश के बाद नेता के तौर पर पहली बार सुर्खियों में आए थे.

फिर छह वर्ष बाद ही वेनेज़ुएला की राजनीति में मची उथल-पुथल के बाद वे जनाक्रोश की लहर पर सवार होकर राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंच गए.

इसके बाद चावेज़ एक के बाद एक कई चुनाव और जनादेश अपने नाम करने में कामयाब होते गए. इनमें वो संवैधानिक जनादेश भी शामिल है जिसमें संविधान में बदलाव करके कहा गया था कि कोई व्यक्ति कितनी भी बार राष्ट्रपति बन सकता है.

राष्ट्रपति चावेज़ ये तर्क देते रहे कि वेनेज़ुएला में समाजवादी क्रांति जड़े गहरी करने के लिए उन्हें और समय की आवश्यकता है. चावेज़ के समर्थकों का कहना है कि वे गरीबों के हित की बात करते हैं, वहीं उनके आलोचक कहते हैं कि उनकी तानाशाही बढ़ती गई.

साल 2011 में सर्जरी और कीमोथैरेपी के बाद मई 2012 में चावेज़ ने कहा कि वे कैंसर से उबर आए हैं.

लेकिन 8 दिसम्बर 2008 को राष्ट्रपति चावेज़ ने घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें और सर्जरी कराने की ज़रूरत है.

उन्होंने अपने संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर उप-राष्ट्रपति निकोलस मेडुरो का नाम आगे बढ़ाया.

सरकार गिराने की कोशिश

Image caption चावेज़ सत्ता पाने के चक्कर में जेल भी गए

फरवरी 1992 में चावेज़ ने खर्चों में कटौती के उपायों से लोगों में बढ़ते आक्रोशि के बीच राष्ट्रपति कार्लोस एंड्रेज़ पेरेज़ की सरकार गिराने की कोशिश की.

इस विफल सैन्य तख्तापलट की आधारशिला एक दशक पहले ही रखी गई थी जब चावेज़ और उनके कुछ सैन्य सहयोगियों के दल ने दक्षिण अमरीकी स्वतंत्रता के नायक सिमोन बोलिवर के नाम पर एक गुप्त आंदोलन शुरु किया था.

साल 1992 में रेवॉल्यूशनरी बोलिवियन मूवमेंट के सदस्यों के विद्रोह में 18 लोग मारे गए थे और 60 अन्य घायल हुए थे.

इसके बाद चावेज़ को पकड़कर जेल में डाल दिया गया था. उनके सहयोगियों ने नौ महीने बाद भी सत्ता पर कब्जे की नाकाम कोशिश की थी. नवम्बर 1992 में तख्तापलट के दूसरे प्रयास को भी कुचल दिया गया था.

माफी मिलने से पहले चावेज़ ने जेल में दो वर्ष बिताए और इसके बाद उन्होंने मूवमेंट फॉर फिफ्थ रिपब्लिकन नाम से अपने पार्टी दोबारा संगठित की. अब वो सैनिक से नेता बन गए थे.

वर्ष 1998 के चुनावों के बाद चावेज़ सत्ता पर काबिज हुए. अपने ज्यादातर पड़ोसी मुल्कों की तुलना में वेनेज़ुएला में साल 1958 से ही लोकतांत्रिक सरकारें रही हैं.

लेकिन सत्ता पर बारी-बारी से काबिज होते रहे देश के दो प्रमुख राजनीतिक दलों पर भ्रष्टाचार और देश की अतुल तेल सम्पदा के दोहन के आरोप लगते रहे.

क्रांतिकारी सामाजिक नीतियों का वादा

Image caption ह्यूगो चावेज़ ने चर्च के नेताओं को भी आड़े हाथों लिया था

ह्यूगो चावेज़ ने देश की सामाजिक नीतियों में क्रांतिकारी सुधार का वादा किया और अंतरराष्ट्रीय पूंजीवाद पर लगातार हमला बोलते रहे.

वे राष्ट्र को संबोधित करने के किसी भी मौके से कभी चूकते नहीं थे. तेल-उद्योग से जुड़े लोगों के बारे में एक बार चावेज़ ने कहा था कि ये वो लोग हैं जो विलासिता का जीवन जीते हैं और व्हिस्की पीते हैं.

चर्च के नेताओं के साथ भी चावेज़ का लगातार टकराव होता रहा. चावेज़ ने उन पर गरीबों की अनेदखी करने और अमीरों का पक्ष लेने का आरोप लगाया.

11 सितम्बर 2001 के बाद बुश प्रशासन ने अफगानिस्तान युद्ध के दौरान कड़ा रवैया अपनाया तो चावेज़ ने अमरीका पर आरोप लगाया कि वो आंतक से निपटने के लिए आंतक का ही इस्तेमाल कर रहा है. इससे दोनों देशों के संबंध और भी खराब हो गए.

साल 2002 में एक विद्रोह के जरिए चावेज़ को कुछ दिनों के लिए सत्ता से बेदखल कर दिया गया था. चावेज़ ने इसके पीछे अमरीका का हाथ होने का आरोप लगाया था.

तमाम घटनाक्रमों से उबरते हुए चावेज़ ने दो वर्ष बाद जनादेश हासिल किया और वे एक सशक्त नेता के रूप में उभरे. इसके बाद साल 2006 का राष्ट्रपति चुनाव भी उन्होंने जीत लिया.

चावेज़ की सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं समेत कई क्षेत्रों में तरह-तरह के कार्यक्रमों की शुरुआत की, लेकिन वेनेज़ुएला में अभी भी गरीबी और बेरोजगारी बरकरार है जबकि देश के पास तेल सम्पदा का भंडार है.

चावेज़ की छवि एक मुंहफट वक्ता की थी जो इसके लिए हर हफ्ते एक टीवी कार्यक्रम का सहारा लेते थे जिसका नाम हैलो प्रेसीडेंट था. इस कार्यक्रम के जरिए वे अपने राजनीतिक विचार जाहिर करते थे, अतिथियों का साक्षात्कार करते थे और नाचते-गाते भी थे.

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