दफ्तर में क्या होता है अनचाहा स्पर्श?

Image caption ग्रोपिंग की परिभाषा पर बहस जारी है

क्या आपने दफ्तर में किसी सहकर्मी के कंधे पर हाथ रखते हुए या किसी दूसरे तरह से छूने पर सोचा है कि आपका ये स्पर्श उसके लिए अपमानजनक भी हो सकता है?

कब किसी की नज़र में एक 'निर्दोष, भोला सा' स्पर्श 'ग्रोपिंग' या एक अनचाहा और गलत स्पर्श बन जाए इसकी सीमारेखा बहुत छोटी है.

दफ्तर में यौन शोषण एक ऐसा मुद्दा है जिसपर विश्वभर में बहस हो रही है.

भारत में पिछले मंगलवार को राज्यसभा में एक बिल पास हुआ जो कार्यस्थल पर महिला के यौन उत्पीड़न को रोकने के साथ-साथ उसके सम्मान और गरिमा को बनाए रखने की बात भी करता है.

ये बिल पहले ही लोकसभा में पारित हो चुका है और अब इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति का इंतज़ार है.

बहस का एक बड़ा मुद्दा है ग्रोपिंग यानी अनचाहा स्पर्श जिसे अक्सर यौन उत्पीड़न से कम खतरनाक माना जाता है.

अनचाहा स्पर्श

ग्रोपिंग की परिभाषा क्या है, किसे 'ज़बर्दस्ती' या 'गलत तरीके' से छूना कहा जाए इसपर लोगों की अलग अलग राय है.

ग्रोपिंग की एक विस्तृत श्रेणी हो सकती है. कंधे पर हाथ रखना, सर पर हल्की चपत लगाना, बांह में चूंटी काटना, कमर पर हाथ रखना या चपत लगाना, ये सब गलत तरीके से छूना हो सकता है.

यौन शोषण के पीड़ितों को मदद देने, कंपनी में इन आरोपों की जांच और ग्रोपिंग की परिभाषा पर लंबे समय से बहस चल रही है.

वैसे तो कई कंपनियां दफ्तर में यौन शोषण के मामलों पर 'ज़ीरो टॉलरेंस' यानी 'कोई छूट नहीं' की पॉलिसी रखते हैं लेकिन ये समस्या कितनी बड़ी है इसे बता पाना एक मुश्किल काम है.

विश्वास लायक आंकड़ों की कमी है क्योंकि इस तरह के मामले बहुत कम बाहर आ पाते है.

बड़ी समस्या

ब्रिटेन में भी एक सांसद पर कुछ महिला राजनेताओं के साथ अभद्र यौन व्यवहार करने के आरोप लगने से ये मुद्दा सुर्खियों में है.

ब्रिटेन में ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महिला अधिकार मामलों की अफसर स्कारलेट हैरिस कहती हैं, "ये एक बहुत बड़ी समस्या है. ज्यादातर महिलाएं इससे खुद निपटने के बारे में सोचती हैं और शिकायत दर्ज ही नहीं करती. ये सचमुच दुखद बात है अगर महिलाओं को लगे कि इस समस्या को नज़रअंदाज़ कर देना ही सही कदम है."

विशेषज्ञ मानते हैं कि इन मामलों में तथ्यों की जांच होनी चाहिए, दोनों पक्षों को बराबर मौका देना चाहिए और पूरी संवेदना के साथ इसे निपटाना चाहिए क्योंकि इससे किसी की छवि खराब हो सकती है.

कार्यक्षेत्र में शोषण के मामले सिर्फ महिलाओं के खिलाफ ही नहीं हो सकते, इसका शिकार पुरुष भी हो सकते हैं.

कई शिकायतों में ये कहा गया है कि अनचाहा स्पर्श हिंसक या खतरनाक नहीं होता लेकिन तंग करने वाला ज़रूर होता है.

लेकिन ये भी मानते हैं कि दफ्तर में किसी भी तरह के स्पर्श को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना एक नकारात्मक कदम होगा.

लेकिन हैरिस अलग राय रखती हैं. वो कहती हैं, "काम करने वाले लोगों को अपना एक पक्का नियम बना लेना चाहिए साथी कर्मचारी को किसी भी तरह से नहीं छूना है."

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