क्या कॉमेडियन बन सकते हैं गंभीर राजनेता

पिछले हफ्ते चुनावी दंगल में दो कॉमेडियन अपना हाथ आजमाने उतरे. इटली के चुनाव में अपना दमखम दिखाने लिए बेपे ग्रिलो सामने आए तो वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन के इस्टले उपचुनाव में जॉन ओ फेरेल थे.

अपने मसख़रेपन और हास्य व्यंग्य से लोगों को लुभाने वालों के लिए चुनाव में दांव लगाना कितना नुक़सानदेह साबित हो सकता है?

अगर इस सवाल का जवाब इटली के चुनावों से तलाशा जाए तो नुक़सान कम और फ़ायदा ज़्यादा दिखता है. वहां जाने माने कॉमेडियन बेपे ग्रिलो किंगमेकर की भूमिका में उभर कर सामने आए हैं क्योंकि दो बड़ी रानजीतिक पार्टियों में से किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है.

ग्रिलो के बारे में लिखे गए स्तंभों में एक वाक्य तो ज़रूर शामिल होगा, “क्या आपने राजनेता बने हास्य कलाकार के बारे में सुना है?”

मज़ाकिया लहजे में बात करने वाले मौजूदा राजनेताओं के एक समूह को राजनीति में पारी शुरू कर रहे पेशेवर कॉमेडियनों से ख़तरा हो सकता है.

हास्य और राजनीति

काफ़ी हद तक हास्य और राजनीति का साथ प्रेम विवाह और प्रेमहीन विवाह के माफ़िक़ ही लगता है.

अगर आप एक राजनेता होने के साथ चतुर और हाज़िरजवाब हैं और मज़ाक़िया अंदाज़ में बात भी करते हैं तो यक़ीनन आपको प्रेस में ज़्यादा अहमियत मिल सकती है.

Image caption लालू के चुटीले भाषणों की खूब चर्चा होती है

भारत में भी जब लालू प्रसाद यादव जैसे नेता संसद मे बोलने के लिए उठते हैं तो लगातार सुर्खि़यों में रहते हैं. इसी कड़ी में जब पिछले दिनों हास्य कलाकार राजू श्रीवास्ताव ने राजनीति में आने का ऐलान किया तो उनके बारे में सब जगह ख़बरें थीं.

दुनिया के लगभग सभी देशों में आपको संसद की कार्यवाही के दौरान हंसी ठिठोली की कई मिसाल मिल सकती हैं जो किसी घोटाले पर टिप्पणी, व्यक्तिगत बयान या अस्पष्ट तरीक़े से की गई कोई टिप्पणी हो सकती है.

परोक्ष रूप से की गई टिप्पणी अगर हल्के-फुल्के अंदाज़ में की जाए तो यह हास्य के पुट से लबरेज़ हो सकती है.

राजनीति में संभावना

किसी कॉमेडियन के लिए राजनीति में करियर बनाना मिली जुली संभावनाओं से भरा हो सकता है. सबसे अहम बात, नियमित तौर पर मिलने वाले वेतन की है. भले ही आप ठहाके लगाएं या न लगाएं आपको वेतन मिलता ही रहेगा.

संसद के दर्शक और श्रोता भी संयमी होते हैं और वहां भी आपकी मजाकिया टिप्पणियों को सराहा जा सकता है.

हालांकि इसमें कुछ खामियां भी हैं. राजनीतिक प्रचार-प्रसार एक अजीब तरह के कारोबार के माफिक है. राजनेता बनने वाले किसी हास्य कलाकार को यह महसूस हो सकता है कि उनके कहे गए कई शब्द उन्हीं पर भारी पड़ने लगे हैं.

यू-ट्यूब पर बहुत से कॉमेडी वीडियो किए जाते हैं. ऐसे में किसी ग़लत वक्त पर कोई फुटेज आपके लिए परेशानी का सबब बन सकती है.

जबान संभाल के

Image caption ग्नान इस वक्त भी रेक्याविक के मेयर हैं

ऐसा नहीं है कि ये समस्या केवल हास्य कलाकारों तक ही सीमित है. दुनिया भर के राजनेताओं में से कई ऐसे जरूर मिल जाएंगे जिनके बोलने पर कुछ आपत्तिजनक बातें निकल जाती है. इनकी मिसाल आपको यू ट्यूब, फेसबुक या ट्वीटर पर देखने को मिल सकती है.

यह आप पर भी निर्भर करता है कि आप कैसे कॉमेडियन है. ग्रिलो दशकों तक इटली की राजनीति के बिकाऊपन वाले रवैये के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे हैं और उन्होंने इसके लिए कुछ करने की कोशिश भी की.

वहीं आइसलैंड की राजधानी रेक्याविक के मेयर बने निम्न दर्जे के संगीतकार और हास्य कलाकार यो ग्नार का मामला भी कुछ इसी तरह का है.

उन्होंने चुनावी अभियान में सभी वादे को तोड़ने का वादा किया और यह घोषणा की कि जिसने अमरीकी टीवी सीरीज 'द वायर' नहीं देखी है, उनके साथ वह सरकार नहीं बनाएंगे. 2010 में चुने गए ग्नार अब भी यह पद संभाल रहे हैं और अपना काम कर रहे हैं.

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