दवाओं के 'कॉकटेल' से एचआईवी प्रभावित का इलाज

Image caption एचआईवी वायरस से संक्रमित व्यक्ति को जानलेवा बीमारी एड्स होने का खतरा रहता है.

अमरीका के मिसीसिपी राज्य में एचआईवी वायरस के साथ पैदा हुई एक बच्ची का इलाज कर संभवत: उसे ठीक कर लिया गया है.

शोधकर्ताओं का दावा है कि बच्ची को एक साल से कोई दवा नहीं दी गई है, फिर भी उसे किसी तरह का संक्रमण नहीं हुआ.

बच्ची को एचआईवी के उपचार की दवाएं तभी देनी शुरू कर दी गईं थी जब वो महज़ तीस घंटों की थी. अब वो ढाई साल की हो गई है और तंदुरुस्त है.

शोधकर्ताओं के मुताबिक अगर उसकी सेहत आने वाले वर्षों में भी अच्छी रही, तो ये दुनिया का दूसरा ऐसा मामला होगा जिसमें एचआईवी के रोगी को उपचार किया जा सका हो.

जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय में विरॉलोजिस्ट डॉक्टर डेबोराह परसाद के मुताबिक, “ये इस अवधारणा का सबूत है कि नवजात बच्चों में एचआईवी संक्रमण का इलाज किया जा सकता है.”

हालांकि उनका कहना है कि इस इलाज का अन्य वायरस से संक्रमित बच्चों पर कितना लाभकारी असर होगा इसके लिए और परीक्षण करना ज़रूरी है.

दवाओं का कॉकटेल

बच्ची एक गांव के अस्पताल में पैदा हुई जहां उसकी मां एचआईवी पॉजिटिव यानी उससे संक्रमित पाई गई थीं.

बच्ची के पैदा होने से पहले मां का उपचार शुरू नहीं किया गया था, जिससे डॉक्टरों ने अंदाज़ा लगा लिया था कि बच्ची के भी संक्रमित होने की बड़ी संभावना है.

फौरन बच्ची को मिसीसिपी विश्वविद्यालय के मेडिकल सेंटर में भर्ती किया गया जहां बच्चों में एचआईवी के उपचार की विशेषज्ञ डॉक्टर हाना ग्रे ने एचआईवी संक्रमण की पुष्टि होने से पहले ही बच्ची का इलाज शुरू कर दिया.

डॉक्टर ग्रे ने कहा, "मुझे लगा कि इस बच्ची को आम तौर से ज़्यादा ख़तरा है और हमें इसे बचाने के लिए हमें एड़ी चोटी का ज़ोर लगा देना चाहिए."

उसे बच्चों में एचआईवी को ठीक करने वाली मौजूदा दवाओं का एक अनोखा ‘कॉकटेल’ यानि मिश्रण दिया गया.

शोधकर्ताओं के मुताबिक इस मिश्रण से एचआईवी के वायरस को शरीर में घर करने से पहले ही हटा दिया गया.

पहली बार उपचार

डॉक्टर परसाद के मुताबिक एचआईवी के ज़्यादातर मामलों में दवा बंद करते ही वायरस के सेल दोबारा शरीर में संक्रमण पैदा करने लगते हैं. इसीलिए किसी मरीज़ का पूरी तरह ठीक होना अजूबा सा है.

वर्ष 2007 में टिमथी रे ब्राउन एचआईवी संक्रमण का उपचार करवाने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बन गए थे.

एचआईवी से संक्रमित ब्राउन को ल्यूकीमिया हो गया था, जिससे बचाने के लिए उनका स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया.

इसके लिए एक ऐसे डोनर को ढूंढा गया जिनके जीन एचआईवी प्रतिरोधी थे.

इनकी मदद से ब्राउन के शरीर के पूरे प्रतिरोधी तंत्र को बदला गया जिसके बाद ही वो ठीक हो पाए.

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