क्यों संभाल कर रखे जाते हैं इनके शव?

Image caption ह्यूगो चावेज़ का शव वेनेज़ुएला में 'अमर रखा जाएगा'

वेनेज़ुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ के निधन के बाद उनके शव को लेप लगा कर सेना के एक संग्राहलय में रख दिया गया.

पर, आम लोगों के ज़हन में ये सवाल ज़रूर उठता होगा कि शवों को हमेशा के लिए कैसे सुरक्षित रखा जाता है और आखिर ऐसा करने की ज़रुरत क्यों पड़ती है ?

ह्यूगो चावेज़ के शव को हो ची मिन, लेनिन औऱ माओत्से तुंग जैसे दिग्गज राजनेताओं की तरह लेप लगा कर संरक्षित किया गया है.

लंदन स्कूल ऑफ इकॉनामिक्स के प्रॉफेसर मारगोट लाइट का कहना है कि ऐसा किसी वजह से ही किया जाता है, ताकि इन राजनेताओं के संघर्ष को लोगों के ज़हन में यादगार बनाया जा सके.

उनका कहना है, “ये इतनी अटपटी हरकत नहीं है जितनी दिखाई देती है, बल्कि इसके पीछे वो देशभक्ति की भावना और वो संघर्ष होता है जिसे आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है.”

मारगोट लाइट कई बार रूसी साम्यवादी नेता लेनिन के मकबरे पर जा चुके हैं. उनका कहना है कि वहां का माहौल बिलकुल अलग सा होता है.

उनका कहना है कि 1924 में लेनिन की मौत के बाद उनकी विचारधारा को बनाए रखने और उनके अंतरराष्ट्रीय महत्व को बढ़ावा देने के लिए उनके शव को ज्यों का त्यों रखा गया.

हालांकि 1990 के दशक से रूस में इस बात पर बहस चलती रही कि लेनिन के शव को दफना दिया जाए या उसे संरक्षित रूप में ही रखा जाए.

'जिंदा' शव

कुछ रुसी नागरिकों का मानना है कि लेनिन के शव को इस रूप में देखना उन्हें घिनौना लगता है.

उधर वेनेज़ुएला के लोगों का मानना है कि ह्यूगो चावेज़ के को अमर रखा जाए.

लेकिन सवाल है कि एक शव को कितने लंबे समय तक संरक्षित रखना संभव है?

युनिवर्सिटी ऑफ दंडी में जैव विज्ञान के एक प्रॉफेसर सू ब्लैक का कहना है कि अगर शव की देख-रेख अच्छे से की जाए, तो ऐसा बहुत लंबे समय तक संभव है.

प्रॉफेसर सू कहती हैं, “शव की हालत दस साल बाद कुछ हद तक खराब तो होती ही है और वो देखने में उतनी अच्छी नहीं लगता. शरीर पर लेप लगाए जाने की प्रक्रिया की तुलना अचार डालने की प्रक्रिया से की जा सकती है.”

उन्होंने कहा कि जिस तरह से खाद्य पदार्थों को संरक्षित किया जाता है, उसी तरह शरीर को संरक्षित करने के लिए उसके लिए एक जीवाणुहीन वातावरण बनाना पड़ता है.

शरीर में रक्त बैक्टीरिया को निमंत्रण देता है और इससे बचने के लिए शरीर की अहम नसों से खून निकाल लिया जाता है ताकि शव में फफूंदी न लगे.

इसके बाद कुछ रसायनों की मदद से शव को ‘ज़िंदा’ रखा जाता है.

आसान नहीं ये काम

Image caption रुस के रेड स्क्वॉयर पर लेनिन के शव को देखने के लिए परस्पर भीड़ लगी रहती है

शव को संरक्षित रखने के लिए काफी पैसा भी खर्चना पड़ता है.

शव का तापमान औऱ और उसके आसपास की नमी को बहुत ध्यान से नियंत्रित रखना पड़ता है.

शवों को संरक्षित रखने के मामले में रूसी वैज्ञानिक सबसे आगे हैं. उन्होंने सरकार की मदद से एक रिसर्च संस्था बनाई है,जो इसी विषय पर काम करती है कि शवों को कैसे लंबे से लंबे समय के लिए संरक्षित रखा जाए.

यहां तक कि अपने राजनेताओं के शव को संरक्षित करने के लिए विश्व के दूसरे देश भी,विशेषज्ञ राय लेने के लिए रूस का ही रुख करते हैं.

रूसी वैज्ञानिक लेनिन के शव को संरक्षित रखने के लिए अलग तरह के नुस्खे इस्तेमाल करते हैं.

वे शव को नियमित रूप से नहलाते हैं और इलैक्ट्रिक पंप की मदद से शरीर के भीतर की नमी को बाहर निकालते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि शव की देख रेख करना एक कला है जो अब धुंधली पड़ती जा रही है.

ऐसे में ये कहना मुश्किल है कि आने वाले समय में परिरक्षण की परंपरा कितनी आगे जा पाएगी?

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