क्या भारत के लिए बेमतलब हो गया है ब्रिटेन?

Image caption 2005 से अब तक विभिन्न ब्रितानी प्रधानमंत्री भारत की यात्रा कर चुके हैं.

भारत और ब्रिटेन के बीच सदियों से रिश्ते रहे हैं लेकिन हाल के वर्षों में इन रिश्तों में गर्माहट कम हुई है.

रिश्तों में गर्मजोशी भरने के लिए हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भारत की यात्रा की.

इस यात्रा के बावजूद ये सवाल बरकरार रहा कि क्या ब्रिटेन और भारत एक दूसरे के लिए कोई माइने नहीं रखते है.

बीबीसी के कार्यक्रम हार्डटॉक में हिस्सा लेने आए यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के चेयरमैन करन बिलिमोरिया कहते हैं, “मैं इतना ही कह सकता हूं कि जब मैं इंडिया यूके बिजनेस काउंसिल का प्रमुख बना तब भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार पांच बिलियन पाउंड था. लेकिन पिछले दस साल में ये तीन गुना हो गया है.”

व्यापार बढ़ा लेकिन...

करन बिलिमोरिया स्वीकार करते हैं कि भारत और ब्रिटेन में आपसी व्यापार उतना नहीं है जितना होना चाहिए.

गौरतलब है कि करन बिलिमोरिया भारत में पैदा हुए ब्रितानी उद्यमी हैं. वो अपनी पढाई करने के लिए ब्रिटेन आए और यहीं के होकर रह गए. उन्होंने कोबरा बीयर कंपनी की शुरुआत की और उसे ऊंचाईयों पर लेकर गए.

करन के अनुसार भारत से आने वाले छात्रों को ब्रिटेन में काम करने की अनुमति ना देना, आने वाले छात्रों की संख्या को प्रभावित कर रहा है.

करन कहते हैं, “सरकार को चाहिए कि सरकार विदेशों से आने वाले छात्रों को ब्रिटेन में रहकर दो साल के लिए नौकरी करने का अवसर दे. ये छात्रों के लिए एक बड़ा आकर्षण हैं खासकर भारत जैसे देशों के छात्रों के लिए, क्योंकि उनके लिए अब भी ब्रिटेन में पढ़ाई काफी मंहगी है.”

करन कहते हैं, “अगर भारत से आने वाले छात्र दो साल ब्रिटेन में रुककर काम करते हैं तो उन्होंने जो खर्च किया है उसकी वो भरपाई कर सकते हैं और अनुभव प्राप्त कर सकते हैं.”

छात्र हो सकते हैं अहम कड़ी

करन के अनुसार ब्रिटेन और भारत के बीच सदियों से रहे संबधों को और भी बेहतर करने में ये छात्र अहम भूमिका निभा सकते हैं.

गौरतलब है कि यूरोपीय यूनियन के बाद भारत ही ब्रिटेन के लिए सबसे बड़ा बाज़ार है. हालांकि हाल फिलहाल में ब्रिटेन का व्यापार ब्राजील, रूस और चीन के साथ बढ़ रहा है.

भारत के नज़रिए से देखे तो भारत के सबसे बडे व्यापारी सहयोगियों में संयुक्त अरब अमीरात, चीन और अमरीका आते हैं.

करन कहते हैं कि भारत से व्यापार करने वाले ब्रितानी उद्यमियों की संख्या काफी कम है, “एक बात मुझे परेशान करती है कि जब भी मैं देश भर में व्यापारिक प्रतिनिधि-मंडल के सामने सवाल करता हूं कि वो लोग हाथ उठाइए जो भारत के साथ व्यापार करते हैं, तो बहुत कम हाथ हवा में उठते हैं. ये हमारी जिम्मेवारी कि हम अपने मझौले और छोटे उद्योगपतियों से कहें कि वो भारत के साथ व्यापार करें.”

ब्रिटेन करे पहल

करन भारत की वकालत करते हुए कहते हैं कि भारत के साथ व्यापार करना अब बहुत आसान है.

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2006 के बाद कोई ब्रिटेन यात्रा नहीं की है जिसे भारत की ब्रिटेन में कम दिलचस्बी के उदहारण के तौर पर देखा जाता है.

वहीं 2005 से ब्रिटेन विभान्न चार प्रधानमंत्री ने भारत का दौर किया हैं और करन बिलिमोरिया हर दल का हिस्सा रहे हैं.

करन बिलिमोरिया कहते हैं हर यात्रा में ब्रितानी दल की कोशिश रही है कि भारत और ब्रिटेन के बीच जो पूर्वाग्रह हैं उन्हें दूर किया जाए.

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