दिल के मरीजों को मोटे होने का फायदा!

मोटापा, दिल का रोग
Image caption दिल के रोग में मोटापा के कुछ फायदे भी हो सकते हैं.

मोटा होना हमेशा ही तकलीफदेह नहीं होता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि सामान्य वजन वाले रोगियों की तुलना में दिल के वैसे मरीजों के मरने की संभावना कम रहती है जोकि मोटे हैं.

खराब स्वास्थ्य स्थिति और जीवन शैली को लेकर दी जाने वाली सलाह को नजरअंदाज करने की आदत के बावजूद मोटे लोगों के मामले में यह निष्कर्ष निकला है.

अध्ययन में 4,400 से भी ज्यादा रोगियों को शामिल किया गया है.

युनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की टीम का कहना है कि इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि डॉक्टर मोटे लोगों का इलाज जोर-शोर से करते हैं.

दिल की बीमारी और मोटापा

'ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन' ने कहा कि यह उन मरीजों के साथ होता है जो सामान्य तौर पर मोटे नहीं होते बल्कि जिनके शरीर में चर्बी जमा हो गई है.

यह पहली बार नहीं है कि शोधकर्ताओं ने इस विरोधाभास की तरफ इशारा किया हो.

मोटा होना या सामान्य से अधिक वजन होना दिल की बीमारी के खतरे को बढ़ाता है और यह मर्ज के बेहतर इलाज का रास्ता भी दिखलाता है.

उदाहरण के लिए एक सिद्धांत यह भी दिया गया है कि ऐसे मरीज अधिक वजन के बावजूद कसरत करके खुद को फिट रख सकते हैं.

शोध के नतीजे

यही समझने के लिए युनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के स्वास्थ्य सर्वे में भाग लेने वाले मरीजों के आंकड़ों को खंगाला.

उन्होंने पाया कि दिल की बीमारी का सामना कर रहे सामान्य रोगियों के बनिस्पद मरीज अगर मोटा या अधिक वजन वाला हो तो उनके मरने की संभावना अगले 17 सालों तक कम रहती है.

कुछ और अध्ययन भी इस ओर इशारा करते हैं.

शोध में शामिल 31 फीसदी मरीज मोटे पाए गए. उनका बायोमास इंडेक्स या दूसरे शब्दों में कहें तो उनके वजन, उम्र और लंबाई का अनुपात 30 या उससे ज्यादा था.

जीवनशैली से जुड़ाव

Image caption मोटापा और अधिक वजन का होना अलग-अलग चीजें हैं.

इन मरीजों को उपचार के लिए दवा दी गई.

ये मरीज युवा थे लेकिन इनका स्वास्थ्य खराब स्थिति में था और इनको दिल का दौरा पड़ने का खतरा ज्यादा था.

कॉलस्ट्रॉल और रक्त चाप जैसे लक्ष्ण भी इन मरीजों में मौजूद थे लेकिन ये सिगरेट नहीं पीते थे.

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों ने शारीरिक गतिविधियों में भाग लिया था उन्हें दिल का दौरा पड़ने या उन पर मौत का खतरा कम था.

पर यह बात सामान्य वजन वाले उन मरीजों पर लागू नहीं होती थी जो सिगरेट पीते थे या निष्क्रिय जीवन जी रहे थे.

लेकिन मोटे मरीजों में अच्छी जीवन शैली को अपनाने में कोताही बरतने के बावजूद यह खतरा कम देखा गया.

कारगर नहीं है बायोमास इंडेक्स

लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों दिल के वैसे मरीज जोकि मोटे हैं, जीवन शैली में सुधार करके अपनी हालत बेहतर कर लेते हैं.

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर मार्क हैमर ने कहा कि वे इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

उनका कहना है कि यह ऐसा मामला नहीं है कि मोटापे वाले मरीज ज्यादा स्वस्थ हैं.

उन्होंने कहा,“हम इस विरोधाभास को अब तक समझ नहीं पाए हैं और हम मरीजों कों वजन बढ़ाने की सलाह नहीं देंगे.”

डॉक्टर मार्क कहते हैं,“संजीदा तौर पर कही गई बातों में एक यह भी है कि जब मोटापे वाले मरीज डॉक्टर के पास जाते हैं तो पहली नजर में उन दिल के दौरे का खतरा अधिक मालूम देता है और डॉक्टर उनका इलाज जोर शोर से करते हैं.”

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