3,000 साल पुरानी भाषा में फ़ेसबुक का पन्ना

आरामाइक
Image caption ये भाषा तीन हज़ार साल पुरानी है और ईसा मसीह के ज़माने में बोली जाती थी

इसराइल में एक युवा ने एक प्राचीन भाषा आरामाइक में फ़ेसबुक के पन्ने को बनाया है. ये भाषा तीन हज़ार साल पुरानी है और ईसा मसीह के ज़माने में बोली जाती थी.

इस पन्ने पर आरामाइक भाषा में स्टेटस लिखने को कहा गया है.

ईसा सदी के शुरूआती वर्षों में ये ज़ुबान मध्यपूर्व में बोली जाती थी. यहूदी लोग आज भी अपने धार्मिक ग्रंथ तालमुद इसी भाषा में पढ़ते हैं.

इस फ़ेसबुक के संचालक ने आरामाइक भाषा में अपने पन्ने पर लिखा है, ''इस पन्ने पर कोई भी स्टेटस पोस्ट कर सकता है और पन्ने को लाइक कर सकता है''.

हारेट्ज़ अखबार में छपी रिपोर्टों के अनुसार ये पन्ना क़रीब 15 दिन पुराना है और इसके अब तक इसके दो हज़ार फॉलोवर बन गए है.

गुप्त

लेकिन सबसे ख़ास बात ये है कि इसको शुरू करने वाले ने अपनी पहचान गुप्त रखी है. उन्होंने अपने बारे में सिर्फ़ इतना लिखा है कि वो जल्द ही सेना में नौकरी शुरु करने वाले हैं और उन्होंने तालमुड कक्षाओं के दौरान आरामाइक भाषा सीखी.

उनके अनुसार आरामाइक में फ़ेसबुक को देखना अनोखा होगा और उन्होंने पन्ने के फॉलोवर से कहा है कि वे अपने स्टेटस पर कविताएं, फ़िल्मी पोस्टर लगाएं और उन्हें व्यंग्यात्ममक तरीक़े से आरामाइक में पेश करें.

वैसे फ़ेसबुक के इस पन्ने पर आरामाइक बोली में फ़ेसबुक को 'सिफ्रा दी अनपिन', स्टेटस को 'क्टिव्टा' और लाइक को हैविवतई लिखा है साथ ही इसपर आधुनिक पोस्ट भी लगी हुई है जो इसके पन्ने को विरोधाभाषी होने के साथ-साथ आकर्षक बनाते हैं.

स्टेटस अपडेट में ये बताया जा रहा है कि इंटरनेट पर क्या सामग्री है. जो गाने चलन में है उनके बारे में भी जानकारी दी जा रही है. कुछ लोगों का कहना है कि इस पर पहला स्टेटस हिब्रू में लिखा गया था तो वहीं आरामाइक की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सुझाव भी दे रहे हैं.

इस बात को दर्शाने के लिए किस तरह से पन्ने को मिलजुलकर चलाया जा रहा है इसके एडमिनिस्ट्रेटर इंटरनेट शब्दावली जैसे लोल और रॉफल लिखने के लिए सुझाव मांग रहे हैं साथ ही ये भी वादा किया जा रहा है कि इसे अनुवाद करने वाले को बड़ा पुरस्कार दिया जाएगा.

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