क्या बदलेगी शादी की परिभाषा?

समलैंगिक शादियों का समर्थन
Image caption एक सर्वेक्षण में 50 फीसदी से ज्यादा अमरीकी लोगों ने समलैंगिक शादियों का समर्थन किया है

अमरीका में सुप्रीम कोर्ट कुछ महीनों में यह तय करेगा कि कैलिफ़ोर्निया राज्य में समलैंगिक जोड़ों को शादी की कानूनी इजाज़त दी जानी चाहिए या नहीं.

देश की उच्चतम अदालत के सामने है कैलिफ़ोर्निया राज्य का सन 2008 में चुनाव के ज़रिए तय किया गया प्रॉपोज़िशन 8 नाम का एक कानून. इसके तहत समलैंगिक जोड़ों की शादी पर पाबंदी लगाई गई थी.

और इसी कानून के खिलाफ़ कुछ समलैंगिक जोड़ों ने सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया था. उनका कहना है कि हर अमरीकी को शादी करने की आज़ादी होनी चाहिए.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान शादी की परिभाषा पर सवाल उठाए. और विवाह को परिभाषित किए जाने में अमरीकी सरकार की भूमिका पर राय बंटी हुई है.

शादी की परिभाषा बदलेगी?

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट इस मुकदमे में बहस के बाद अब 2008 के कानून को बहाल रख सकता है, या फिर उसको उलट सकता है. इसके अलावा देश के सभी राज्यों में जहां अभी समलैंगिक विवाह पर पाबंदी लगी है उसे हटाया भी जा सकता है.

लेकिन इस कानून के समर्थकों का कहना है कि कानूनन शादी सिर्फ़ एक आदमी और एक औरत के बीच ही हो सकती है.

समलैंगिकों के अधिकारों के मुद्दे पर अमरीका में रूढ़िवादी और उदारवादी लोग बंटे हुए हैं.

उदारवादी लोग समलैंगिकों को और अधिक अधिकार दिए जाने का समर्थन करते हैं जबकि रूढ़िवादी लोग अमरीकी समाज में रूढ़िवादी नीतियों को ही बनाए रखने की वकालत करते हैं.

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को दो घंटे तक चली बहस के दौरान जजों और दोंनो पक्षों के वकीलों के बीच इस मुद्दे पर गर्मा गर्म बहस हुई.

मौजूदा सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस जॉन रॉबर्टस जिनको राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने नियुक्त किया था, एक रूढ़िवादी जज माने जाते हैं.

एक मौके पर जज रॉबर्ट्स ने कहा कि यह मुकदमा अमरीका में विवाह की परिभाषा को ही बदलने की कोशिश है.

जजों में मतभेद

अमरीका के सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज होते हैं और इनको अमरीकी राष्ट्रपति द्वारा चुना जाता है पर इनकी नियुक्ति के लिए अमरीकी सीनेट की भी मंज़ूरी मिलना ज़रूरी होती है.

डेमोक्रेटिक औऱ रिपब्लिकन पार्टियों के राष्ट्रपति अपने अपने हिसाब से उदारवादी और रूढ़िवादी जजों की नियुक्तियां करते रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट के यह जज जीवन भर के लिए नियुक्त किए जाते हैं.

Image caption समलैंगिक शादियों का विरोध करने वाले कह रहे हैं कि शादी महिला और पुरूष के बीच ही होनी चाहिए

मंगलवार को एक जज ने यह मुद्दा उठाया कि सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे पर सुनवाई करनी भी चाहिए या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान उदारवादी जज एलीना केगन, जो अभी कुंवारी हैं, उन्होंने यह सवाल उठाया कि आखिर शादी की संस्था को भला क्या नुकसान हो सकता है अगर समलैंगिकों को भी शादी करने की इजाज़त दे दी जाए.

लेकिन एक रूढ़िवादी जज सैम एलीटो ने कहा कि इस मुद्दे पर अभी अधिक आंकड़े नहीं हैं कि समलैंगिक शादी का बच्चों और शादी की संस्था पर क्या असर पड़ता है.

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इस पर भी बहस की कि क्या बच्चे जनने की क्षमता को भी विवाह की परिभाषा से जोड़ कर देखा जाना चाहिए.

बहस के बाद समलैंगिक जोड़ों के वकील टेड ओलसन ने कहा, "हमें यह मालूम है कि अमरीकी जनता इस मुद्दे पर हमारा समर्थन करती है. हमें यह नहीं मालूम कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर क्या फ़ैसला देगा, लेकिन कोर्ट ने हमारी बात गौर से सुनी, और हमसे कुछ सक्त सवाल भी पूछे. और हमे अच्छी तरह मालूम है कि कौन हक पर है. "

सर्वेक्षण में समर्थन

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट एक अन्य मुकदमे में 1996 के उस कानून के बारे में भी सुनवाई करेगा जिसके तहत विवाह सिर्फ़ एक मर्द और एक औरत के बीच ही हो सकता है.

अमरीका में एक नए सर्वेक्षण के अनुसार 53 प्रतिशत अमरीकी समलैंगिक विवाह को कानूनी हैसियत देने के हक में हैं जबकि 39 प्रतिशत लोग समलैंगिक विवाह को कानूनी हैसियत दिए जाने के खिलाफ़ हैं.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के बाहर समलैंगिक विवाह के विरोधियों और समर्थकों ने जमकर अपने अपने पक्षों का प्रचार किया.

समलैंगिक विवाह के विरोधियों का कहना था कि प्राकृतिक तौर पर विवाह और बच्चे जनने की प्रक्रिया सिर्फ़ एक मर्द और एक औरत के बीच ही मुमकिन है.

हेरिटेज फ़ाउन्डेशन की जेनिफ़र मार्शल कहती हैं, "कोर्ट के सामने मुद्दा यह है कि हमें विवाह के बारे में ऐसी नीति बनाने का हक है जो प्राकृतिक सच्चाई को सामने रखे कि बच्चों को मां और बाप दोनों की ही ज़रूरत होती है. विवाह सिर्फ़ एक औरत और एक मर्द के बीच ही हो सकता है."

समलैंगिक शादी का विरोध करने वाले कुछ लोगों ने बैनर और पोस्टर थामे हुए थे जिन पर लिखा था "बच्चे मां और बाप दोनों के साथ ही अच्छे लगते हैं."

शादी की 'आजादी'

Image caption दुनिया के कई हिस्सों में समलैंगिक बराबरी का हक मांग रहे हैं

विरोधियों की मांग है कि अमरीकी सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे पर दखल नहीं देना चाहिए, औऱ यह मामला राज्यों पर ही छोड़ दिया जाना चाहिए.

लेकिन समलैंगिक लोग और उनके अधिकारों के हिमायतियों का कहना है कि यह बराबरी का मामला है और समलैंगिक लोगो को भी हर अमरीकी की तरह किसी से भी विवाह करने की आज़ादी होनी चाहिए.

इस मुकदमें में शामिल एक समलैंगिक महिला सैनडी स्टीयर कहती हैं, "प्रॉपोज़िशन 8 एक भेदभाव करने वाला कानून है जिसके तहत समलैंगिक लोगों के खिलाफ़ भेदभाव किया जाता है. समलैंगिक लोगों को और उनके बच्चों को इस कानून से बहुत कठिनाई होती है. और इस कानून का कोई औचित्य भी नहीं है. अब हमें इस कानून का अंत कर देना चाहिए."

कैलिफ़ोर्निया की अटर्नी जनरल कमला हैरिस भी राज्य के इस कानून के खिलाफ़ हैं. उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने कई बार यह फ़ैसला दिया है कि विवाह करना एक मूल अधिकार है. और वोटरों द्वारा विवाह के अधिकार पर पाबंदी लगाना सविंधान के खिलाफ़ है.

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट अब जून में इस मुद्दे पर फ़ैसला देगा.

अगर कोर्ट समलैंगिकों के हक में फ़ैसला करता है तो अमरीकी कानून में यह एतिहासिक फ़ैसला होगा जिसमें पूरे देश में विवाह की परिभाषा को ही बदलने की क्षमता होगी. इसके अलावा समलैंगिक लोगों को अमरीकी समाज में बराबरी का दर्जा मिलने में भी मदद मिल सकती है.

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