सीरिया: अब तक का 'सबसे घातक मार्च'

सीरिया
Image caption सीरिया में दो साल पहले असद सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह शुरू हुआ था

सीरिया से जुड़े एक संगठन का दावा है कि अकेले मार्च महीने में देश में छह हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

ब्रिटेन स्थित इस संगठन द सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स का कहना है कि उसने मार्च महीने में 6005 लोगों की मौत को दर्ज किया है.

संगठन का कहना है कि मारे गए लोगों में 291 महिलाएँ, 298 बच्चे, 1486 विद्रोही लड़ाके और सेना से भागकर आए लोगों के साथ-साथ 1464 सरकारी सैनिक भी शामिल हैं.

मारे गए कई आम नागरिकों और विद्रोही लड़ाकों की पहचान नहीं हो पाई है.

ये संगठन सरकार विरोधी है और दोनों पक्षों की ओर से होने वाले मानवाधिकार उल्लंघन की निगरानी करता है. संगठन का कहना है कि दो साल पहले शुरू हुए विद्रोह के दौरान उसने 62,554 लोगों की मौत को दर्ज किया है. लेकिन असल संख्या इससे कहीं ज़्यादा है.

संगठन के प्रमुख रामी अब्दुल रहमान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "हमारा आकलन है कि इस दौरान मारे गए लोगों की संख्या एक लाख बीस हज़ार के आसपास है. कई मौतों को दर्ज करना काफ़ी मुश्किल होता है."

आकलन

दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र का आकलन है कि विद्रोह शुरू होने के बाद से सीरिया में 70 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.

विदेशी मीडिया और स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों पर लगी पाबंदियों के कारण इन आँकड़ों की पुष्टि करना असंभव है.

जब दो साल पहले राष्ट्रपति बशर अल असद के ख़िलाफ़ विद्रोह शुरू हुआ था, उस समय उन्होंने इसे विदेशी तत्वों और अल क़ायदा की साज़िश कहा था.

अब ये विद्रोह एक गृह युद्ध में बदल गया है और इसमें विदेशी जिहादी भी शामिल हो गए हैं. सीरिया की सरकार अक्सर इस बात पर ज़ोर देती है कि वो हथियारबंद आतंकवादी गैंग्स से लड़ रही है.

बीबीसी के मध्य पूर्व मामलों के संपादक जेरेमी बॉवेन का कहना है कि जैसे-जैसे लड़ाई लंबी खिंच रही है, ब्रिटेन, फ्रांस और अमरीका विद्रोहियों की हथियारों और सैन्य प्रशिक्षण के रूप में सहायता करने के क़रीब आ रहे हैं.

ब्रिटेन का आकलन है कि पिछले साल से सीरियाई सरकार के प्रमुख सहयोगी ईरान और रूस ने वहाँ सैन्य और वित्तीय समर्थन का स्तर बढ़ा दिया है.

जेरेमी बॉवेन का कहना है कि सरकारी सैनिकों को विद्रोहियों पर सैन्य बढ़त हासिल होने की धारणा के कारण ही ब्रिटेन और फ्रांस अपने यूरोपीय संघ के सहयोगी देशों पर इसके लिए दबाव डाल रहे हैं कि वो सीरिया के खिलाफ हथियारों की पाबंदी हटा लें.

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