एड्स से पीड़ित किशोरी के संघर्ष की दास्तां

  • 10 अप्रैल 2013
लिज़ा और ओक्साना अलिजिवा
Image caption लिज़ा जब छह साल की थीं तो उनकी माँ की मौत हो गई थी.

यूक्रेन यूरोप के उन देशों में से एक हैं, जहाँ एचआईवी का संक्रमण अधिक है.

लेकिन यहां के ऐसे बहुत से लोगों की पहुँच उन दवाओं तक नहीं है, जो उन्हें सामान्य जीवन जीने में मदद करती हैं. ऐसी जानकारियां हमसे साझा करने के लिए एक एचआईवी संक्रमित किशोरी उत्सुक है.

हम किचन में बैठकर चाय पी रहे हैं और लीज़ा यॉरशेंकों गोलियों की ढेर में से कुछ गोलियां निकालती हैं. कुछ गोलियां सफेद हैं, कुछ पीली हैं कुछ एक पारदर्शी डिब्बे में रखी हैं, जिस पर लिखा है, रात के लिए.

लीज़ा 14 साल की हैं और एचआईवी वायरस से संक्रमित हैं. यानि एड्स की मरीज हैं.

दवाओं पर निर्भरता

उनकी जिंदगी अब एंटी रेट्रोवायरल दवाओं पर निर्भर है. इन दवाओं को वह दिन में तीन बार लेती हैं. मुझे आश्चर्य होता है कि वे दवाओं के खाने का समय याद कैसे रखती हैं. मैंने उनसे पूछा कि क्या वे इसके लिए फोन में अलार्म लगाती हैं. इस सवाल के जवाब में उन्हें गोद लेने वाली ओक्साना अलिजिवा कहती हैं,''जी हाँ.''

लीज़ा को यह पता है कि वह बहुत भाग्यशाली हैं, क्योंकि उन्हें दवाईयां हासिल हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है यूरोप के एड्स की महामारी से पीड़ित देशों में यूक्रेन का हाल बहुत बुरा है. यहां इससे निपटने के पर्याप्त उपाय भी नहीं हैं.

यूक्रेन में एक लाख 20 हज़ार लोग एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के रूप में पंजीकृत हैं. इनमें से केवल एक तिहाई लोग ही दवा ले पाते हैं.

यूक्रेन में एड्स की रोकथाम में लगे एक गैर सरकारी संगठन 'एड्स एलायंस' का अनुमान है कि वास्तव में एड्स पीड़ितों की संख्या इससे दोगुनी है. उसके मुताबिक छह पीड़ितों में से केवल एक को ही इलाज मिल पा रहा है. यह दुनिया का सबसे निचला स्तर है.

बोत्सवाना और रवांडा जैसे अफ्रीकी देश भी एचआईवी संक्रमित क़रीब 80 फ़ीसदी लोगों को जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं.

पिछली सर्दियों में राष्ट्रपति विक्टर यांकोविच ने घोषणा की थी कि संक्रमण से होने वाली बीमारियों की रोकथाम सरकार की प्राथमिकता होगी.

लेकिन 2013 में हेपेटाइटिस से लड़ने के लिए बजट का आवंटन नहीं किया गया. राष्ट्रपति की ओर से प्रस्तावित राशि का केवल 40 फीसद ही एड्स और टीबी जैसे रोगों के लिए आबंटित किया गया.

संसद में भाषण

लीज़ा ने इसके ख़िलाफ़ आवाज उठाने का फैसला किया. रोगियों के एक समूह ने उन्हें समर्थन दिया. वे यूक्रेन की संसद में गईं और सांसदों से बजट प्रस्तावों को रोकने की अपील की.

उन्होंने संसद में कहा,''इलाज के बिना बहुत से अभिभावक और बच्चों की मौत हो जाएगी. इसलिए मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि आप इन बजट प्रस्तावों को वोट न दें, जिससे जैसा मेरे साथ हुआ, वैसा अन्य बच्चों के साथ न होने पाए.''

Image caption यूक्रेन में एंटी रेट्रोवायरल दवाओं की ख़रीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते हैं.

लीज़ा जब छह साल की थीं तो उनकी माँ की मौत हो गई थी. संक्रमित सुई से हेरोइन का इंजेक्शन लेने से वे एचआईवी संक्रमित हो गई थी.

लीज़ा की माँ फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती थीं और अनुवादक का काम करती थीं. इस दौरान वे एक पुरुष के संपर्क में आईं जिन्होंने उनका परिचय नशीली दवाओं से कराया.

उनकी माँ को तीन साल की सज़ा हुई. लीज़ा ने बताया,''रिहाई के बाद माँ ने इसे छोड़ने की कोशिश की लेकिन पिताजी ने उन्हें जल्द ही फिर इसका आदी बना दिया. इससे वे बीमार हो गईं.''

लीज़ा ने बताया,''मुझे नहीं लगता कि उन्हें एंटी रेट्रोवायरल दवाओं के बारे में पता था. यह मिथक के समान था. हमने ऐसी दवाओं के बारे में सुना तो था लेकिन वे बहुत महंगी थीं, जिनके बारे में आम लोग सोच भी नहीं सकते थे.''

लीज़ा की माँ का 2005 में उसी दिन निधन हो गया जिस दिन उन्हें पता चला कि वे भी एचआईवी संक्रमित हैं.

उन्होंने बताया,''हम सब अस्पताल में थे. अधिकारियों ने दादी को आफ़िस में बुलाया. जब वे वापस आईं तो रो रही थीं. मैंने सोचा कि ऐसी कौन सी बुरी बात उन्हें बताई गई है, जिससे वे इतना रो रही हैं.''

कठिन इलाज

आठ महीने तक लीज़ा का अस्पताल में इलाज चला. वह यूक्रेन में एंटी रेट्रोवायरल दवाएं लेने वाली शुरूआती मरीजों में से एक थीं. इलाज से वे ठीक हो गईं.

लीज़ा का अपने पिता से काफी दिनों से संपर्क नहीं था. अधिकारी उन्हें बालगृह भेजने की योजना बना रहे थे, तह ओक्साना अलिजिवा और उनके पति ने उन्हें गोद ले लिया. दोनों की कोई संतान नहीं थी.

ओक्साना और उनके पति एल्डर एक छोटी बच्ची को गोद लेना चाहते थे. लेकिन लीज़ा की कहानी ने उन्हें प्रभावित किया. उन्हें लगा कि वे उन्हें एक अच्छा घर दे सकते हैं.

अधिकारी दवाओं की कमी के लिए पैसे की कमी बताते हैं. लेकिन बहुत से लोगों का मानना है कि इसके लिए अव्यवस्था और भ्रष्टाचार भी जिम्मेदार है.

एड्स एलायंस के एंड्री केलपीकोव बताते हैं कि सरकार ने 2004 में एंटी रेट्रोवायरल दवाएं बाज़ार क़ीमत से 27 गुना अधिक क़ीमत पर ख़रीदी थीं.

इसका परिणाम यह हुआ कि एड्स, टीबी और मलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए पैसे देने वाले माइक्रोसाफ्ट के प्रमुख बिल गेट्स की संस्था ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पैसा देना बंद कर दिया.

उसने एड्स एलायंस जैसी गैर सरकारी संस्थाओं को पैसे देने शुरू कर दिए. हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय इन आरोपों से इनकार करता है.

राष्ट्रपति ने एड्स और एचआईवी पीड़ित लोगों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए नए बजट का आबंटन करने का आदेश दिया है. इसे अगले महीने संसद में पेश किया जाएगा.

नया क़ानून

यूक्रेन के एड्स-एचआईवी संक्रमित लोगों को परेशान करने वाली एक बात भी है.यह है पिछले महीने लागू हुआ एक नया कानून. इसके मुताबिक यूक्रने में विदेशी दवाओं का आयात करने वालों को एक अतिरिक्त लाइसेंस लेना होगा.

Image caption यूक्रेन में पिछले साल एचआईवी संक्रमण में मामूली कमी देखी गई है.

सरकार का कहना था कि इससे दवाओं की गुणवत्ता पर नियंत्रण रहेगा और घरेलू उत्पादन बढ़ेगा.

एंटी रेट्रोवायरल दवाएं विदेश से आती हैं, ऐसे में एचआईवी संक्रमित लोगों को डर है कि उन्हें ये दवाएं नहीं मिलेंगी.

लीज़ा को समर्थन देने वाले रोगियों के समूह के एचआईवी संक्रमित प्रमुख दमित्रो श्रेमवे कहते हैं कि केवल घूस देने वालों को ही यह लाइसेंस मिलेगा. इस क़ानून से लोगों की मौत होगी.

एंटी रेट्रोवायरल दवाओं पर सरकारी खर्च में कमी आने के बाद भी पिछले साल एचआईवी संक्रमित लोगों के पंजीकरण में मामूली कमी देखी गई.

जब मैंने लीज़ा से पूछा कि जब उनकी दोस्तों ने उन्हें टीवी पर सांसदों को संबोधित करते हुए देखा तो उनकी प्रतिक्रिया क्या थी.

इस पर उन्होंने कहा कि उनकी बीमारी के बारे में उनके दोस्तों को पहले से पता था. लोगों की प्रतिक्रिया बहुत अच्छी थी. इसके बाद कुछ लोगों से दोस्ती और मज़बूत हुई. लेकिन उनके कुछ अध्यापक बहुत सहयोगी नहीं थे. उनमें से एक ने छात्रों से कह दिया कि छींकने और हाथ मिलाने से भी एचआईवी संक्रमण हो सकता है.

लीजा ने कहा,''जब लोग ग़लत सूचनाएं दे रहे हों तो मैं चुप नहीं बैठ सकती.''

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