मिस्र: होस्नी मुबारक को अदालत से मिली राहत

हुस्नी मुबारक
Image caption शनिवार को हुस्नी मुबारक अदालत में पेश हए.

मिस्र की एक अदालत ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को दो साल पहले हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान मारे गए प्रदर्शनकारियों की हत्या के आरोप में हिरासत में नहीं रखा जा सकता है.

दो साल पहले हुए विरोध प्रदर्शन के कारण मुबारक को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी और तभी से उन पर मुक़दमा भी चल रहा है.

लेकिन अदालत से मिली इस राहत के बावजूद मुबारक हिरासत में रहेंगे क्योंकि उनपर भ्रष्टाचार के कई मामले अभी भी चल रहें हैं.

84 साल के मुबारक 2011 में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों की हत्या की साज़िश रचने के मामले में मुक़दमा के दोबारा शुरू होने का इंतज़ार कर रहे हैं.

मुबारक के वकीलों ने अदालत के सामने दलील दी कि उनके मुवक्किल पहले ही लंबे समय तक जेल में रह चुके हैं.

उम्रक़ैद

जून 2012 में अदालत ने मुबारक को प्रदर्शनकारियों की मौत का ज़िम्मेदार ठहराते हुए उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी. लेकिन उस मुक़दमे की सुनवाई के दौरान कुछ तकनीकी कमियों के कारण अदालत ने जनवरी 2013 में उस मुक़दमे की दोबारा सुनवाई के आदेश दिए थे.

शनिवार को जब मुबारक अदालत में पेश हुए तो वहां उस समय अफ़रा-तफ़री का माहौल छा गया जब मुक़दमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश मुस्तफ़ा हसन अब्दुल्लाह ने इस केस से अलग होने की घोषणा की.

अब इस मामले को दूसरे कोर्ट में भेज दिया गया है और इसकी सुनवाई के लिए जल्द ही दूसरे जज की नियुक्ति की जाएगी.

2011 में मुबारक विरोधी प्रदर्शन में लगभग 850 लोग मारे गए थे लेकिन आख़िरकार मुबारक को सत्ता छोड़नी पड़ी थी.

मुबारक के अलावा उनके तत्कालीन गृह मंत्री हबीब अल-अदली को प्रदर्शनकारियों की हत्या की साज़िश रचने का दोषी क़रार देते हुए उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी.

लेकिन अब दोनों के ख़िलाफ़ ही मुक़दमे की दोबारा सुनवाई होगी.

मुबारक और उनके दो बेटे गमाल और अल्ला के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मुक़दमे भी चलेंगे. हालाकि पहली बार में वे भ्रष्टाचार के मामले में बरी हो गए थे.

मुबारक जब से गिरफ़्तार हुए हैं तबसे बीमार चल रहे हैं और शनिवार को सुनवाई के लिए वो व्हीलचेयर पर बैठ कर अदालत पहुंचे.

विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई मौतों के लिए पहले तो पुलिस को ही मुख्य रूप से ज़िम्मेदार माना जा रहा था लेकिन पिछले हफ़्ते एक रिपोर्ट लीक हुई जिसके अनुसार सेना को भी मानवाधिकार के उल्लंघन का दोषी पाया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार सेना पर प्रदर्शनकारियो की हत्या और उन्हें यातनाएं दिए जाने के आरोप हैं.

लेकिन मिस्र के मौजूदा रक्षा मंत्री अब्दुल फ़तह अल-सिस्सी ने सेना पर लगे तमाम आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि रिपोर्ट देश के साथ धोखा है.

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