सीरिया से निपटने को तैयार इसराइल: नेतन्याहू

  • 21 अप्रैल 2013
बेंजामिन नेतन्याहू
Image caption सीरिया के हथियारों को लेकर चिंतित इसराइल

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उसे अधिकार है कि वो हथियारों को सीरिया में ग़लत हाथों में पड़ने से रोके.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर चरमपंथियों के हाथों में रासायनिक हथियार या विमान भेदी बंदूक़ें आ गईं तो ये क्षेत्रीय संतुलन का पूरा रुख़ बदल सकती हैं.

नेतन्याहू से बीबीसी की ये बातचीत लंदन में हुई जहां वो मारग्रेट थैचर के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए थे.

हालांकि उन्होंने ये भी कहा है कि इसराइल की नीति सीरिया के अंदरूनी संघर्ष में दख़ल देना नहीं है.

लेकिन हाल ही के दिनों में काई बार ऐसा हुआ है जब गोलन की पहाड़ियों में इसराइल ने सीरिया की तरफ़ से हो रही गोलीबारी का जवाब दिया है.

इसराइल ने पहली बार 1967 में गोलन की पहाड़ियों पर क़ब्ज़ा किया था. इसके बाद से ही इसराइल ये कहता आया है कि इन पहाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं है.

जब से सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ वहां पर विद्रोह शुरु हुआ है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग उठती रही है कि विद्रोहियों को हथियार मुहैया कराना चाहिए.

साथ ही साथ इस बात की भी चिंता जताई जा रही है कि इस्लामी चरमपंथियों के साथ मिलकर असद के ख़िलाफ़ लड़ने वाले विद्रोही इनका इस्तेमाल अपने हितों के लिए कर सकते हैं.

नेतन्याहू का कहना है, “हमारी मुख्य चिंता ये है कि सीरिया में पहले से ही जो रासायनिक हथियार और विमान गिराने वाली गन मौजूद हैं वो बहुत ख़तरनाक हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “ये क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ सकती हैं. ये पूरी दुनिया में आतंकवाद का ख़तरा पैदा कर सकते हैं. ये हमारे हित में है कि हम अपनी सुरक्षा करें लेकिन साथ ही ये पूरी दुनिया के भी हित में है. “

आक्रामक नहीं

ये पूछे जाने पर कि क्या इसराइल सीरिया के प्रति और आक्रामक रवैया अपना सकता है नेतन्याहू का कहना था, “हम आक्रामक नहीं है. हम सैन्य संघर्ष नहीं चाहते. लेकिन ज़रूरत पड़ने पर हम अपनी सुरक्षा के लिए तैयार हैं.”

Image caption सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद

क्या जनवरी में सीरिया सरकार के हथियारों के दस्ते पर इसराइल ने हवाई हमला किए थे? जब बीबीसी ने ये सवाल पूछा तो नेतन्याहू इसका जवाब टाल गए. तब कहा गया था कि वो दस्ता लिबनान में हिज़बुल्ला के लिए भेजा जा रहा था.

इसके पहले असद ने पश्चमी देशों पर सीरिया के अंदर अल-क़ायदा को समर्थन देने का आरोप लगाया था.

असद का कहना था कि अगर चरमपंथी सीरिया में मज़बूत हुए तो यूरोप और अमरीका को इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी.

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