बांग्लादेश: इमारत के मलबे में 'ज़िंदगी' की तलाश !

Image caption 8 मंजिला इमारत के मलबे में जीवित की तलाश करना काफी मुश्किल है

बांग्लादेश में आठ मंजिला इमारत गिरने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 175 हो गई है. इमारत के मलबे में उन लोगों की खोज जारी है जिनके जिंदा बचे होने की उम्मीद है.

हादसे में एक हज़ार से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. राहतकर्मी स्वयंसेवकों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. वे कह रहे हैं कि मलबों से लोगों की सिसकियां और कराह सुनाई दे रही है. बड़ी-बड़ी मशीनों की सहायता से मलबे को हटाया जा रहा है.

पुलिस का कहना है कि फैक्टरी के मालिक ने चेतावनी को नजरंदाज किया था. उसे पिछले मंगलवार ही बता दिया गया था कि इमारत में दरारें उभर आई हैं.

कहा जा रहा है कि हादसे के बाद से ही मालिक फरार हैं. इस हादसे के बाद एक बार फिर बांग्लादेश में काम करने की बेहद खराब स्थितियों के बारे में सवाल उठने लगे हैं.

ढाके के बाहरी इलाके में जहां हादसा हुआ है वहां कपड़ा बनाने की फैक्टरी थी. इसके अलावा बैंक और अन्य दुकानें भी थीं. सुबह हुए हादसे के वक्त वहां काफी भीड़ भाड़ थी.

बांग्लादेश में दुनिया की सबसे ज्यादा कपड़ा फैक्टरियां हैं. पश्चिमी ब्रांडों के लिए यहां सस्ती कीमत पर कच्चा माल मुहैया कराया जाता है.

प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मारे गए लोगों की याद में एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है.

भागने का मौका नहीं मिला

Image caption मलबे में दबे अपनों की तलाश में हजारों लोग घटना स्थल के आसपास जमा हो गए हैं

अग्निशामक दस्ते के एक कर्मचारी का कहना है कि ढाका के जिस सावा इलाके में हादसा हुआ है वहां करीब 2000 लोग थे.

अग्निशामक दल के अधिकारी अबुल खायेर ने बताया, “हमनें उनकी सिसकियां सुनी हैं. हम इस तरह उन्हें नहीं छोड़ सकते”

कपड़ों के टुकड़ो को जोड़कर अब उन्हें राहत और बचाव कार्य में इस्तेमाल किया जा रहा है. उनकी सहायता से लोगों को बाहर निकाला जा रहा है.

मोसामत खुर्शीदा ने समाचार एजेंसी एपी को बताया, “मेरे पति सुबह ही यहां काम करने आए हैं लेकिन वो हैं कहां पता नहीं चल रहा. वो फोन भी नहीं उठा रहे.”

मारे गए लोगों के सगे संबंधी शवों की पहचान कर रहे हैं.

स्थानीय अस्पताल के मुताबकि इस हादसे में 1000 लोग घायल हुए हैं.

जो लोग इसमें बच गए हैं उनका कहना है कि इमारत इतनी जल्दी गिरी कि किसी को भागने का मौका ही नहीं मिला.

एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना है, "यहां पर धूल का गुबार था. इसके बाद हम सीढ़ियों से नीचे की ओj भागे. थोड़ी देर बाद यहां पर पूरी तरह से अंधेरा छा गया.”

राष्ट्रीय अग्निशमक दल के प्रमुख अहमद अली ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि पूरी इमारत पैनकेक की तरह कुछ मिनट के अंदर ही धराशायी हो गई. वहां काम रहे लोगों के पास भागने का भी मौका नहीं था.”

नीतियां जिम्मेदार

इससे पहले पिछले साल नवंबर में भी ढाका के ताजरीन इलाके में एक कपड़ा फैक्टरी में आग लग गई थी. इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा था.

Image caption जो लोग बच गए हैं उन्हें कपड़ों की रस्सी बनाकर बाहर निकाला जा रहा है

न्यूयॉर्क में रहने वाले एडवर्ड हर्टत्ज्मान नाम के एक टेक्सटाइल ब्रोकर का कहना है कि बांग्लादेश में काम की खराब परिस्थितियों के लिए अमरीकी व्यापारियों की कीतम कम रखने की नीतियां भी जिम्मेदार हैं.

वो कहते हैं, “बांग्लादेश में काम करने की परिस्थितियाँ बहुत खराब हैं. इसको प्रतिस्पर्धी बनाने का एक ही तरीका है कि इसे कम से कम लागत तो दी ही जाए”

उनका कहना है कि अगर फैक्टरी वाले कीमत बढ़ाने की मांग करते हैं तो पश्चमी देशों के व्यापारी चीन, कंबोडिया और पाकिस्तान जाने की बत करने लगते हैं.

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