बच्चों को ज्यादा प्रोटेक्ट करना कितना सही?

Image caption ज़्यादातर बच्चे घर में ही सताए जाते हैं

एक अध्य्यन में सामने आया है कि जिन बच्चों को उनके माता-पिता ज़रूरत से ज़्यादा सुरक्षित माहौल में रखते हैं, उन पर दूसरे बच्चे ज़्यादा धौंस जमाते हैं.

करीब दो लाख बच्चों पर किए गए एक अध्ययन का निष्कर्ष ये निकल कर आया कि मां-बाप नकारात्मक अनुभवों से अपने बच्चों को बचाने के चक्कर में उन्हें और कमज़ोर बना देते हैं.

हालांकि इस अध्ययन में ये भी पाया गया कि नकारात्मक या कड़ा रुख रखने वाले माता-पिता के बच्चों पर दूसरे लोग सबसे ज़्यादा धौंस जमाते हैं.

प्रोफेसर डिटर वोक ने कहा कि अध्ययन के दौरान सभी ने स्कूलों का रुख किया, लेकिन दिलचस्प बात ये है कि ज़्यादातर बच्चों को उनके घर में ही सताया जाता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक से जुड़े मनोविज्ञान के प्रोफेसर का कहना था कि उन्हें लगा था कि केवल सख्त रवैया रखने वाले माता-पिता के बच्चों को सताया जाता है, लेकिन उम्मीद से परे उन्होंने पाया कि बच्चों को ज़रूरत से ज़्यादा प्यार करने वाले माता-पिता के बच्चे भी बुरे रवैये के शिकार होते हैं.

कमज़ोर आत्मविश्वास

उनका कहना था, “हालांकि मां-बाप का दखल, समर्थन और निरीक्षण से बच्चों को सताए जाने की संभावना कम हो जाती है, लेकिन मां-बाप के अत्यंत रक्षात्मक रवैये से उनके बच्चे दूसरे लोगों की धौंस का शिकार हो जाते हैं. ये सही है कि बच्चों को उनके मां-बाप से समर्थन की ज़रूरत होती है, लेकिन कुछ मां-बाप ज़्यादा ही रक्षात्मक हो जाते हैं. ऐसे में बच्चे दबंगईयों से निपटने का आत्मविश्वास खुद नहीं खोज पाते.”

इस अध्ययन में छह महीने की अवधि के बीच बच्चों पर निगरानी रखी गई.

प्रोफेसर डिटर वोक का कहना था कि 'दबंग' किस्म के लोग कमज़ोर दिखने वाले बच्चों को निशाना बनाते हैं और ज़्यादातर उन बच्चों पर नकेल कसते हैं जो उन्हें देख कर रोना या भागना शुरू कर देते हैं.

ये लोग एक बार अपने निशाने की पहचान कर लेते हैं, वे उन्हें लगातार परेशान करना शुरू कर देते हैं.

इस अध्ययन में कई यूरोपीय देशों और अमरीका के बच्चों पर निगरानी रखी गई और पाया गया कि जिन बच्चों के भाई-बहन दबंगई किस्म के होते हैं, वे दूसरों के लिए भी आसान निशाना बन जाते हैं.

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