पांच दिन बाद मलबे से निकले नौ ज़िंदा लोग

  • 28 अप्रैल 2013
बांग्लादेश
Image caption हादसे में मारे गए लोगों की तादाद का कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है.

बांग्लादेश में एक बहुमंजिला इमारत के ढहने से हुए हादसे में बचाव कार्य की देख-रेख कर रहे सेना प्रमुख इस पर विचार कर रहे हैं कि मलबे में दबे लोगों की खोज जारी रहे या फिर बड़ी मशीनों की मदद से इस मलबे को हटा दिया जाए.

इस इमारत में कपड़े की फैक्ट्री चलाई जा रही थी. रविवार को इस मलबे से नौ अन्य लोगों को ज़िंदा निकाला गया है. मलबे में जीवित लोगों के लिए पानी की बोतलें डाली जा रही हैं.

हालांकि लापता लोगों के रिश्तेदारों ने बचावकर्मियों से हताहत लोगों की तलाश जारी रखने की गुज़ारिश की है. मलबे से हताहत लोगों को निकालते हुए पांच दिन हो चुके हैं.

घटनास्थल पर मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ढही इमारत के अंदर दबे लोगों के शव से काफी बदबू आ रही है और इस वजह से कई राहतकर्मी भी बीमार पड़ गए हैं.

इस घटना में अब तक तकरीबन 350 से ज्यादा लोगों के मारे जाने और करीब 2400 लोगों को जिंदा निकाले जाने की ख़बर है.

उम्मीदें बरकरार

बचाव टीम को अब भी उम्मीद है कि मलबे में कुछ जीवित लोग हो सकते हैं. आपातकाल सेवाएं भी इस बात पर विचार कर रही हैं कि जिंदा लोगों को बचाने के लिए कितने समय तक बचावकार्य जारी रखा जा सकता है.

शनिवार को 29 लोगों को जिंदा निकाला गया था और हादसे के सिलसिले में दो इंजीनियरों और तीन दूसरे लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

इन इंजीनियरों ने हादसा होने के एक दिन पहले ही कथित तौर पर इमारत की सुरक्षा जांच पर मुहर लगाई थी.

पुलिस का कहना है कि उन्होंने घटना से पहले मंगलवार को इमारत में दरार दिखने पर उसे खाली करने का आदेश दिया था लेकिन फैक्ट्री ने उनके आदेशों को नज़रअंदाज किया और अगले दिन भी काम जारी रखा.

राजनीतिक संबंध

कपड़े की पांच फैक्ट्री में से तीन के मालिकों को भी तब गिरफ्तार कर लिया गया जब प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस घटना के जिम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाने का फैसला किया.

इस कॉम्प्लेक्स के मालिक सोहेल राणा कथित तौर पर संभवतः अवामी लीग की युवा इकाई के एक नेता माने जाते हैं और वह लापता हैं. पुलिस ने उन पर दबाव बनाने के लिए उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया है.

एक मंत्री ने आरोप लगाया है कि राणा प्लाज़ा नाम की यह इमारत बिना किसी इजाज़त के बनाई गई.

फायर सर्विस के एक उप निदेशक अकरम हुसैन का कहना है कि लापता लोगों की तादाद से जुड़ा कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है और लोगों के ज़िंदा होने की संभावना कम है.

फायर सर्विस के परिचालन प्रमुख महबूबुर रहमान का कहना है कि आपातकर्मियों के लिए बचाव कार्य अब मुश्किल होता जा रहा है.

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