इराक में अल-जज़ीरा समेत 10 टीवी चैनलों पर प्रतिबंध

  • 28 अप्रैल 2013
Image caption इराक में सरकार विरोधी सुन्नी प्रदर्शनों में तेजी आ गई है.

इराक में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने पर सरकार ने दस टीवी चैनलों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं.

अल-जज़ीरा टीवी और शर्किया भी उन चैनलों में शामिल हैं जिन पर “हिंसा को भड़काने” का आरोप लगाया गया है.

पूरे देश में इनके काम करने पर पाबंदी लगा दी गई है.

इराक में एक हफ़्ते से भी कम समय में 170 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

प्रधानमंत्री नौरी मालिकि इराक में एक “सांप्रदायिक लहर” की बात करते हैं जो बाहर से आई है.

गलत सूचनाएं

मंगलवार को एक सुन्नी विरोध शिविर पर सेना की छापेमारी के बाद बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू हो गया.

उत्तरी इराक में किर्कुक के नज़दीक हविजा कस्बे में सेना की छापेमारी में बीस से ज़्यादा लोग मारे गए थे जिसके विरोध में सुन्नी मंत्रियों ने इस्तीफ़े दे दिए थे.

इसके बाद उत्तरी इराक के कस्बों और शहरों के अलावा पश्चिमी इराक के रमाडी और फालुजा में प्रदर्शन शुरू हो गए.

प्रदर्शनकारी शिया-नेतृत्व वाली सरकार पर सुन्नियों से भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं और प्रधानमंत्री मालिकि के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

इराक के संचार और मीडिया आयोग ने एक बयान मं कहा, “सेटेलाइट चैनल घटनाओं को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करते हैं, गलत सूचनाएं देते हैं और कानून तोड़ने और इराकी सुरक्षा कर्मियों पर हमले के लिए कहते हैं.”

मीडिया पर निगरानी रखने वाले आयोग ने टीवी कवरेज में सांप्रदायिक लहजे का आरोप लगाया, “अनुशासनहीन मीडिया के फैलाए संदेशों ने सभी जायज़ सीमाएं लांघ दीं और जिससे लोकतांत्रिक प्रकिया पर ख़तरा पैदा हो गया.”

बीबीसी के बग़दाद संवाददाता राफ़िद जबूरी कहते हैं कि 10 में ज़्यादातर चैनलों के मालिक सुन्नी हैं और कतर में स्थित अल-जज़ीरा के अरबी चैनलों को सुन्नियों के प्रति नरम माना जाता है.

अल-जज़ीरा के बगदाद ब्यूरो प्रमुख उमर अबुल-इलाह ने बीबीसी समाचार को कहा कि अभी तक यह साफ़ नहीं है क्या चैनल के अंग्रेजी-भाषा के प्रसारणों पर भी रोक लगाई गई है या नहीं.

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