एक संन्यासिन की सुरमयी जीवन यात्रा

आनी छोयिंग डोल्मा
Image caption आनी छोयिंग डोल्मा की गायकी अब दुनिया भर में मशहूर है.

आनी छोयिंग डोल्मा ने तेरह बरस की उम्र में संन्यासिन बनने का फ़ैसला कर लिया. अपने गुस्सैल पिता की मार और ग़रीबी से बचने का उन्हें ये सबसे आसान रास्ता नज़र आया.

लेकिन उन्हें तब शायद से पता नहीं था कि इस रास्ते पर चलते हुए वो एक दिन अपनी आवाज़ की आध्यात्मिक को पा लेंगी और इसके ज़रिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति हासिल होगी.

डोल्मा काठमांडू के पास आर्यतारा स्कूल चलाती हैं जहाँ दूर दराज से आई छोटी बच्चियों को शिक्षा दी जाती है. उन्होंने दुनिया के नामी-गिरामी संगीतज्ञों के साथ 20 से ज़्यादा शहरों में अपने संगीत के सुर बिखेरे हैं.

आप डोल्मा की आध्यात्मिक और संगीतमय जीवन यात्रा देखिएगा ईटीवी नेटवर्क पर बीबीसी हिंदी के टीवी कार्यक्रम ग्लोबल इंडिया में.

शुक्रवार - शाम 6 बजे ईटीवी राजस्थान और ईटीवी उर्दू पर और शाम 8 बजे ईटीवी यूपी, ईटीवी एमपी, ईटीवी बिहार पर

शनिवार – पुन: प्रसारण – रात आठ बजे– ईटीवी उर्दू

शनिवार – पुन: प्रसारण – रात साढ़े आठ बजे– ईटीवी राजस्थान पर

शनिवार – पुन: प्रसारण – रात साढ़े नौ बजे - ईटीवी यूपी, ईटीवी एमपी और ईटीवी बिहार पर

रविवार – पुन: प्रसारण – सुबह 11.00 बजे – ईटीवी यूपी, ईटीवी एमपी, ईटीवी राजस्थान और ईटीवी बिहार पर

रविवार – पुन: प्रसारण – दोपहर 1 बजे – ईटीवी उर्दू