32 मज़दूर और 1300 करोड़ का हर्जाना

मानसिक अक्षम
Image caption एक विशेषज्ञ ने कहा कि मजदूरों के गुलामों की तरह रखा जाता है

अमरीका की एक जूरी ने मानसिक तौर पर अक्षम 32 मज़दूरों को 24 करोड़ डॉलर यानी लगभग 1300 करोड़ रुपए का मुआवजा दिलाया है. इस तरह प्रत्येक के हिस्से में करीब 40 करोड़ रुपए आएंगे.

ये मामला आयोवा प्रांत की एक टर्की प्रोसेसिंग कंपनी से जुड़ा है जहां इन मज़दूरों को कई सालों तक प्रताड़ित किया गया.

डेवनपोर्ट की जूरी में बताया गया कि किस तरह हेनरीज टर्की सर्विस में मानसिक रूप से अक्षम मज़दूरों के साथ दुर्व्यवहार किया गया. उन्हें लात मारी जाती थी, गालियां दी जाती थी और यहां तक कि उन्हें ब्रेक नहीं दिया जाता था.

उन्हें हर महीने केवल 65 डॉलर दिए जाते थे. एक विशेषज्ञ ने कहा कि इन मज़दूरों को ग़ुलामों की तरह रखा जाता था.

इससे पहले 2012 में एक अदालत ने इन मज़दूरों को 13 लाख डॉलर यानी लगभग सात करोड़ रूपए का बकाया वेतन दिलाया था.

जूरी ने कहा कि अब खस्ताहाल हो चुकी हेनरीज टर्की सर्विस ने डिसएबिलिटीज़ ऐक्ट का उल्लंघन किया था.

उल्लंघन

जूरी ने कहा कि ये मज़दूर 1970 के दशक से वेस्ट लिबर्टी प्लांट में काम कर रहे थे और वहां की परिस्थितियां और माहौल नियमों के अनुकूल नहीं था.

अधिकारियों ने कहा कि मुआवजे की राशि को कर्ज में डूबी इस कंपनी की बची खुची संपत्तियों को बेचकर वसूल किया जाएगा.

समान रोजगार अवसर आयोग (ईईओसी) ने हेनरीज टर्की सर्विस के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी. ईईओसी के वकील रॉबर्ट केनिनो ने कहा, “मेरे लिए ये बेहद भावनात्मक मुद्दा था क्योंकि ये कमजोर लोगों के शोषण से जुड़ा मामला था.”

मामला वर्ष 2009 में सार्वजनिक हुआ था, जब एक मज़दूर के किसी रिश्तेदार ने संबंधित विभाग को इसकी जानकारी दी थी.

आयोवा के अधिकारियों ने पाया कि वेस्ट लिबर्टी प्लांट की इमारत खस्ताहाल हो चुकी थी और वहां चारों तरफ चूहों का साम्राज्य था. साथ ही इमारत में आग लगने का खतरा था. बाद में इमारत को बंद कर दिया गया था.

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