कैंसर से पीड़ित थे चिली के कवि पाब्लो नेरुदा

Image caption पाब्लो नेरुदा की मौत जनरल पिनोशे की अगुवाई में तख्तापलट के महज 12 दिन बाद हो गई थी

चीली के फोरेंसिक विशेषज्ञों ने कहा है कि नोबेल पुरस्कार विजेता कवि पाब्लो नेरुदा के मृत शरीर के आरंभिक परीक्षण से इस बात की पुष्टि होती है कि मृत्यु के समय वह कैंसर से पीड़ित थे.

वामपंथी विचारों वाले इस कवि की मौत 1973 में सैन्य तख्तापलट के ठीक बाद हो गई थी. इस तख्तापलट के बाद जनरल आगस्टो पिनोशे को हाथ में सत्ता आ गई थी.

पिछले महीने नेरुदा की कब्र को खोदकर उनका शव निकाला गया था, ताकि इन आरोपों की जाँच की जा सके कि उन्हें गुप्त एजेंटों ने जहर दिया था.

ऐसा माना जाता था कि उनकी मौत प्रोस्टेट कैंसर से हुई थी.

जाँच के नतीजे

जाँच से पता चला है कि उनका कैंसर काफी बढ़ चुका था और यह उस आधिकारिक बयान के मुताबिक है, जिसमें कहा गया था कि उनकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी.

चीली की कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से इस मामले को देख रहे वकील एडुआर्डो कॉन्ट्रेराज़ ने कहा है कि अभी किसी नतीजे पर पहुँचना काफी जल्दबाजी होगा.

उन्होंने बताया कि अमरीका की एक प्रयोगशाला में टॉक्सिकोलॉजी परीक्षण से नतीजों का पता चलेगा.

कॉन्ट्रेराज ने कहा कि, “इसमें कोई नई बात नहीं है कि श्री नेरुदा को कैंसर था. इसलिए यह तर्कसंगत है कि उनकी हड्डियों के एक्स-रे में कैंसर दिखेगा.”

सल्वाडोर से दोस्ती

नेरुदा चीली के परास्त राष्ट्रपति सल्वाडोर एलेंडे के तगड़े दोस्त थे. उनकी मौत जनरल पिनोशे की अगुवाई में तख्तापलट के महज 12 दिन बाद हो गई थी.

उनके एक करीबी मित्र ने कहा था कि इस वामपंथी कवि को जनरल पिनोशे के आदेश पर जहरीला इंनजेक्शन दिया गया था, लेकिन उनके परिवार ने माना कि मृत्यु का कारण कैंसर था.

नेरुदा को सेंटियागो से 120 किलोमीटर पश्चिम में इस्ला नेग्रा स्थित उनके घर के बागीचे में उनकी पत्नी के बगल में दफना दिया गया था.

चीली ने 2011 में उनके ड्राइवर और निजी सहायक मैनुएल अराया के उन आरोपों की जाँच शुरू की, जिसमें उन्होंने कहा था कि नेरुदा को जहर दिया गया था.

अराया ने कहा कि नेरुदा ने उन्हें अस्पताल में बुलाया और कहा कि उनके पेट में एक इनजेक्शन लगाने के बाद से वह बीमार महसूस कर रहे हैं.

इस आरोप का साथ चिली की कम्युनिस्ट पार्टी ने दिया और कहा कि नेरुदा में ऐसे कोई भी संकेत नहीं मिले थे, जिससे पता चले कि उनका कैंसर इतना घातक हो चुका है कि उनकी मौत हो जाए.

उन्होंने कहा कि सैन्य शासन को डर था कि नेरुदा निर्वासित होकर मैक्सिको जा सकते हैं और पिनोशे के शासन के खिलाफ अभियान चला सकते हैं.

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