खुर्शीद पर क्यों मेहरबान है चीनी मीडिया?

  • 10 मई 2013
Image caption सलमान खुर्शीद, भारतीय विदेश मंत्री

भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की चीन यात्रा को वहां का सरकारी मीडिया काफ़ी सकारात्मक कवरेज दे रहा है. ज़्यादातर अख़बार भारत-चीन सीमा पर चल रहे तनाव के सुलझने की तुलना जापान के साथ इलाकाई विवाद के अटके होने से कर रहे हैं, जो फिर से उठ खड़ा हुआ है.

'चीनी घुसपैठ' पर खुर्शीद ने नहीं की बात

चीन के पीपल्स डेली के वैश्विक संस्करण और अन्य समाचार माध्यमों में टिप्पणीकार हालिया विवाद को लेकर भारत सरकार पर उंगली उठाने से बच रहे हैं.

इसके बजाय भारतीय सेना, मीडिया और विपक्ष पर सस्ती लोकप्रियता के लिए 'चीनी सेना के आतंक' का ढोल पीटने का आरोप लगाया गया है.

चीन अपने सैनिकों द्वारा सीमा के अतिक्रमण के आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है.

सलमान खुर्शीद की यात्रा से पहले चीनी मीडिया की सकारात्मक कवरेज को उसके अन्य पड़ोसियों के साथ अनसुलझे इलाकाई विवाद के संदर्भ में भी देखा जा सकता है.

"भारत से सीखे जापान"

हाल के दिनों में चीन के सरकारी अख़बार जापान के उप प्रधानमंत्री टारो असो की हालिया भारत यात्रा को लेकर नकारात्मक ख़बरें प्रकाशित कर रहे हैं.

कुछ टिप्पणीकारों का मानना है कि जापान भारत का विश्वास जीतकर चीन के साथ हाई-स्पीड रेलवे नेटवर्क सौदों में मुकाबला करना चाहता है.

एक दिन पहले ही चीन की सामाजिक विज्ञान अकादमी के दो इतिहासकारों का पीपल्स डेली में लेख छपा है.

लेख में कहा गया है कि दक्षिण चीन सागर में स्थित विवादित दियाओयू (सेनकाकू) द्वीप जापान की रयुक्यु द्वीप श्रृंखला का हिस्सा नहीं हैं.

एक दिन पहले ही चीन के विदेश मंत्री ने इस राय का समर्थन किया था.

चीनी इतिहासकारों का यह भी कहना है कि जापान का रयुक्यु पर आधिपत्य पर भी 'पुनर्विचार' किया जा सकता है. ओकिनावा भी इसीका हिस्सा है.

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अख़बार पीपल्स डेली में जापान को लेकर कहा गया है कि "कुछ देश मतभेद के बीज बो रहे हैं."

भारत के सब्र की तारीफ

Image caption पूर्वी चीन सागर में जापान के तटरक्षक जहाज़ के समक्ष खड़ा चीन का निगरानी जहाज़

इस लेख की हेडलाइन है,"चीन और भारत ने संवेदनशील मुद्दों को बहुत समझदारी और सही ढंग से सुलझाया."

अख़बार के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर टिप्पणीकार मु योंगपेंग लिखते हैं,"खुर्शीद की यात्रा के कई मुद्दों के अलावा एक बात तो साफ़ है कि चीन-भारत के संबंध उल्लेखनीय स्थायित्व तक पहुंच चुके हैं और भारत चीन के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है."

ग्लोबल टाइम्स अपने संपादकीय में नई दिल्ली और बीजिंग की तरफ से हालिया तनाव के दौरान दिखाए गए सब्र की तारीफ़ करता है.

संपादकीय में आगे कहा गया है कि भारत के सब्र के विपरीत जापान रोज़ ही चीन को उकसा रहा है.

फ़िलीपीन्स और वियतनाम भी इलाकाई विवाद को लेकर अपेक्षाकृत शांत हैं.

अख़बार लिखता है,"हाल ही में भारत और चीन की सेनाएं सीमा पर आमने-सामने टैंट लगाकर खड़ी थीं. हालांकि दोनों देशों की सरकारों ने तमाम दबावों के बावजूद एक दूसरे के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहा. लेकिन पूर्वी दिशा में चीन और जापान जरा से दियाओयू (सेनकाकू) द्वीप को लेकर उलझे हुए हैं और जापान के वरिष्ठ नेता चीन के ख़िलाफ़ लगभग रोज़ ही आग उगल रहे हैं. यकीनन दोनों के बीच ज़मीन-आसमान का अंतर है."

ताकि चीन न घिरे

खुर्शीद के चीन पहुंचने के पहले चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग की भाषा भी सकारात्मक नज़र आई.

उन्होंने कहा,"हमें यकीन है कि चीन और भारत इतने समझदार और समर्थ हैं कि वर्तमान मतभेदों और समस्याओं को दूर कर दोनों देशों के बीच दोस्ताना सहयोग को मजबूत करेंगे."

हुआ कहती हैं, "भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों पक्षों के साझा हितों के लिए बेहतर है. चीन सीमा के मसले के निष्पक्ष, उचित और दोनों को स्वीकार्य समाधान के लिए भारत के साथ जल्द से जल्द बात करने को तैयार है."

सरकारी समर्थन वाली चाइना रिव्यू न्यूज़ वेबसाइट के मुताबिक़,"भारतीय विदेश मंत्री की चीन यात्रा दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा पर विचारों के आदान-प्रदान और समझ विकसित करने के लिए एक अच्छा मौका है. हालांकि चीन ने अपनी सीमाओं को लेकर सख्त रवैया दिखाया है फिर भी चीन हिंद महासागर में भारत के प्रभुत्व को चुनौती नहीं देना चाहता."

सैन्य मामलों पर टिप्पणीकार चेन गुआनग्वेन चाइना डॉट काम से कहते हैं, "चीन-भारत सीमा मसले का शांतिपूर्ण समाधान प्रभावशाली वार्ता, स्पष्ट संवाद का ही फल है. दोनों देशों के बीच लगातार आवाजाही इस बात की साक्षी बनेगी कि हालिया सीमा विवाद दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित नहीं करेगा."

फ़ीनिक्स टीवी की प्रस्तोता लु निंग्सी कहती हैं, "हुआ के शब्दों और भाव को देखकर हम कह सकते हैं कि चीन भारत को अपनी सद्भावना व्यक्त कर रहा है. चीन का सबसे पहला लक्ष्य तो भारत को जापान से अलग रखना है ताकि उसे घेरा न जा सके."

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