नवाज़ सरकार से अमरीका-पाक संबंधों पर असर: न्यूयॉर्क टाइम्स

अमरीका विरोध पाकिस्तान
Image caption नवाज़ शरीफ़ ने तालिबान के ख़िलाफ़ अमरीका की जंग को बंद करने की बात कही है.

पाकिस्तान में 11 मई को हुए मतदान से जुड़ी ख़बरें दुनिया भर के अख़बारों में पहले पन्ने पर छाई हुई हैंऔर सभी ने उस पर अपने अपने अंदाज़ में प्रतिक्रिया दी है.

पाकिस्तान चुनाव पर बीबीसी लाइव टेक्सट

ब्रितानी समाचारपत्र

ब्रितानी समाचारपत्र गार्डियन ने चुनावों को ऐतिहासिक कहा है क्योंकि पहली बार एक लोकतांत्रिक सरकार जनता के ज़रिए चुनी गई दूसरी हुकूमत को मुल्क की बागडोर सौंपेगी.

अख़बार का कहना है कि ये ऐतेहासिक इसलिए भी है क्योंकि चार दशकों में पहली बार कोई 'तीसरी शक्ति' यानी पाकिस्तान तहरीके इंसाफ़ उभर कर सामने आई है.

गार्डियन के मुताबिक़ तहरीके इंसाफ़ की राजनीति दो मायनों में अलग रही है: उसने किसी तरह की सौदेबाज़ी करने से परहेज़ किया है और पढ़े-लिखे युवा तबक़े तक अपनी पहुंच बनाई है.

'टेलिग्राफ़' कहता है कि नवाज़ शरीफ़ ने पश्चिमी मुल्कों को यक़ीन दिलाने की कोशिश की है कि वो अल-क़ायदा और तालिबान के ख़िलाफ़ जंग से पीछे नहीं हटेंगे.

समाचारपत्र के मुताबिक़ नवाज़ शरीफ़ ने संडे टेलीग्राफ़ से बात करते हुए कहा, "मुझे अमरीका के साथ काम करने का तजुर्बा है और मुझे उनके साथ आगे काम करने में भी खुशी होगी."

उन्होंने कहा, "जो चीज़ सबसे अहम है वो यह कि हम अपनी सरज़मीन को दुनियां के किसी मुल्क के ख़िलाफ़ इस्तेमाल न होने दें."

अमरीकी अख़बार

'यूएसए टुडे' ने लिखा है कि फ़ौज के हाथों सत्ता पलट और सात साल निर्वासन में बिताने, और इमरान ख़ान की तरफ़ से जबर्दस्त मुक़ाबले के बावजूद नवाज़ शरीफ़ की जीत बहुत प्रभावी है.

अख़बार ने इस बात की सराहना की है कि औरतों ने बड़े पैमाने पर अपने हक़ का इस्तेमाल किया जबकि कट्टरपंथियों ने उन्हें वोट न करने की धमकी दी थीं.

प्रतिष्ठित समाचारपत्र 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने कहा है कि ये बहुत प्रभावी है कि तालिबान की चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशों को नज़रअंदाज़ करते हुए 60 फ़ीसद मतदाता वोट डाले के लिए निकले.

'न्यूयार्क टाइम्स' के संवाददाता डेक्लिन वाल्श ने लिखा है कि नवाज़ शरीफ़ ने वादा किया है कि वो पाकिस्तान में अमरीका के प्रभाव को कम करेंगे.

उनका कहना है कि इससे अमरीका के पाकिस्तान के साथ पहले से ही तनावपूर्ण हो चुके रिश्तों पर और सवाल खड़े हो जाएँगे.

डेक्लिन वाल्श को पाकिस्तान ने 'नापसंदीदा कारगुज़ारियों' के चलते मुल्क से बाहर जाने का हुक्म दिया था.

(आज के रेडियो कार्यक्रम दिनभर में बीबीसी हिंदी पर आप पाकिस्तान चुनाव से जुड़ा विश्लेषण, विशेषज्ञों की राय, भारत से रिश्तों पर होने वाले असर और पाकिस्तान में बने राजनीतिक समीकरण पर विशेष रिपोर्ट सुन करेंगे)

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