कौन हैं ये दक्षिण अफ़्रीका के गुप्ता जी?

  • 15 मई 2013
गुप्ता परिवार
Image caption क्या गुप्ता परिवार राष्ट्रपति ज़ूमा के बहुत ज़्यादा नज़दीक है?

वर्ष 1993 में अजय, अतुल और राजेश गुप्ता ने भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले से दक्षिण अफ्रीका का रुख किया.

ये वो वक्त था जब दक्षिण अफ्रीका से अल्पसंख्यक गोरों का शासन खत्म हो रहा था और ये देश दुनिया के लिए अपने दरवाज़े खोल रहा था.

गुप्ता परिवार के प्रवक्ता हरनाथ घोष ने बीबीसी को ईमेल पर दिए जवाब में बताया कि पिता शिव कुमार गुप्ता मानते थे कि दक्षिण अफ्रीका दुनिया के अगुवा देशों में आने वाला है, वहाँ ढेर सारे मौके हैं, इसलिए उन्होंने अपने पुत्र अतुल को दक्षिण अफ्रीका भेजने का निर्णय किया.

कहा जाता है कि जब अतुल दक्षिण अफ्रीका आए तो उन्हें इस बात पर बहुत आश्चर्य हुआ कि भारत के मुकाबले यहाँ दफ़्तरशाही काफ़ी कम है. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में पारिवारिक उद्योग सहारा कंप्यूटर्स की शुरुआत की. कंपनी का काम था कंप्यूटर हार्डवेयर बेचना.

हेलिकॉप्टर पैड

भारत में वो एक छोटे उद्योग के मालिक थे लेकिन अब उनके व्यापार की वार्षिक बिक्री करीब 22 मिलियन अमरीका डॉलर (200 मिलियन रैंड) की है. उनकी कंपनी में करीब 10,000 लोग काम करते हैं.

यहाँ ये बताना ज़रूरी है कि उनकी कंपनी सहारा कंप्यूटर्स का भारतीय कंपनी सहारा ग्रुप से कोई ताल्लुक नहीं है.

कंप्यूटर के अलावा खनन, हवाई यात्रा, ईंधन, तकनीक और मीडिया जैसे दूसरे क्षेत्रों में भी गुप्ता परिवार का दखल है.

अतुल गुप्ता बताते हैं कि 10 साल पहले उनकी मुलाकात राष्ट्रपति ज़ूमा से उस वक्त हुई हुई जब ज़ूमा सहारा के एक वार्षिक समारोह में हिस्सा लेने आए हुए थे.

दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े शहर जोहनेसबर्ग के अमीर मोहल्ले सैक्सनवोल्ड इलाके में स्थित सहारा इस्टेट के चारों ओर कड़ा पहरा रहता है.

इस घर की कीमत करीब 3.7 मिलियन अमरीकी डॉलर (52 मिलियन रैंड) आंकी गई है. इस विशाल कांप्लेक्स में एक हेलिपैड भी है. परिवार के लिए पाँच निजी रसोइयों की एक टीम है और सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड.

गुप्ता परिवार केपटाउन स्थित पूर्व ब्रितानी प्रधानमंत्री मार्ग्रेट थैचर के पति सर मार्क थैचर के घर का भी मालिक है.

दक्षिण अफ्रीका के मेल एंड गार्डियन अख़बार ने जब परिवार के एक दूसरे प्रवक्ता गैरी नायडू से जब पूछा कि परिवार की कुल संपत्ति कितनी होगी, तो उन्होंने जवाब दिया, “हम आदरपूर्व इस सवाल का जवाब देने से मना करते हैं. एक निजी कंपनी के तौर पर हमारी कार्यनीति बेहद गोपनीय है क्योंकि हम ऐसे उद्योगों में काम करते हैं जहाँ मुनाफ़ा बहुत ज़्यादा नहीं होता.”

पुलिस बंदोबस्त

2010 के फ़ीफा विश्वकप की तरह जिस बात ने ने सभी दक्षिण अफ्रीकियों को एकमत किया है वो है गुप्ता परिवार के विमान को प्रिटोरिया के नज़दीक वॉटरक्लूफ़ एअर बेस में उतरने देने की कड़ी आलोचना.

शासन करने वाली अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (एएनसी) पार्टी और विपक्षी डेमोक्रेटिक अलायंस भी इस बात पर एकमत थे कि गुप्ता परिवार ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया और ये इसलिए संभव हो पाया क्योंकि इस परिवार के दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के परिवार से मधुर संबंध हैं.

Image caption गुप्ता परिवार में हुई शानदार शादी के कारण उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है

एक वक्तव्य में एएनसी ने मांग रखी कि जिस किसी ने भी गैरकानूनी तरीके से इस विमान को दक्षिण अफ्रीका आने की इजाज़त दी हो, उसके खिलाफ़ सख्त कार्रवाई हो.

उधर गुप्ता परिवार ने इनकार किया कि उन्होंने कोई भी गलत काम किया है.

एक वक्तव्य में अतुल गुप्ता ने कहा, “जो कुछ हुआ उसे देखते हुए हम सभी से आम माफ़ी मांगना चाहेंगे, चाहे वो दक्षिण अफ्रीका की सरकार हो, भारतीय सरकार हो, स्थानीय प्रशासन हो, आम दक्षिण अफ़्रीकी नागरिक हो या फिर हमारे मेहमान.”

अतुल गुप्ता ने कहा कि वो दक्षिण अफ़्रीका की ज़मीन पर अपनी बेटी को यादगार शादी का तोहफ़ा देने की कोशिश कर रहे थे.

ये शादी थी अतुल गुप्ता की बहन अचला की बेटी वेगा गुप्ता की. वेगा की शादी दिल्ली के 24-वर्षीय कारोबारी आकाश जहायगढ़िया से हुई थी.

इस शादी में 200 अतिथियों को आरामदायक गाड़ियों के काफ़िले में सन सिटी हॉलीडे रिज़ार्ट ले जाया गया था. उनके साथ पुलिस का एक दस्ता भी चल रहा था.

तो किस बात ने गुप्ता परिवार को इतना भरोसा दिया जिसके कारण उन्होंने एक ए330 एअरबस को वायु सेना बेस पर लाने की सोची?

दरअसल ये बेस सामान्य रूप से विदेशी कूटनीतिज्ञों के लिए आरक्षित होता है.

कुछ लोगों का मानना है कि राष्ट्रपति ज़ूमा की पत्नियों में से एक बांगी न्गेमा-ज़ूमा गुप्ता परिवार के लिए काम करती हैं और परिवार ने बांगी को प्रिटोरिया स्थित शानदार घर के लिए 417,000 अमरीकी डॉलर दिए थे. गुप्ता परिवार इस बात से इनकार करता है.

ज़ूमा का एक लड़का दुदुज़ेन गुप्ता परिवार की कुछ कंपनियों में डॉयरेक्टर है.

राष्ट्रपति ज़ूमा की बेटी दुदुज़िले को वर्ष 2008 में सहारा कंप्यूटर्स के डायरेक्टर बनाया गया था लेकिन छह महीने बाद ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

दुदुज़िले की नियुक्ति ज़ूमा के राष्ट्रपति बनने के छह महीने बाद ही की गई थी.

‘शर्मनाक’

अख़बार संडे टाइम्स के मुताबिक गुप्ता परिवार ने मांग की थी कि उन्हें राजनयिक पासपोर्ट दिए जाएँ क्योंकि वो राष्ट्रपति ज़ूमा के साथ व्यापारिक यात्राओं पर जाते हैं और दक्षिण अफ्रीका का प्रचार करते हैं, लेकिन उनकी ये मांग ठुकरा दी गई.

दक्षिण अफ़्रीका के डिपार्टमेंट ऑफ़ इंटरनेशनल रिलेशंस एंड कोऑपरेशन ने इस कहानी से इनकार नहीं किया.

Image caption गुप्ता परिवार के मुताबिक वो दक्षिण अफ़्रीका की ज़मीन पर अपनी बेटी को यादगार शादी करवाना चाहते थे

गुप्ता परिवार ने ऐसी रिपोर्टों को परिवार को बदनाम करने की कोशिश करार दिया.

उधर कुछ लोगों का मानना है कि इस घटनाक्रम से राष्ट्रपति ज़ूमा और गुप्ता परिवार की नज़दीकियों पर असर नहीं पड़ा है.

संडे टाइम्स के राजनीतिक संपादक स्थेंबिसो म्सोमी ने बीबीसी को बताया, “राष्ट्रपति ज़ूमा शर्मिंदा हुए हैं लेकिन वो खुद को गुप्ता परिवार से दूर करने को तैयार नहीं हैं.”

अभी ये साफ़ नहीं है कि गुप्ता परिवार ने राष्ट्रपति के दल एएनसी को कितना चंदा दिया है क्योंकि दक्षिण अफ़्रीका में राजनीतिक चंदों के स्रोतों को ज़ाहिर करना ज़रूरी नहीं है.

गुप्ता परिवार ने राष्ट्रपति ज़ूमा से पहले पूर्व राष्ट्रपति थाबो म्बेकी को भी लुभाने की कोशिश की थी लेकिन दोनो के संबंध बहुत ज़्यादा नहीं चल सके.

विपक्षी नेता हेलेन ज़िले ने भी गुप्ता परिवार के घर में लज़ीज खानों का लुत्फ़ उठाया है और उनकी पार्टी डेमोक्रेटिक अलायंस को भी गुप्ता परिवार से चंदा मिला है.

एएनसी के सूत्रों के मुताबिक जब राष्ट्रपति ज़ूमा को हवाई जहाज़ के पहुँचने का पता चला तो वो बहुत नाराज़ हुए थे.

अब चूँकि दक्षिण अफ्रीका में चुनाव अगले एक साल में होने वाले हैं, माना जा रहा है कि ज़ूमा चंदे की परवाह किए बिना खुद को गुप्ता परिवार से दूर कर सकते हैं.

उन्हें पार्टी में अपने साथियों को इस बात का भरोसा दिलाना है कि ऐसा दोबारा नहीं होगा.

उन्हें अपने मतदाताओं को भी संदेश भेजना होगा कि वो भ्रष्टाचार के विरुद्ध हैं.

जैसा कि एक एएनसी प्रवक्ता जैक्सन म्थेंबू ने कड़े शब्दों में कहा, “दक्षिण अफ़्रीका बनाना रिपब्लिक नहीं है.”

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