इराक़ में सिलसिलेवार धमाकों में दर्जनों की मौत

iraq, इराक
Image caption पिछले कुछ हफ्तों में इराक में हिंसा की घटनाओं में काफी बढ़ोत्तरी हुई है.

दक्षिणी और मध्य इराक में सोमवार को हुए कार बम धमाकों में अब तक कम से कम 60 लोग मारे जा चुके हैं और कई अन्य घायल हुए हैं.

इन धमाकों से सबसे ज़्यादा बग़दाद प्रभावित हुआ है. बस स्टेशन और बाज़ार समेत बग़दाद में कुल नौ धमाके हुए हैं. धमाके मुख्यत: शिया बहुल जिलों में हुए हैं.

सोमवार सुबह दक्षिणी इराक़ के शहर बसरा में में दो बम धमाके हुए. समारा में हुए एक धमाके में तीन लोग मारे गए थे.

इन धमाकों को इराक़ में बढ़ते हुए राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव से जोड़कर देखा जा रहा हैं. पुलिस के अनुसार सोमवार को हुई हिंसा में करीब 200 लोग घायल हुए है. मरने वालों में आठ ईरानी तीर्थयात्री भी हैं.

उत्तरी इराक़ भी प्रभावित

उत्तरी इराक का शिया बहुल इलाका शाब भी इन धमाकों में बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इलाके के भीड़ भरे बाजार में हुए कार धमाके में कम से कम बारह लोग मारे गए और बीस से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.

शिया बहुल शहर बसरा में एक रेस्टोरेंट और बस स्टेशन के बाहर हुए धमाकों में कम से कम चौदह लोग मार गए हैं.

बगदाद से 113 किमी दूर स्थित समारा शहर में हुए धमाकों में तीन लोग मारे गए और पंद्रह लोग घायल हुए हैं. अब तक मिली खबरों के अनुसार यह धमाका सरकार समर्थक सुन्नी लड़ाकों के एक जमावड़े के पास हुआ था.

अब तक किसी भी समूह ने सोमवार को हुए धमाकों की जिम्मेदारी नहीं ली है. हालांकि बहुसंख्यक शिया और अल्पसंख्यक सुन्नी तबके के बीच पिछले साल से ही तनाव बढ़ता जा रहा है. शिया तबके का सरकार में वर्चस्व है.

'अनदेखी' का आरोप

Image caption इराक में हिंसा और बढ़ने की संभावना है.

सुन्नी प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नौरी अल—मलिकी पर सुन्नियों की अनदेखी का आरोप लगाया है. हालांकि सरकार ने इस आरोप से इनकार किया है.

बीबीसी के इराक संवाददाता अलीम मक़बूल के अनुसार ''पिछले कुछ हफ्तों में जिस तरह की हिंसा हुई है इराक में पिछले पाँच सालों में ऐसी हिंसा नहीं देखी गई.''

अप्रैल में सरकार विरोध कैम्प पर मारे गए छापे के दौरान अरब सुन्नियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ में पचास लोगों के मारे जाने के बाद से हिंसा की घटनाओं में काफी बढ़ोत्तरी हुई है.

हिंसा की बढ़ती हुई घटनाओं से इराक में 2006-2007 में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौर के वापसी की आशंका बढ़ गई है.

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