भारत के कमाऊ बेटे 'सरकार की बेरुख़ी से परेशान'

  • 1 जून 2013
सऊदी अरब में भारतीय कामगार
Image caption सऊदी अरब में लाखों भारतीय काम करते हैं

अरब देशों में लाखों भारतीय बरसों से काम करते चले आए हैं. इनमें सऊदी अरब में काम कर रहे भारतीयों की संख्या लगभग पच्चीस लाख है.

राष्ट्रीयता के हिसाब से भारतीय सऊदी अरब में प्रवासियों का सबसे बड़ा समूह है. भारतीयों की इतनी बड़ी संख्या शायद ही किसी अन्य देश में हो.

दूसरे देशों में काम कर रहे लोगों में भारतीय लोग अपने देश को पैसे भेजने में सबसे आगे माने जाते हैं. पिछले साल विदेशों में बसे भारतीयों ने अपनी कमाई का लगभग 70 अरब डॉलर भारत भेजा. इसमें से 20 अरब डॉलर अकेले सऊदी अरब में काम करने वाले भारतीय कामगारों की तरफ़ से आए.

विदेशों से आने वाली ये अच्छी ख़ासी नक़द रक़म बरसों से भारत की तरक़्क़ी में बहुत अहम भूमिका निभा रही है. आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों की अर्थव्यवस्था में नक़द राशि हासिल करने का ये एक बड़ा स्रोत है.

बदले हालात

अब सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है. स्थानीय लोग भी लिख पढ़ रहे हैं और काम करना चाहते हैं. स्थानीय अरब लोगों में बेरोज़गारी बढ़ रही है.

वहां ग़रीबी और बेरोज़गारी के कारण आत्महत्याएं बढ़ रही हैं. इसीलिए सऊदी सरकार अपने यहां काम करने वाले विदेशी कामगारों की संख्या घटाना चाहती है.

Image caption सऊदी अरब में बेरोजगारी बढ़ रही है

सऊदी सरकार एक नया क़ानून लागू करने जा रही है जिसके तहत सऊदी कंपनियों को विदेशी कर्मचारी भर्ती करने से पहले 10 प्रतिशत स्थानीय कर्मचारियों को नौकरी पर रखना होगा.

इस क़ानून के लागू होने से जिन विदेशी कामगारों को अपनी नौकरी से हाथ धोनी पड़ेगा, उन्हें तीन जुलाई तक नई नौकरी तलाशनी होगी वरना उन्हें सऊदी अरब छोड़ना होगा.

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सऊदी अरब में लाखों प्रवासी कामगार परमिट की अवधि ख़त्म होने के बाद भी कम पैसों पर काम कर रहे हैं. नया क़ानून लागू होने के बाद ऐसे लोगों को सऊदी अरब छोडऩा होगा.

आम माफ़ी स्कीम के लिए इन लोगों को आवेदन करना होगा. बड़ी संख्या में भारतीयों ने वापसी का आवेदन किया है लेकिन सऊदी अरब की सरकार अज्ञात कारणों से एक दिन में सिर्फ़ पांच सौ आवेदनों पर ही विचार कर रही है. ऐसे में बहुत सारे लोगों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है.

सरकार की ‘बेरुख़ी’

एक अनुमान के मुताबिक़ सऊदी अरब में मौजूद लगभग एक लाख भारतीय कामगारों को तीन जुलाई के बाद गिरफ़्तारी और भारी जुर्माना का सामना करना पड़ सकता है.

Image caption सऊदी अरब में घरेलू हालात मुश्किल हो रहे हैं

ये स्थिति अचानक पैदा नहीं हुई है. सऊदी सरकार ने अपनी योजना की घोषणा कई महीनों पहले कर दी थी. कई जानकार और पर्यवेक्षक भारत सरकार को इस बात से आगाह करते रहे हैं कि नए सऊदी क़ानून से बड़ी संख्या में भारतीय कामगार प्रभावित होंगे.

विश्लेषक सरकार को ख़बरदार करते रहे हैं कि वो वापस आने वाले कामगारों के पुर्नवास के लिए कोई योजना बनाए. लेकिन सरकार ख़ामोश बैठकर तमाशा देखती रही.

सरकार ने अपने कुछ मंत्रियों के सऊदी अरब भेजा था, लेकिन वो किस लिए गए थे और वहां से क्या हासिल करके आए हैं, वो सिर्फ़ वही जानते हैं.

सऊदी अरब में काम करने वाले भारतीय नागरिकों में इस वक़्त अफ़रातफ़री मची हुई है और भारतीय दूतावास मुश्किल में फंसे हुए अपने नागरिकों के साथ साम्राजी दौर के शासकों की तरह पेश आ रहा है.

सरकार की तरफ़ से बस इस तरह के बयान आ रहे हैं कि वो सऊदी अरब की सरकार के संपर्क में हैं.

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