हताश निराश नौजवानों का देश से ब्रेन ड्रेन

  • 8 जून 2013
Image caption यूरोप के आर्थिक संकट का ग्रीस पर बहुत असर पड़ा है.

ग्रीस की सरकार का कहना है कि कर्ज संकट का सबसे खराब दौर बीत चुका है और अब अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटेगी.

लेकिन लाखों बेरोजगारों के लिए सरकार की इन बातों पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा है.

यूरोजोन में ग्रीस बेरोजगारी के मामले में सबसे ऊपर है और अगर बात पच्चीस साल से कम उम्र के लोगों की करें तो हालात और भी खराब मालूम देते हैं.

परीक्षा की तैयारी में जुटे ग्रीस के युवकों की आंखों में एक स्थिर नौकरी और ऐसे भविष्य का सपना पल रहा है जहां अवसर ही अवसर हों.

लेकिन ग्रीस की स्थिति फिलहाल इसके उलट दिखाई पडती है. हर तरफ बेरोजगारी और अस्थिरता का आलम है.

ये छात्र तो बीजगणित के सवालों को जैसे तैसे हल कर ही लेंगे, लेकिन उस सवाल का हल मुश्किल दिखता है जो इस वक्त ग्रीस के सामने खड़ा है.

यूरोजोन का संकट

Image caption ग्रीस के नौजवानों को काम चाहिए और इसके लिए वे बाहर भी जाना चाहते हैं.

ग्रीस के एक युवक कहते हैं, "पक्का नहीं पता है कि ग्रीस का भविष्य क्या होगा. इतनी बेरोजगारी है, वेतन भी अच्छा नहीं है. अवसर भी नहीं हैं. ऐसे में हमें विदेश ही जाना होगा."

नौकरी तलाश रहे ऐसे ही एक और नौजवान का कहना है, "अपने देश में तो नौकरी तलाशना बहुत मुश्किल है. मैं पूरी कोशिश करूंगा. ईश्वर की मदद से नौकरी ढूंढने की कोशिश करूंगा."

यूरोजोन मे जारी संकट के चलते युवाओं में बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है. ऐसे में यूरोपीय संघ की तरफ से कई अभियान चलाए जा रहे हैं.

ग्रीस इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित है. तीन साल पहले ग्रीस को पहली बार आर्थिक मदद दी गई और उसके बाद वहां सरकारी खर्चों में बड़ी कटौतियां की गईं.

तब से बेरोजगारी की दर लगभग 12 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत तक जा पहुंची है. और युवाओं से बीच बेरोजगारी दर 31 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गई है.

बेशक मंदी की बुरी मार पड़ी है लेकिन सरकार के बचत के लिए उठाये गए कड़े कदमों के कारण स्थिति कहीं ज्यादा भयानक हुई है.

प्रतिभा पलायन

Image caption ग्रीस के नौजवान प्रदर्शनकारी.

ऐसे हालात में 23 वर्षीय क्रिस्टीना जाहागो जैसे प्रतिभाशाली छात्र देश छोड़ रहे हैं.

पिछले एक साल में ग्रीस से जर्मनी जाने वाले लोगों की संख्या में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है.

क्रिस्टीना को भी जब ग्रीस में नौकरी नहीं मिली तो वो भी अब जर्मनी का रुख कर रही हैं. प्रतिभाओं के इन पलायन की ग्रीस को आने वाले वर्षों में बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है.

क्रिस्टीना कहती हैं, "मैं अपने परिवार, अपनी मां और अपने पिता को नहीं छोडना चाहती हूं. विदेश जाऊंगी तो पहले साल में मेरे कोई दोस्त भी नहीं होंगे. दोस्ता तलाशना भी मुश्किल होगा. लेकिन सामने कोई और विकल्प नहीं है. यहां ग्रीस में किसी को कोई उम्मीद नहीं बची है. अर्थव्यवस्था विकसित नहीं होगी क्योंकि शिक्षित लोग विदेश में काम करेंगे और सिर्फ बूढ़े लोग यहां रह जाएंगे."

बेरोजगारी के आँकड़ें

Image caption नौकरी की तलाश जारी है और इस बीच उम्मीद की किरण भी दिखाई दी है.

लेकिन कुछ लोग इन हालात का डटकर मुकाबले कर रहे हैं. 22 वर्षीय कई युवा उद्यमियों ने कुछ महीनों पहले ग्लोवो नाम से एक अनूठी पहल की है.

इसका मकसद अलग अलग आयोजनों के लिए वैश्विक स्तर पर वॉलेंटियर्स तलाशना है.

इसके सह संस्थापक अरिस कोस्तानिदिस को फिलहाल कुछ युवाओ की जरूरत है जो एथेंस आर्ट मेले में काम कर सकें.

उनका कहना है कि ग्रीक युवाओं को बेरोजगारी के आंकड़ों से घबराने की जरूरत नहीं है.

वह कहते हैं, "कुछ लोग समझते हैं कि इस संकट का अब कोई समाधान नहीं है. मुझे ऐसा नहीं लगता है. मुझे लगता है कि ये एक अवसर है क्योंकि संकट के समय में हम अपने भविष्य को खुद तय कर सकते हैं. इसे शुरू से आकार दीजिए और नकारात्मक सोच से उबरिए. युवा लोगों को रास्ता दिखाना होगा और उस पर आगे बढ़ना होगा. हमें ग्रीस का नेतृत्व बनना है."

निराशाजनक माहौल

Image caption ग्रीस के नौजवानों में आने वाले कल को लेकर सकारात्मक भाव है.

एथेंस के आर्ट मेले में हर तरफ वॉलेंटियर दिखाई देते हैं. कोई दरवाजे पर स्वागत के लिए खड़ा है तो कोई मेले के बारे में सूचना मुहैया करा रहा है. ये सभी ऊर्जा से भरपूर हैं और काम करने को बेताब हैं.

खास कर ये वॉलेंटियर खुश है कि बेहद नकारात्मकता वाले इस समय में उन्हें कुछ करने और अनुभव हासिल करने का अवसर मिल रहा है.

ऐसे ही एक वॉलेंटियर कहते हैं, "वॉलेंटियर के तौर पर काम करना कहीं ज्यादा लोकप्रिय है क्योंकि नौकरियां तो ज्यादा है नहीं. और युवा लोग कुछ न कुछ करना चाहते हैं. ऐसे में वॉलेंटियरिंग से आप उस निराशाजनक माहौल से निकलते हैं जिससे ये देश गुजर रहा है."

एक अन्य वॉलेंटियर का कहना है, "संकट से उबरने का यही इकलौता तरीका है. हमें उसका सामना करना है और उससे लड़ना है. अगर हम हार कर बैठ जाएं और ये पूछते रहें कि क्या हो रहा है, तो कुछ नहीं होगा."

इस प्राचीन देश के युवाओं में बहुत उत्साह है. एथेंस के बार नौजवानों से भरे हुए हैं. बस जरूरत इनके उत्साह को बढ़ाने और बनाए रखने की है.

लेकिन मौजूदा संकट से ये लोग अकसर हताश हो जाते हैं. ऐसे में कई युवा या तो बेरोजगार होकर घर बैठने को मजबूर होते हैं या फिर उन्हें विदेश का रुख करना पड़ता है.

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