एप्पल ने लगाया पाठकों को करोड़ों का चूना ?

अमरीका के सरकारी वकील का दावा है कि एप्पल कंपनी ने पुस्तक प्रकाशकों से करार करके आम पाठकों को करोड़ों डॉलर का चूना लगाया है.

आईपैड और आईफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल के खिलाफ मनमाने तरीक़े से क़ीमतें निर्धारित करने के एक मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील लॉरेंस बटरमैन ने न्यूयॉर्क की एक अदालत में सोमवार को ये दावा किया.

उन्होंने कहा कि 2010 में आईपैड के बाज़ार में आने के बाद ई-बुक्स की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी एक सोची-समझी योजना का परीणाम थी.

हाँलाकि एप्पल के वक़ील ने इस मामले को ‘अजीब’ बताया है.

बचाव पक्ष के वक़ील ओरियन स्नाइडर ने कहा कि महंगाई को एप्पल और प्रकाशकों के बीच हुए करार से जोड़कर सरकार अपना पल्ला झाड़ रही है.

एप्पल कंपनी ने दावा किया है कि उसने अपने व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए पुस्तक प्रकाशकों के साथ सौदा किया है.

‘अजीब’ मामला

एप्पल ई-बुक्स विक्रेताओं द्वारा क़िताबों की क़ीमत निर्धारित किए जाने की बजाए प्रकाशकों को ख़ुद अपनी ई-बुक्स का मूल्य निर्धारित करने देता है.

अभियोजन पक्ष का कहना है कि एप्पल के प्रतिद्वन्द्वी ई-बुक विक्रेता अमेज़न को निशाना बनाने के लिए यह योजना बनाई गई.

एप्पल उतनी सस्ती दरों पर ई-बुक्स मुहैया नहीं करवा सकता था जितनी सस्ती दरों पर अमेज़न के ज़रिए ये किताबें मिल रहीं थीं.

उन्होंने कहा कि आईपैड आने के बाद अमेज़न पर सबसे ज़्यादा बिकने वाली क़िताबों की क़ीमतें बढ़ गईं. कुछ का मूल्य 9.99 डॉलर से बढ़ कर 12.99 से 14.99 डॉलर तक हो गया.

लेकिन ओरियन स्नाइडर ने सरकारी वकील को बीच में टोकते हुए दलील दी कि दूसरों के व्यापारिक निर्णयों के लिए एप्पल को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

सोमवार से न्यूयॉर्क में शुरू हुए इस मुक़दमें की सुनवाई के अगले कई हफ्तों तक चलने की उम्मीद है.

पाँच प्रकाशकों के बीच इस मामले पर पहले ही समझौता हो चुका है.

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