सीरिया: 'रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ'

Image caption माना जाता है कि इस युद्ध में अभी तक 80,000 लोगों की मौत हो चुकी है.

सीरिया में मानवाधिकार को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बात का प्रमाण मौजूद है कि सरकारी सेना और विपक्षी लड़ाकों दोनों की ओर से रसायन हथियारों का इस्तेमाल किया गया.

जाँचकर्ताओं का मानना है कि सीरिया की सरकार ने इन हथियारों का चार बार जबकि विपक्षी गुटों ने एक बार इस्तेमाल किया, हालाँकि जाँचकर्ताओं ने ये नहीं बताया कि इस्तेमाल किए गए हथियार किस तरह के थे.

ये रिपोर्ट पीड़ितों, प्रत्यक्षदर्शियों, चिकित्सकों और अन्य लोगों के बयानों पर आधारित है.

सीरिया पर बने संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय जाँच कमीशन के सदस्य कैरन अबू ज़ायद ने बीबीसी को बताया कि जाँचकर्ता इस नतीजे पर अभी नहीं पहुँच पाए हैं कि इस्तेमाल किया गया रासायनिक हथियार आखिर क्या था.

अबू ज़ायद के अनुसार, "हम ये कह रहे हैं कि इस बात पर विश्वास करने का उचित आधार मौजूद हैं कि सीरियाई युद्द में दोनो तरफ़ से रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ. हमारे पास सुबूत हैं कि चार मामलों में सरकार ने एक मामले में विपक्षी गुटों ने इन हथियारों का प्रयोग किया."

अबू ज़ायद ने कहा, "हम खुद ये नहीं बता सकते कि युद्ध में किस रासायनिक हथियार का इस्तेमाल हुआ और कैसे और किसने इसका इस्तेमाल किया. इसलिए हम इस मामले में सतर्कता बरत रहे हैं."

युद्ध अपराध

उधर जाँच कमीशन के प्रमुख पाओलो सर्जिओ पिन्हीरो के मुताबिक इस बात के काफ़ी सबूत हैं कि सीरियाई सरकार बहुत सारे युद्ध अपराधों के लिए ज़िम्मेदार है.

पाओलो सर्जिओ पिन्हीरो के अनुसार सरकारी सेनाएँ और उनके साथ जुड़े हुए गुटों ने हत्या, बलात्कार, यातनाएँ देना और दूसरे कृत्यों में भाग लिया.

"आम लोगों के खिलाफ़ ऐसे अपराध सोचसमझकर किए गए और ये मानवता के खिलाफ़ अपराध है."

पिन्हीरो के अनुसार इस युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है और इलाके में हथियार भेजने से स्थिति खराब होगी.

उन्होंने कहा, "ये झूठ है कि ज़्यादा हथियार दिए जाने से दोनो दलों के बीच बराबरी आएगी. कोई पक्ष जीत नहीं रहा है. और इस लड़ाई में कोई नहीं जीतेगा. हथियारों के इस्तेमाल से जान की ज़्यादा हानि होगी."

मौतें

Image caption सीरियाई राष्ट्रपति असद पर अंतरराष्ट्रीय जगत की ओर से अपने पद से हटने का दबाव है

बीबीसी संवाददाता जेम्स रॉबिंस के अनुसार इस रिपोर्ट में सीरिया को एक ऐसे देश की तरह दर्शाया गया है जो विनाश के गर्त में चला गया है और जहाँ हिंसक गतिविधियों आम दिनों की बात हो गई हैं.

संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट के अनुसार सीरिया में बच्चों को सिर कलम करने जैसी हिंसक गतिविधियों में ज़बरदस्ती शामिल किया जाता है.

ये रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जब सीरिया पर शांति वार्ता आयोजित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बहस चल रही है. माना जाता है कि इस युद्ध में अभी तक 80,000 लोगों की मौत हो चुकी है.

जाँचकर्ताओं के मुताबिक पिछले चार महीनों में सीरिया में जाँचकर्ताओं ने 17 संभावित नरसंहारों का ब्योरा तैयार किया है.

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