तलाक़...मगर प्यार से !

Image caption तलाक़ की प्रक्रिया जीवन के सबसे तनावपूर्ण क्षणों को जन्म देती है.

अदालत के कमरे में खड़ी एक नौ साल की बच्ची के सामने जब जज ये सवाल रखे कि उसे अपने मां या पिता में से किसके साथ रहना है तो शायद ये एक मासूम ज़िंदगी का सबसे त्रासद क्षण होगा.

तलाक़ एक शख्स के जीवन में आने वाले सबसे तनावपूर्ण लम्हों में से एक हैं.

ख़ासकर बच्चों के लिए तो इसके नतीजे और भी ज़्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं. ब्रिटेन की मिशेल क्रॉस्बी के लिए भी वो लम्हा निर्णायक रहा लेकिन एक सकारात्मक अर्थ में.

अपने माता-पिता के तलाक़ की दुखद प्रक्रिया का हिस्सा बनने वाली मिशेल कहती हैं, "मुझे ये समझ आ गया था कि इससे सिर्फ़ रिश्ते टूटते हैं. वो मेरे जीवन का निर्णायक मौक़ा था और मुझे पता चल चुका था कि आगे चलकर मुझे क़ानून की पढ़ाई करनी है और इस समस्या को मिटाने के लिए काम करना है."

मिशेल के दिमाग़ में एक ही लक्ष्य था कि उन्होने जो झेला वो किसी और बच्चे का ना झेलना पड़े.

तकनीक के सहारे तलाक़

Image caption मिशेल क्रॉस्बी और जेफ़ रेनॉल्ड्स ने मिलकर वीवोर्स डॉट कॉम की शुरूआत की है.

मिशेल ने वक़ालत शुरू की और टूटते हुए परिवारों के साथ काम करना शुरू किया. लगभग 13 साल लगाने के बाद उन्होने सोचा कि तलाक़ की इस प्रक्रिया को कम तनावपूर्ण और सहज बनाने की ज़रूरत है.

अपने अनुभव से उन्होने कुछ सामान्य तथ्यों की पहचान की और उस पर काम करने का फ़ैसला किया और इसका हल ढूंढा आधुनिक तकनीक में.

मिशेल बताती हैं, "यूं तो तलाक़ का हर मामला अपने आप में अलग है लेकिन फिर भी सारे क़िस्सों में कुछ बातें सामान्य होती हैं. आज हम मे से बहुत से लोगों के पास आई पैड या आई फ़ोन जैसी अत्याधुनिक तकनीक है तो हमने सोचा क्यों नहीं इसका इस्तेमाल किया जाए".

मिशेल कहती हैं, "तलाक़ के बहुत सारे मामलों में तो झगड़े इसी वजह से होते हैं कि वक़ीलों के साथ सही संवाद नहीं हुआ या फिर बातें क़ानून और अदालत के पचड़े में कहीं अटक कर रही गईं".

इस सबसे निजात के लिए ही अस्तित्व में आया वी वोर्स डॉट कॉम. यह एक ऐसी सॉफ्टवेयर सेवा है जिसका इस्तेमाल इंटरनेट कनेक्शन वाले किसी भी कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट से किया जा सकता है.

तलाक़ की ओर छह क़दम

वी वोर्स डॉट कॉम एक छह स्तरीय कार्यक्रम उपलब्ध कराता है जिससे तलाक़ की कष्टदायक प्रक्रिया को कम तनावपूर्ण बनाया जा सके. छह स्तरीय यह प्रोग्राम परिवारों को बच्चों, वित्त, ज़मीन-जायदाद जैसे मुद्दों पर फ़ैसला लेने में सहायता देता है.

इसके लिए भी पहले दंपति की स्क्रीनिंग होती है ताकि ये तय किया जा सके इस तकनीक का इस्तेमाल वाकई उनकी मदद करेगा या नहीं.

दूसरा क़दम होता है तलाक़ के लिए एक योजना तैयार करना जिसमें एक क़ाबिल वक़ील की मदद ली जाती है जो मध्यस्थ का काम करता है लेकिन ये सारी सेवाएं मुफ्त नहीं हैं. कंपनी इसके लिए 3000 से 15000 डॉलर तक वसूलती है.

मिशेल कहती हैं कि "इस तकनीक के ज़रिए किसी को भी पूरा मौक़ा मिलता है कि वो पूरी प्रक्रिया पर शांति से नज़र डाले और देख सके कि कब, कहां, क्या करने की ज़रूरत है".

कितना कारगर

Image caption वीवोर्स एक नया क़दम है लेकिन सबके लिए इसकी उपयोगिता संदिग्ध है.

सुनने में यह नया क़दम काफ़ी मददगार लगता है लेकिन शायद ये उतना आसान नहीं है. अमरीका के न्यूयॉर्क शहर में अमेरिकन अकैडमी ऑफ़ मैट्रिमोनियल लॉयर्स के वर्तमान अध्यक्ष माइकल स्टटमैन कहते हैं, "जब लोग तलाक़ की प्रक्रिया से गुज़र रहे होते हैं तो वो वाकई असहाय महसूस करते हैं. उन्हें मध्यस्थता की ज़रूरत पड़ती है लेकिन हर किसी के लिए कोई एक चीज़ काम नहीं करती."

स्टटमैन का मानना है कि बहुत सारे लोग इस तकनीक का इस्तेमाल कर पाएं ये मुमकिन है लेकिन सबके लिए ये काम नहीं आएगा.

वे कहते हैं, "काफ़ी लोग हैं जो इस आधुनिक तकनीक का फ़ायदा नहीं उठा सकते. ख़ासकर जिन परिवारों में शारीरिक, मानसिक या भाषाई हिंसा की प्रवृत्ति है वहां इसका प्रयोग नहीं हो सकता."

"इसके अलावा ये उम्मीद करना कि हर कोई बेहतर संवाद स्थापित कर सकेगा ये भी ग़लत है. कुछ लोगों को अपनी बात रखने के लिए मदद की ज़रूरत पड़ती है. ऐसे मामलों में एक निजी वक़ील के बिना काम कैसे चल सकता है."

स्टटमैन इस बात से भी इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते कि नई तकनीक का इस्तेमाल करने वाली इस तरह की नई कंपनियां वक़ीलों के लिए किसी तरह की चुनौती ला रही हैं.

वी वोर्स जैसे एक नए प्रयास की उपयोगिता पर सवाल ज़रूर उठाए जा सकते हैं लेकिन ये इस दिशा में एक नई पहल ज़रूर है जिसने इस तरह के कई नए विचारों के लिए रास्ता खोल दिया है.

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