बाघों के लिए ख़तरा बना कुत्तों का वायरस

  • 12 जून 2013
बाघ
Image caption अमूर के बाघों में सीडीवी पाए जाने की पुष्टि हुई है

दुनिया के दुर्लभ जीवों में शुमार एशियाई बाघों को कुत्तों में पाए जाने वाले एक विषाणु से ख़तरा है.

वाइल्डलाइफ़ वेट्स इंटरनेशनल के निदेशक जॉन लुइस ने कहा कि इस बात के पुख़्ता प्रमाण हैं कि इस विषाणु से इंडोनेशिया के बाघों के लिए ख़तरा पैदा हो गया है.

कैनाइन डिस्टेम्पर वायरस (सीडीवी) पहले कुत्तों में ही सक्रिय था लेकिन अब उसने दूसरे जीवों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है.

डा. लुइस बाघों को इस विषाणु से बचाने के लिए इंडोनेशिया के पशु चिकित्सकों के साथ मिलकर एक योजना बनाना चाहते हैं.

सीडीवी ख़सरे के विषाणु से मिलता जुलता है. सबसे पहले इसकी पहचान 20वीं सदी की शुरूआत में हुई थी और इसे थाइलासाइन यानि तस्मानियाई टाइगर की मौत के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है.

चपेट

डा. लुइस ने कहा, ''30 से 40 साल पहले ये कुत्तों की बीमारी थी. लेकिन अब इसने समुद्री स्तनधारियों और बाघों को भी अपनी चपेट में लेने की क्षमता विकसित कर ली है.''

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ से कहा कि सीडीवी को एक रोगाणु के रूप में ख़ुद को प्रभावी रखने के लिए जीवों को झुंड की ज़रूरत होती है. इस विषाणु ने जब सबसे पहले शेरों को निशाना बनाया था तो ये परिस्थिति मौजूद थी.

उन्होंने कहा, ''1990 के दशक के मध्य में अफ़्रीका के सेरेनगेती में लगभग 30 प्रतिशत शेर सीडीवी के कारण मारे गए थे. ये वायरस आसपास के गांवों में मौजूद कुत्तों से शेरों में आया था.''

उन्होंने कहा, ''एशियाई बाघों में भी ये विषाणु पाया गया है. साल 2000 से रूस के सुदूर पूर्व के क्षेत्रों में बाघों के व्यवहार में अजीब बदलाव देखा गया है. वे बेख़ौफ़ आसपास के गांवों में आते हैं और इंसानों से डरते नहीं है.''

डॉ. लुइस ने कहा कि पिछले कुछ सालों में ऐसे कुछ बाघों के ऊतकों से उनके सीडीवी से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है.

लक्षण

Image caption सुमात्रा के बाघों के सीडीवी से संक्रमित होने के संकेत मिले हैं

उन्होंने बताया कि इस विषाणु से संक्रमित होने वाले बाघों में अलग-अलग लक्षण दिखाए दिए. कुछ की मौत फेफड़ों के रोग जैसे न्यूमोनिया को कारण हुई तो कुछ तंत्रिका संबंधी बीमारी के कारण मारे गए.

डॉ. लुइस बाघों के व्यवहार में आए बदलाव से ख़ासे चिंतित हैं. उन्होंने कहा, ''इससे जान को ख़तरा बढ़ गया है. उनमें शिकारियों का ख़ौफ़ ख़त्म हो गया है और वे मानवीय गतिविधियों को क़रीब आ रहे हैं.''

उन्होंने हाल में इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप का दौरा किया था और स्थानीय पशु चिकित्सकों से बातचीत से उन्हें ऐसे संकेत मिले कि दुर्लभ प्रजाति के बाघ इस विषाणु की चपेट में आ चुके हैं.

हालांकि उन्होंने साथ ही कहा कि सुमात्रा के बाघों में सीडीवी की मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए उनके मस्तिष्क के ऊतकों की जांच करनी होगी.

डॉ. लुइस ने कहा, ''बाघों के अस्तित्व को सबसे बड़ा खतरा उनका प्राकृतिक आवास उजड़ना और शिकार है. लेकिन मुझे लगता है कि सीडीवी बाघों के लिए तीसरा सबसे बड़ा ख़तरा है.''

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