तकसीम चौक से खदेड़े गए प्रदर्शनकारी

Image caption पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आँसू गैस के गोले और रबड़ की गोलियाँ दागी

तुर्की पुलिस ने इस्तांबुल के तकसीम चौक से प्रदर्शनकारियों को हटा दिया है. सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने यहां लगभग दो सप्ताह से कब्जा जमाए रखा था.

अधिकारियों ने आँसू गैस के गोले छोड़े और रबड़ की गोलियाँ दागी. पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में आंदोलनकारियों ने उन पर पटाखे, बम और पत्थर बरसाए.

इसके बाद प्रदर्शनकारी पास में ही बने गेजी पार्क में इकट्ठा होने लगे जहाँ कई लोग पहले से ही डेरा जमाए थे.

ताजा झड़प उस समय शुरू हुई जब पुलिस ने गेजी पार्क में चल रहे प्रदर्शन को भी तितर-बितर करने की कोशिश की.

प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री रचैप तयैप एरदोआन की सरकार पर निरंकुश होने का आरोप लगाया है.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार एक धर्मनिरपेक्ष राज्य में संकीर्ण इस्लामिक मूल्यों को थोपने की कोशिश कर रही है.

इससे पहले बुधवार को प्रधानमंत्री एरदोआन ने प्रदर्शनकरियों के प्रतनिधियों से मिलने के लिए हामी भर दी थी.

(तस्वीरों में देखें--तुर्की में नौजवानों का गुस्सा सड़कों पर)

हटाए गए बैनर

प्रदर्शनकारियों द्वारा बनाए गए बैरिकेट की ओर बढ़ने से पहले अधिकारी बख्तरबंद वाहनों से आकर चौक के चारों तरफ जमा हो गए थे.

अधिकारियों ने हेलमेट पहन रखी थी और उनके पास ढालें थीं.

तकसीम चौक के ही पास की एक इमारत पर आंदोलनकारियों ने बैनर लटका रखा था जिसे पुलिसकर्मियों ने हटा दिया.

इस्तांबुल के गवर्नर हुसैन अवनी मुतलू ने कहा कि पुलिस का इरादा गेजी पार्क में प्रदर्शन को खत्म करने का नहीं था.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि, “हमारा मकसद अतातुर्क की प्रतिमा और अतातुर्क सांस्कृतिक केन्द्र से चिन्हों और तस्वीरों को हटाना है. हमारा कोई और इरादा नहीं है... गेजी पार्क और तकसीम को नहीं छुआ जाएगा. ”

Image caption प्रदर्शन में मुख्यता धर्मनिरपेक्ष ताकतें हिस्सा ले रही हैं. हालांकि प्रधानमंत्री ने इसके पीछे विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी का हाथ बताया है.

ऐसा ही संदेश पुलिस ने लाउडस्पीकर से भी प्रसारित किया है लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें इस पर भरोसा नहीं है.

तकसीम चौक में मौजूद बीबीसी के मार्क लोवेन का कहना है कि सरकार ने यह बल-प्रदर्शन जानबूझ कर किया है.

उनके मुताबिक सरकार ऐसा इसलिए कर रही है ताकि बुधवार की वार्ता को खतरे में डाला जा सके.

इस्लामीकरण का विरोध

कथित इस्लामीकरण के विरोध में युवाओं और मध्यवर्ग का प्रदर्शन अपने 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है.

प्रदर्शनकारियों ने तकसीम चौक पर काफी हद तक नियंत्रण बनाए रखा है.

प्रदर्शन शुरू होने के बाद से तीन लोगों की मौत हो चुकी है और 5,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

इस्तांबुल के अलावा अंकारा में भी प्रदर्शन हुए हैं. पुलिस ने वहाँ प्रदर्शन को खत्म करने के लिए लगभग हर रात पानी की बौछारें की और आंसू गैस के गोले दागे.

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