लैब की जगह अब टेस्ट करेगा ऐप

Image caption लैब में होने वाले टेस्ट के लिए भारी-भरकम उपकरणों की ज़रूरत होती है

आम यूरीन टेस्ट के लिए पैथोलॉजिकल लैब में जाने की ज़रूरत आने वाले समय में ख़त्म हो सकती है, न ही रिपोर्ट के लिए दिन भर का इंतज़ार करना होगा.

अब स्मार्टफ़ोन की मदद से यूरीन सैम्पल का परीक्षण किया जा सकेगा और मिनटों में रिपोर्ट मिल जाएगी.

मुंबई के निकट ठाणे की बायो-मेडिकल टेक्नॉलॉजी कंपनी--बायोसेंस ने एक नया स्मार्टफ़ोन ऐप तैयार किया है जिसका नाम है यू-चेक.

इस ऐप के ज़रिए पीएच, ग्लूकोज़, केटोन और मूत्र में मौजूद दूसरे प्रोटीनों का आकलन किया जा सकता है. इस ऐप की मदद से डायबिटीज़ का पता लगाने के अलावा, लिवर और किडनी की हालत का भी अंदाज़ा लगाया जा सकेगा.

इसके लिए स्मार्टफ़ोन के कैमरे से यूरीन सैम्पल की तस्वीर लेनी होती है, दो मिनट के बाद रिपोर्ट मोबाइल के स्क्रीन पर ही आ जाती है, जिसके बाद आप टेस्ट की रिपोर्ट अपने डॉक्टर को ईमेल कर सकते हैं.

स्मार्टफ़ोन सही कोण से बिना हिले तस्वीर ले सके इसके लिए एक ख़ास किट का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा, कलर रेफ़रेंस मैट और कलर डिपस्टिक की भी ज़रूरत होती है.

युवाओं की कंपनी

चार युवाओं ने मिलकर बायोसेंस की स्थापना की है, इनमें दो इंजीनियर और दो डॉक्टर हैं. इस कंपनी का उद्देश्य सस्ती और आसान मेडिकल टेक्नॉलॉजी लोगों तक पहुँचाना है.

कंपनी के संस्थापकों में से एक, डॉक्टर योगेश पाटिल कहते हैं, "यह बहुत ही हल्की और सस्ती टेक्नॉलॉजी है जिसका इस्तेमाल दूर दराज़ के इलाक़ों में किया जा सकता है जहाँ पैथोलॉजिकल लैब नहीं हैं."

मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी में वैज्ञानिक रह चुके और बायोसेंस के सह-संस्थापक मिस्कीन इंगवाले ने हाल ही में अमरीका में प्रतिष्ठित टेड कॉन्फ्रेंस में यू-चेक पेश किया जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया.

यू-चेक अब भारत और अमरीका के बाज़ार में उपलब्ध है, यह अभी सिर्फ़ आईफ़ोन के साथ काम करता है मगर जल्द ही इसे एंड्रोयड जैसे दूसरे सिस्टमों के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसमें कुछ महीने लगेंगे.

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